भाजपा नेता सुदेश वर्मा ने कहा कि लोकतंत्र का अर्थ तब तक पूरा नहीं हो सकता जब तक कि हम समाज के सभी वर्गों का समर्थन न पा लें। भाजपा में पुराने समय से मुस्लिम नेता राष्ट्रीय स्तर पर अपना प्रभाव छोड़ने में सफल रहे। यह भाजपा में उनकी स्वीकार्यता का ही नतीजा था। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों की साजिश का पर्दाफाश हो रहा है।
बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज भाजपा के साथ जुड़ रहा है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों की दुनिया में मोदी की स्वीकार्यता का इससे बड़ा सबूत और क्या हो सकता है कि मुस्लिम देश उन्हें अपना सबसे बड़ा सम्मान दे रहे हैं, मुस्लिमों के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में पाकिस्तान की मुखालफत के बाद भी भारत को जगह दिया जाता है। यह बड़े बदलाव का संकेत है जिसका असर पूरी दुनिया में दिखाई पड़ेगा।
'मुस्लिमों के अंदर एक हलचल'
भाजपा के एक मुस्लिम नेता ने कहा कि इससे कतई इनकार नहीं किया जा सकता कि मुस्लिम समाज में पार्टी के लिए अभी भी संकोच है। वह खुलकर भाजपा के साथ नहीं आ रहा है, लेकिन यह भी उतना ही सच है कि पढ़े-लिखे मुस्लिमों के अंदर एक हलचल है यह समझने के लिए कि क्या वाकई भाजपा उनके लिए ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम राष्ट्रों के बीच मोदी की लोकप्रियता ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। इससे पाकिस्तान की मुस्लिम परस्त राजनीति का भी पर्दाफाश हुआ है।
'कोई मुसलमान भरोसा कैसे करे'
वहीं, एक मुस्लिम संगठन के एक प्रतिनिधि का कहना है कि राजनीति में दिखावे का भी अपना खूब महत्त्व है। अगर आरएसएस-भाजपा की नीतियों में इतना ही बड़ा बदलाव आया है तो यह बदलाव टिकट बंटवारे में नजर क्यों नहीं आया। उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में एक भी मुसलमान को टिकट नहीं दिया है। जो छह टिकट मुस्लिमों को मिले हैं वे भी इतने कमजोर उम्मीदवारों हैं जो जीतने की स्थिति में नहीं हैं।
यह औपचारिकता से अधिक कुछ नहीं हैं। मुस्लिम नेता का कहना है कि अगर वाकई भाजपा अपने को मुसलमान हितैषी दिखाना चाहती है तो उसे अपने संगठन में और अपनी राज्य सरकारों में मुस्लिमों को बड़े ओहदे देकर इसका सबूत भी पेश करना चाहिए। जब तक भाजपा साध्वी प्रज्ञा जैसों को आगे बढ़ाती रहेगी, तब तक कोई मुसलमान उसका भरोसा कैसे करेगा?