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Kalpasar Project Gujarat: पीएम मोदी के कल्पसर प्रोजेक्ट को मिली नई उड़ान, डच तकनीक से संवरेगा गुजरात का भविष्य

सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीदरलैंड यात्रा से गुजरात के महत्वाकांक्षी 'कल्पसर प्रोजेक्ट' को बड़ा बढ़ावा मिला है। खंभात की खाड़ी में बनने वाले इस विशाल बांध प्रोजेक्ट के लिए भारत और नीदरलैंड के बीच तकनीकी सहयोग का समझौता हुआ है। डच तकनीक 'अफस्लूटडिक' की मदद से खाड़ी में मीठे पानी की झील बनाई जाएगी।
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डच तकनीक से संवरेगा गुजरात का भविष्य। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे महत्वाकांक्षी सपनों में से एक 'कल्पसर प्रोजेक्ट' को हकीकत में बदलने की दिशा में अब एक बहुत बड़ा कदम उठाया गया है। रविवार को अपनी नीदरलैंड यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वहां के मशहूर जल प्रबंधन ढांचे 'अफस्लूटडिक' का बहुत ही बारीकी से दौरा किया। इस दौरे में उनके साथ नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन भी मौजूद थे। इस दौरे के बाद भारत और नीदरलैंड के बीच कल्पसर प्रोजेक्ट को लेकर एक अहम तकनीकी समझौता भी हुआ है।
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प्रधानमंत्री मोदी ने नीदरलैंड के इस बांध में इस्तेमाल की गई तकनीक की जमकर तारीफ की और कहा कि यह तकनीक हमारे देश के लिए भी बहुत काम आ सकती है। आपको बता दें कि नीदरलैंड के इस अफस्लूटडिक बांध और गुजरात में बनने वाले कल्पसर प्रोजेक्ट के बीच बहुत सी समानताएं हैं। प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी में भारत के जल शक्ति मंत्रालय और नीदरलैंड के बुनियादी ढांचा एवं जल प्रबंधन मंत्रालय के बीच कल्पसर प्रोजेक्ट पर तकनीकी सहयोग के लिए एक 'लेटर ऑफ इंटेंट' (Letter of Intent) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस बड़े समझौते से अब गुजरात के इस अटके हुए प्रोजेक्ट के तेजी से पूरा होने का नया रास्ता खुल गया है।
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कल्पसर प्रोजेक्ट आखिर है क्या और यह कैसे काम करेगा?
कल्पसर प्रोजेक्ट गुजरात के खंभात की खाड़ी में बनने वाला एक बहुत ही विशाल और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य खंभात की खाड़ी के पास एक बहुत बड़ा बांध बनाना है। इस बांध की मदद से उन सात नदियों के पानी को समुद्र में खारा होने से रोका जाएगा, जिनका मीठा पानी अभी बेकार में समुद्र में बह जाता है। इस पानी को रोककर खाड़ी के अंदर ही एक बहुत बड़ा मीठे पानी का तालाब (रिजर्वायर) बनाया जाएगा। सिर्फ पानी ही नहीं, बल्कि इस प्रोजेक्ट की मदद से बिजली भी बनाई जाएगी, सिंचाई की व्यवस्था होगी और यातायात के लिए नया रास्ता भी तैयार होगा।

गुजरात के लोगों को इस प्रोजेक्ट से क्या-क्या बड़े फायदे होंगे?
अगर यह कल्पसर प्रोजेक्ट एक बार पूरी तरह से बनकर तैयार हो जाता है, तो इससे गुजरात के लोगों की किस्मत बदल जाएगी। सौराष्ट्र क्षेत्र के नौ जिलों की 42 तहसीलों की लगभग 10 लाख हेक्टेयर खेती की जमीन को इस मीठे पानी से सिंचाई का सीधा फायदा मिलेगा। इससे किसानों की फसल अच्छी होगी। सबसे बड़ी बात यह है कि इस प्रोजेक्ट के बनने के बाद दक्षिण गुजरात और सौराष्ट्र के बीच की दूरी जो अभी 240 किलोमीटर है, वह घटकर मात्र 60 किलोमीटर रह जाएगी। इसके अलावा, इस प्रोजेक्ट से 1,500 मेगावाट पवन ऊर्जा और 1,000 मेगावाट सौर ऊर्जा भी पैदा होगी, जिससे बिजली की कमी दूर होगी।
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नीदरलैंड का 'अफस्लूटडिक' बांध दुनिया में क्यों मशहूर है?
नीदरलैंड का अफस्लूटडिक बांध पूरी दुनिया में इंजीनियरिंग और जल प्रबंधन का एक जीता-जागता और बेहतरीन उदाहरण माना जाता है। करीब 80 साल पहले बनाए गए इस 32 किलोमीटर लंबे बांध ने उत्तरी सागर के खारे पानी को रोककर एक मीठे पानी की झील बना दी है। यह बांध नीदरलैंड के निचले इलाकों को भयानक बाढ़ से भी बचाता है। सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह समुद्र के खारे पानी को अंदर आने से रोकता है। इसी तर्ज पर अब गुजरात के कल्पसर प्रोजेक्ट में भी नीदरलैंड की इसी 90 साल पुरानी महारत और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।

दरअसल, गुजरात एक ऐसा राज्य रहा है जिसने दशकों तक अनियमित बारिश और भयानक सूखे का सामना किया है। सरदार सरोवर बांध बनने से राज्य को बहुत बड़ी राहत जरूर मिली, लेकिन भविष्य की पानी की जरूरतों के लिए केवल एक ही प्रोजेक्ट पर निर्भर रहना बहुत बड़ा खतरा हो सकता था। इसी बात को ध्यान में रखते हुए जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने कल्पसर प्रोजेक्ट का सपना देखा था। साल 2004 में उनके ही नेतृत्व में इस बांध की जगह तय करने के लिए भावनगर में एक बहुत बड़ा समुद्री सर्वे भी शुरू किया गया था। लेकिन यह प्रोजेक्ट तकनीकी रूप से बहुत ज्यादा जटिल था।
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