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भारतीय विज्ञान कांग्रेस: साइंटिफिक अप्रोच के साथ बढ़ रहा भारत, हमारी ओर देख रही दुनिया...बोले PM मोदी

Tue, 03 Jan 2023 11:13 AM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, साइंस में पैशन के साथ जब देश की सेवा का संकल्प जुड़ जाता है तो नतीजे भी अभूतपूर्व आते हैं। 
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : ANI
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विस्तार
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को भारतीय विज्ञान कांग्रेस को संबोधित किया। उन्होंने कहा, भारत अगले 25 वर्षों में जिस ऊंचाई पर होगा, उसमें भारत की वैज्ञानिक शक्ति की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने कहा, साइंस में पैशन के साथ जब देश की सेवा का संकल्प जुड़ जाता है तो नतीजे भी अभूतपूर्व आते हैं। आज का भारत जिस साइंटिफिक अप्रोच के साथ आगे बढ़ रहा है, हम उसके नतीजे भी देख रहे हैं। साइंस के क्षेत्र में भारत तेजी से विश्व के टॉप देशों में शामिल हो रहा है।

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प्रधानमंत्री ने कहा, इस बार भारतीय विज्ञान कांग्रेस की थीम भी एक ऐसा विषय है जिसकी दुनिया में सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। दुनिया का भविष्य सस्टेनेबल डेवलमेंट के साथ ही सुरक्षित है। आपने सस्टेनेबल डेवलमेंट के विषय को महिला सशक्तिकरण के साथ जोड़ा है। आज देश की सोच केवल यह नहीं है कि साइंस के ज़रिए महिला सशक्तिकरण हो, बल्कि महिलाओं की भागीदारी से साइंस का भी सशक्तिकरण करें। साइंस और रिसर्च को नई गति दें, यह हमारा लक्ष्य है। उन्होंने कहा, अभी भारत को G-20 अध्यक्षता की जिम्मेदारी मिली है। G-20 के प्रमुख विषयों में भी वुमन लीड डेवलपमेंट एक बड़ी प्राथमिकता का विषय है।
 
आठ सालों में देश ने किए असाधारण काम 
पीएम मोदी ने कहा, बीते आठ वर्षों में भारत ने गवर्नेंस से लेकर समाज और अर्थव्यवस्था तक कई ऐसे असाधारण काम किए हैं, जिनकी आज चर्चा हो रही है। पिछले आठ वर्षों में एक्सट्रा मोरल रिसर्च एंड डेवलपमेंट में महिलाओं की भागीदारी दोगुनी हुई है। महिलाओं की ये बढ़ती भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि समाज भी आगे बढ़ रहा है और साइंस भी आगे बढ़ रही है।

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लैब से निकलकर जमीन तक पहुंचें प्रयास 
पीएम मोदी ने कहा, विज्ञान के प्रयास बड़ी उपलब्धियों में तभी बदल सकते हैं, जब वो लैब से निकलकर लैंड (जमीन) तक पहुंचे। जब उसका प्रभाव ग्लोबल से लोकर ग्रासरूट तक हो, जब उसका विस्तार जर्नल्स से लेकर जमीन तक हो। जब उससे बदलाव रिसर्च से होते हुए रियल लाइफ में दिखने लगे। उन्होंने कहा, भारत की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए, भारत में विज्ञान का विकास, हमारे वैज्ञानिक समुदाय की मूल प्रेरणा होनी चाहिए। भारत में विज्ञान भारत को आत्मनिर्भर बनाने वाली होनी चाहिए।

सोने की स्याही वाली दुर्लभ कुरान प्रदर्शित
इस बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से प्रेरित एक संगठन ने 16वीं शताब्दी की दुर्लभ सोने की स्याही से लिखी पवित्र कुरान की प्रति 108वीं भारतीय विज्ञान कांग्रेस में प्रदर्शित की। दुनिया भर में सिर्फ चार दुर्लभ प्रतियों में से एक को संघ से प्रेरित संगठन ने संरक्षित कर के रखा है। आईएससी प्रदर्शनी में भारतीय शिक्षण मंडल (बीएसएम) की अनुसंधान शाखा रिसर्च फॉर रिसर्जेंस फाउंडेशन (आरएफआरएफ) के स्टाल पर कुरान की प्रति और कुछ प्राचीन पांडुलिपियां, जिनमें से कुछ सदियों पुरानी हैं, प्रदर्शित किया गया। मंडल का गठन शिक्षा के क्षेत्र में एक राष्ट्रीय पुनरुत्थान को पूरा करने के लिए किया गया था। 

प्रति को 16वीं सदी में तैयार किया गया था
आरएफआरएफ के निदेशक भुजंग बोबडे ने बताया कि पवित्र कुरान की इस प्रति को 16वीं सदी में तैयार किया गया था और पूरी दुनिया में इसकी सिर्फ चार प्रतियां हैं। इस कुरान में पाठ के नीचे दिए गए संदर्भ (फुटनोट) नस्तालिक लिपि में लिखे गए हैं। बोबडे दिल्ली स्थित राष्ट्रीय पांडुलिपि प्राणिकरण के प्रधान अन्वेषक भी हैं। उन्होंने बताया कि नस्तालिक और तूसी फारसी भाषा की दो लिपियां हैं और नस्तालिक को दुनिया की श्रेष्ठ लिपियों में माना जाता है। सोने की स्याही वाली दुर्लभ कुरान की एक और विशेषता यह है कि इसके 385 पन्नों में एक भी गलती नहीं हैं। बोबडे ने बताया कि हैदराबादी निजाम के दीवान के परिवार ने उन्हें कुरान की यह प्रति दी थी।

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