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PM मोदी को मिला सर्वोच्च सम्मान, बोले- फलस्तीन की शांति के लिए भारत प्रतिबद्ध

Sun, 11 Feb 2018 04:42 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : ANI
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फलस्तीन की ऐतिहासिक यात्रा के दौरान शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फलस्तीन के राष्ट्रपति मोहम्मद अब्बास से मिले। मोदी ने राष्ट्रपति अब्बास को भरोसा दिलाया कि भारत फलस्तीन के लोगों के हितों के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, भारत को उम्मीद है कि क्षेत्र में शांति लौटेगी। 

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वार्ता के बाद दोनों नेताओं ने संयुक्त प्रेस वार्ता में कहा, हम जानते हैं कि यह आसान नहीं है, लेकिन हमें प्रयास करते रहना चाहिए क्योंकि यहां बहुत कुछ दांव पर है। राष्ट्रपति अब्बास ने माना कि भारतीय नेतृत्व हमेशा फलस्तीन में शांति के लिए साथ खड़ा रहा। अब्बास ने कहा, फलस्तीन आजाद देश के लक्ष्य के लिए वार्ता के लिए तैयार है। उन्होंने भारत से इस्राइल के साथ शांति प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने को कहा। अब्बास ने कहा, भारत एक अंतरराष्ट्रीय ताकत है। गुट निरपेक्ष आंदोलन में उसका बड़ा हाथ रहा है। 

मोदी की यह यात्रा भारत और फलस्तीन के लोगों के बीच दोस्ती और प्यार का प्रतीक है। इससे पहले राष्ट्रपति अब्बास ने राष्ट्रपति भवन परिसर में एक आधिकारिक समारोह में प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया। मोदी पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने फलस्तीन के आधिकारिक दौरा किया। इससे पहले 1960 में प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने गाजा पट्टी का दौरा किया था, लेकिन जब फलस्तीन अस्तित्व में नहीं आया था। 
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मोदी को ग्रैंड कॉलर ऑफ द स्टेट अवार्ड
फलस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ग्रैंड कॉलर ऑफ द स्टेट ऑफ फलस्तीन अवार्ड दिया। दोनों देशों के संबंधों में बढ़ावा देने में प्रधानमंत्री मोदी के योगदान के चलते उन्हें यह पुरस्कार दिया गया। विदेश गणमान्य, जैसे राष्ट्राध्यक्ष और शासनाध्यक्ष को दिया जाने वाला यह फलस्तीन का सबसे बड़ा सम्मान है। यह अवार्ड सऊदी अरब के शाह सलमान, बहरीन के शाह हमाद और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को दिया जा चुका है।  

 

भारत-फलस्तीन के बीच छह समझौते

PM Narendra Modi tour to Palestine
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फलस्तीन यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच पांच करोड़ डॉलर यानी करीब 325 करोड़ रुपये के छह समझौते हुए। इसमें करीब 200 करोड़ करोड़ रुपये से बनने वाला सुपर स्पेशियालिटी अस्पताल शामिल है। इसके अलावा 50 लाख डॉलर की लागत से महिला सशक्तीकरण केंद्र बनेगा। वहीं 50 लाख डॉलर का शिक्षा क्षेत्र में एक समझौता हुआ और रामल्ला स्थित राष्ट्रीय प्रिंटिंग प्रेस की मशीनों को लेकर भी एक करार हुआ। 

मोदी जार्डन सेना के हेलीकाप्टर से अम्मान से गाजा पट्टी स्थित रामल्ला पहुंचे। उनके हेलीकाप्टर के साथ इस्रराइल वायुसेना के हेलीकाप्टर भी उड़ान भर रहे थे। रामल्ला में फलस्तीन के प्रधानमंत्री रामी हमदल्ला ने उनका स्वागत किया। फलस्तीन में उतरते ही मोदी ने ट्वीट किया, यह ऐतिहासिक दौरा है। यह द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत बनाएगा। मोदी और प्रधानमंत्री हमदल्ला के साथ फलस्तीन के महान नेता यासर अराफात के मकबरे पर पहुंचे और उन्हें श्रद्धांजलि दी।

 प्रधानमंत्री ने पास में स्थित अराफात म्यूजियम का भी दौरा किया। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी आधिकारिक समारोह के लिए रामल्ला स्थित राष्ट्रपति भवन पहुंचे। वहां राष्ट्रपति मोहम्मद अब्बास ने उनका स्वागत किया। दोनों नेता गले मिले और दोनों देशों के राष्ट्रगान के दौरान खड़े रहे। फिर उन्होंने गार्ड आफ ऑनर का निरीक्षण किया और दोनों देशों के अधिकारियों से हाथ मिलाए।

 फिर दोनों नेता आधिकारिक वार्ता के लिए राष्ट्रपति कार्यालय के भीतर चले गए। वार्ता के बाद दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए, साझा प्रेस वार्ता की और साथ में लंच किया। फिर मोदी हेलीकाप्टर से अम्मान के लिए निकल गए। जहां से वे यूएई के लिए निकल जाएंगे। प्रधानमंत्री नौ फरवरी से जार्डन, फलस्तीन और यूएई के दौरे पर हैं।
 
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यरुसलेम को राजधानी घोषित होने से है तनाव

PM Narendra Modi
मोदी का यह दौरा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस घोषणा के बीच हुआ है, जिसमें उन्होंने यरुसलेम को इस्रायल की राजधानी घोषित कर दिया था। इसके चलते पूरे मध्य पूर्व में तनाव बढ़ गया था। बाद में ट्रंप के इस फैसले के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र महासभा में एक प्रस्ताव पेश हुआ। इसके समर्थन में भारत समेत 128 देशों ने मतदान किया और ट्रंप के फैसले को अमान्य करार दिया। 

भारत निभा सकता है शांति वार्ता में भूमिका
राष्ट्रपति अब्बासी ने इस वार्ता से पहले कहा था, हम हाल में हुईं चीजों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से चर्चा करेंगे। इस्रायल फलस्तीन शांति प्रक्रिया, भारत के साथ द्विपक्षीय सहयोग और क्षेत्रिय स्थिति के संबंध में बात करेंगे। चर्चा होगी कि क्षेत्र में शांति को बढ़ावा देने में भारत क्या भूमिका निभा सकता है।

फलस्तीन और इस्रायल  के बीच अंतिम समझौते में भी भारत बड़ी भूमिका निभा सकता है। आर्थिक मुद्दों पर भी बात होगी। अब्बासी ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा क्षेत्र में शांति और स्थिरता को समर्थन देने की भारत की चिर स्थायी नीति को दर्शाता है। भारत शुरुआत से टू स्टेट समझौते का समर्थन करता है, जिसके मुताबिक इस्रायल और भविष्य का फलस्तीन साथ में शांति से रहेंगे।
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