सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में शामिल होने गुजरात पहुंचे प्रधानमंत्री का आज गर्मजोशी से स्वागत किया गया। सड़क मार्ग से मंदिर तक पहुंचे पीएम मोदी के स्वागत में स्थानीय लोग और पार्टी कार्यकर्ता बड़ी संख्या में घरों से बाहर निकले।बता दें कि देश के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में सबसे पहले सोमनाथ महादेव का उल्लेख किया जाता है। इसकी स्थापना के 1000 साल पूरे होने के अवसर पर सरकार और मंदिर के ट्रस्ट की तरफ से सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का आयोजन किया गया है। इसके तहत कई धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम कराए जा रहे हैं। पीएम मोदी सोमनाथ में आयोजित ड्रोन शो के भी साक्षी बने।
मंदिर में दर्शन-पूजन, फिर सोमनाथ के आसमान में अखंड भारत...
ड्रोन शो से पहले प्रधानमंत्री ने मंदिर में जलाभिषेक और दर्शन-पूजन भी किया। इसके बाद पीएम मोदी ने 72 घंटे तक चलने वाले मंत्र जाप में भी हिस्सा लिया। प्रधानमंत्री की मौजूदगी में मंदिर न्यास की तरफ से
विशेष ड्रोन और ऑडियो-विजुअल शो का आयोजन भी दिखाया गया। रोशनी और अत्याधुनिक तकनीक की मदद से दिखाए गए इतिहास में अध्यात्म जगत के खास बिंदुओं का चित्रण किया गया। ड्रोन के बेमिसाल समन्वय से आसमान में अखंड सोमनाथ अखंड भारत भी लिखा गया।
गृहराज्य पहुंचने पर प्रधानमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत
इससे पहले सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में हिस्सा लेने गुजरात पहुंचे प्रधानमंत्री के स्वागत में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों को सड़कों के किनारों पर खड़े देखा गया। पीएम मोदी ने उत्साह के साथ स्वागत करने वाले गुजरातवासियों के प्रति आभार प्रकट करते हुए सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, सोमनाथ में आकर धन्य महसूस कर रहा हूं। पूरा देश एकजुट है और सोमनाथ पर आक्रमण के 1000 साल पूरे होने के अवसर पर स्वाभिमान पर्व में शरीक हो रहा है।
पीएम मोदी ने खुद साझा की थीं सोमनाथ से जुड़ी स्मृतियां
बता दें कि आज सोमनाथ आगमन से पहले प्रधानमंत्री ने खुद देशवासियों से सोमनाथ से जुड़ी स्मृतियों को साझा करने की अपील करते हुए सोशल मीडिया पर अपनी यात्राओं की दुर्लभ तस्वीरें साझा की थीं। इन तस्वीरों में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी सरीखी हस्तियों को देखा जा सकता है।
क्या है सोमनाथ स्वाभिमान पर्व
दरअसल, साल 1026 में पहली बार विदेशी आक्रांताओं ने प्रथम ज्योतिर्लिंग के रूप में आस्था के केंद्र सोमनाथ पर आक्रमण किया था। विध्वंस से पुनरुत्थान तक 1,000 वर्षों के इसी सफर पर 8 से 11 जनवरी तक सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का आयोजन किया जा रहा है। वर्ष 2026 इस वजह से भी बेहद खास है कि क्योंकि यह मंदिर के आधुनिक पुनरुद्धार की 75वीं वर्षगांठ है। 1951 में इसकी आधुनिक प्राण प्रतिष्ठा सरदार वल्लभ भाई पटेल के प्रयासों का नतीजा थी।
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विशेष पूजा, महाआरती और आध्यात्मिक प्रवचन
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के उपलक्ष्य में पूरे साल भर आध्यात्मिक, सांस्कृतिक व सामाजिक गतिविधियों का आयोजन करने की योजना बनाई गई है। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का उद्देश्य भारत की सभ्यतागत विरासत, शाश्वत तीर्थस्थल के विनाश और पुनरुद्धार की गाथा और राष्ट्रीय स्वाभिमान को प्रदर्शित करना है। मंदिर में विशेष पूजा, महाआरती और आध्यात्मिक प्रवचन होंगे।