रोजगार के साथ-साथ सरकार की प्राथमिकता में गरीब और किसान हैं। किसानों की आय लागत का दो गुना करने के संदर्भ में कृषि मंत्रालय समेत अन्य लगातार प्रधानमंत्री के दिशा-निर्देशों के अनुरुप कार्य कर रहे हैं। इसके लिए राज्य सरकारों के साथ तालमेल बनाकर नीतियों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। इसी तरह से प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना को लेकर खासा रुचि ले रहे हैं। इसे भाजपा के नेता भी गेम चेंजर मान रहे हैं।
केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के एडिशनल सेक्रेटरी का कहना है कि यह केन्द्र सरकार की फ्लैगशिप योजना में शामिल है। प्रधानमंत्री खुद इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं। वह चाहते हैं कि
आयुष्मान भारत योजना को निचले तबके के गरीबों को ध्यान में रखकर उन्हें सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने के इरादे से लागू की जाए। इसलिए इस स्वास्थ्य बीमा योजना को लेकर केन्द्र सरकार चार साल पूरा होने पर कोई घोषणा भी कर सकती है।
प्रधानमंत्री कार्यालय को आयुष्मान भारत योजना से काफी उम्मीदें हैं। नीति आयोग के सदस्य और डीआरडीओ के पूर्व प्रमुख वीके सारस्वत भी इसे गरीबों को सुरक्षा का आधार देने वाली योजना के रूप में देख रहे हैं। आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा योजना के अलावा सरकार का ध्यान युवाओं को रोजगार तथा किसानों की स्थिति में सुधार के लिए किए जाने वाले प्रयास को बताना है।
विधि एवं न्याय मंत्रालय के पूर्व संयुक्त सचिव पीबी सिंह का मानना है कि आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा योजना समय पर और सही तरीके से लागू होने के बाद जनता के बीच में सरकार की अच्छी छवि बनाएगी। हालांकि रोजगार और किसान के मामले में सिंह का कहना है कि सरकार अभी कुछ खास नहीं कर पाई है। वहीं पीएमओ के एक अधिकारी का कहना है कि चार साल पूरा होने पर सरकार के कामकाज की रिपोर्ट प्रकाशित की जाएगी। इसमें सरकार के कामकाज का ब्यौरा होगा। इसकी तेजी से तैयारी चल रही है।