केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डा. हर्ष वर्धन कोविड-19 वैक्सीन का पहला टीका लगवाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने अपनी तरफ से प्रस्ताव भी दे दिया है। हालांकि पहला टीका किसे लगेगा यह अभी तय नहीं हुआ है। समझा जा रहा है कि देश की जनता का टीके पर विश्वास मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी या राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद इसे लगवाने पर सहमति दे सकते हैं। मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि पहला टीका लगने के साथ ही देश में कोविड-19 टीकाकरण अभियान आरंभ हो जाएगा। बताते हैं एक सप्ताह के भीतर काफी कुछ तय हो जाने की संभावना है।
मंत्रालय के कोविड-19 टीकाकरण से जुड़े सूत्र का कहना है कि टीकाकरण अभियान को धार देने के लिए राज्य सरकारें सहयोगी भूमिका निभाएंगी। केन्द्र ही इसकी नोडल एजेंसी रहेगा। इसके लिए समन्वय, कोल्ड चैन बनाने, टीकाकरण के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया आदि की रूपरेखा तैयार हो चुकी है। टीकाकरण अभियान शुरू करने से पहले केन्द्र सरकार के रणनीतिकार कम से कम 40 करोड़ डोज सुनिश्चित कर लेना चाहते हैं। सीरम इंस्टीट्यूट ने पांच करोड़ डोज तैयार होने का आश्वासन दिया है।
सूत्र का कहना है कि टीकाकरण अभियान को शुरू करने से पहले बैकअप, टीका लगने के बाद लोगों में संभावित एलर्जी की संभावना, इसके बाद की स्थिति से निबटने की रणनीति को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है। केंद्र सरकार इसे लेकर काफी संवेदनशील है और दुनिया की दूसरे नंबर की बड़ी आबादी वाले देश में सबसे कारगर अभियान का रूप देने पर काम कर रही है।
केन्द्रीय मंत्री डा. हर्ष वर्धन के कार्यालय से जुड़े सूत्र ने बताया कि पहले सभी को टीका मुफ्त में देने की योजना थी। लेकिन कई संवेदनशील विषयों पर विचार करने के बाद इसमें कुछ संशोधन की सहमति बनी है। निम्न और कम आय वर्ग के लोगों, बीपीएल आदि को यह टीका मुफ्त में लगाया जाएगा। पहले चरण में तीन करोड़ के करीब स्वास्थ्य कर्मियों, सुरक्षा कर्मियों और अग्रिम मोर्चे पर तैनात लोगों को लगेगा। इन्हें भी मुफ्त में और सबसे पहले कुछ चरणों में लगाया जाएगा। इसके बाद देश के अन्य 27 करोड़ लोगों के लिए टीकाकरण अभियान शुरू करने की योजना है। इसमें बुजुर्ग, स्वास्थ्य की गंभीर समस्या झेल रहे लोगों को प्रमुखता दी जाएगी।
हालांकि अभी इसे अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। बताते हैं कि सीरम इंस्टीट्यूट में तैयार हुआ कोविड-19 का टीका लगभग दो यूएस डॉलर प्रति डोज की कीमत में पड़ रहा है। फाइजर का टीका सबसे मंहगा और इसके करीब तीन गुना कीमत का है। किसे कौन सा टीका लगना है यह सब अभी तय होना है। समाज का एक वर्ग (संपन्न) अपने पैसे से टीका लगवाने का पक्षधर है। उसके लिए भी नीति तय होनी है।
केन्द्र सरकार के रणनीतिकारों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी खुद इस अभियान की शुरुआत करने जा रहे हैं। संसाधन, अर्थव्यस्था, आबादी और दूर-दराज की स्थिति को देखते हुए भारत का टीकाकरण अभियान दुनिया में अनोखा होने वाला है। भारत ही दक्षिण एशिया का पहला देश है, जिसने इतने कम समय में सुरक्षित टीका तैयार किया है। सीरम इंस्टीट्यूट के टीके को विश्व स्वास्थ्य संगठन की भी मंजूरी मिली है। इसके अलावा भारत दक्षिण एशिया के अपने पड़ोसी देशों, जैसे नेपाल, श्रीलंका, भूटान, बांग्लादेश समेत अन्य को भी टीकाकरण अभियान में मदद कर सकता है।