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Congress: पीएम मोदी-जिनपिंग की मुलाकात पर कांग्रेस ने गलवां की याद दिलाई, कहा- हमले का इनाम दे रही सरकार

Sun, 31 Aug 2025 03:28 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

जयराम रमेश ने लिखा कि 'सेना प्रमुख ने लद्दाख में चीन के साथ सीमा पर यथास्थिति बहाल करने की मांग की थी। लेकिन इसे हासिल करने में विफल रहने के बावजूद मोदी सरकार ने चीन के साथ सुलह की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं।'
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पीएम मोदी और शी जिनपिंग - फोटो : PTI
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विस्तार
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रविवार को चीन के तियानजिन में पीएम मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बैठक हुई। इस बैठक में दोनों देशों के संबंधों को बेहतर बनाने पर सहमति बनी। हालांकि कांग्रेस ने केंद्र सरकार की इस कोशिश पर निशाना साधा है और कहा कि चीन के साथ गलवांं में हुई हिंसक झड़प के बावजूद चीन के साथ संबंध बेहतर करना इस सरकार का न्यू नॉर्मल है।
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'चीन की आक्रामकता को वैधता दी'
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई मुलाकात का मूल्यांकन, जून 2020 में गलवां घाटी में चीन के साथ हुई हिंसक झड़प में हमारे 20 बहादुर जवानों की कुर्बानी के संदर्भ में होना चाहिए। इसके बावजूद, चीन की आक्रामकता को भुलाते हुए 19 जून 2020 को प्रधानमंत्री मोदी ने चीन को क्लीन चिट दे दी। जयराम रमेश ने लिखा कि 'सेना प्रमुख ने लद्दाख में चीन के साथ सीमा पर यथास्थिति बहाल करने की मांग की थी। लेकिन इसे हासिल करने में विफल रहने के बावजूद मोदी सरकार ने चीन के साथ सुलह की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं, जिससे चीन की उस क्षेत्र में आक्रामकता को अप्रत्यक्ष रूप से वैधता मिल गई।

'चीन-पाकिस्तान के नापाक गठजोड़ को स्वीकार किया'
कांग्रेस ने कहा कि उप-सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने पाकिस्तान की मदद की थी, लेकिन इस नापाक गठजोड़ पर ठोस प्रतिक्रिया देने के बजाय, मोदी सरकार ने इसे नियति मानकर स्वीकार कर लिया और अब चीन को राजकीय दौरों से पुरस्कृत किया जा रहा है। जयराम रमेश ने ब्रह्मपुत्र नदी पर बनाए जा रहे विशाल हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट की घोषणा की है, जिसके हमारे उत्तर-पूर्वी राज्यों पर गंभीर प्रभाव पड़ेंगे। लेकिन मोदी सरकार की तरफ से इस मुद्दे पर एक शब्द भी नहीं बोला गया।
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मुलाकात पर क्या बोले आप सांसद संजय सिंह?
इस द्विपक्षीय बैठक पर आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने कड़ा हमला बोला। उन्होंने सवाल उठाया कि मोदी ने चीन के लिए क्या-क्या नहीं किया, 40 लाख करोड़ रुपये का व्यापार हुआ लेकिन बदले में चीन ने सिर्फ चोट और विश्वासघात दिया। संजय सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने पाकिस्तान का साथ दिया था, ऐसे में अचानक यह बदलाव क्यों आया? उन्होंने बैठक की मंशा पर सवाल खड़े किए।

सीपीआई(एम) महासचिव एमए बेबी बोले दुनिया को होगा फायदा
वहीं, महासचिव एमए बेबी ने इस बैठक पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में यह अच्छी खबर है, खासकर तब जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हर देश पर टैरिफ युद्ध थोप रहे हैं, यहां तक कि यूरोप और भारत पर भी। बेबी ने कहा कि चीन और भारत दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देश हैं, जिनके पास सबसे बड़ी आर्थिक ताकत, विशाल बाजार और प्राकृतिक संसाधन हैं। अगर दोनों देश अपने आपसी मतभेद सुलझाकर साथ आते हैं, तो यह न सिर्फ भारत और चीन बल्कि पूरी दुनिया के लिए लाभकारी होगा। उन्होंने कहा कि अगर भारत और चीन गंभीरता से साथ काम करें तो बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था बनने में कोई कठिनाई नहीं होगी।
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सीपीआई(एम) नेता जॉन ब्रिट्टास ने मुलाकात का किया स्वागत
तियानजिन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बैठक पर सीपीआई(एम) के नेता जॉन ब्रिट्टास ने स्वागत किया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार और प्रधानमंत्री का यह निर्णय सराहनीय है कि वे चीन में उच्च स्तरीय वार्ता कर रहे हैं। ब्रिट्टास ने कहा कि भारत-चीन रिश्तों को एक नए स्तर पर ले जाना चाहिए। दोनों देशों के बीच बढ़ते संबंध क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूती देंगे और आर्थिक सहयोग को नया आयाम देंगे। उन्होंने कहा कि भारत और चीन की आकांक्षाएं बहुत बड़ी हैं और इस समय सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि अमेरिका की नीतियां संकीर्ण और भारत के हितों के खिलाफ हैं। ब्रिट्टास ने उम्मीद जताई कि दोनों देश मिलकर एशिया और वैश्विक राजनीति में नई दिशा देंगे।

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