प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को मालदीव के नए राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए। इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद पीएम मोदी शाम 7ः30 बजे के करीब राजधानी दिल्ली के लिए रवाना हो चुके हैं। प्रधानमंत्री के तौर पर यह मोदी का पहला मालदीव दौरा है। इससे पहले 2011 में तत्कालीन प्रधानमंत्रीय मनमोहन सिंह ने हिंद महासागर के इस द्वीपीय देश की यात्रा की थी। सोलिह के शपथ ग्रहण समारोह के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सर्वोच्च रैंकिंग वाला अतिथि बनाया गया। इस अवसर पर चीन की ओर से वहां के सांस्कृतिक और पर्यटन मंत्री ही हिस्सा ले रहे हैं। बता दें कि मालदीव में चीन समर्थक नेता अब्दुल्ला यामीन को हराने के बाद सोलिह ने स्पष्ट कहा था कि वह इंडिया फर्स्ट पॉलिसी अपनाएंगे, जिसका असर इस अतिथि सूची पर भी नजर आ रहा है।
बता दें कि मालदीव हमारा सबसे निकट का हिंद महासागरीय क्षेत्र का देश है और भारत की सामुद्रिक क्षेत्र से सुरक्षा को देखते हुए काफी अहम स्थान रखता है। इसलिए प्रधानमंत्री के मालदीव के नए राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद के शपथ ग्रहण में पहुंचने को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मोदी की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि पिछले वर्षों में भारत और मालदीव के बीच बिगड़े संबंध अब सुधर रहे हैं। चीन की तरफ मालदीव का झुकाव भारत की कुछ प्रमुख चिंताओं में से एक रहा है। सोलिह की टीम चीन के लाखों डॉलर के निवेश की भी समीक्षा कर रही है। ऐसे में अब भारत को मालदीव में अपने लिए एक मौका दिख रहा है। भारत ने सोलिह को आश्वस्त किया है कि वह किसी भी तरह की मदद के लिए तैयार है।
भारत ने कुछ साल पहले मालदीव को 75 मिलियन डॉलर की क्रेडिट लाइन दी थी। अधिकारियों के मुताबिक संबंध खराब होने तक इसका केवल एक तिहाई ही इस्तेमाल हो पाया था। इसके अलावा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और मालदीव मॉनिटरी अथॉरिटी के बीच करंसी बदलने को लेकर भी समझौता है, जो वित्तीय स्थिरता में मदद कर सकती है।
भारत और मालदीव
मालदीव द्वीपों का देश है। केरल के समुद्र तट से इसकी दूरी 250-300 मील की दूरी पर इसकी सीमाएं शुरू हो जाती हैं। यह 26 द्वीपों का समूह है और दो-ढाई घंटे की हवाई यात्रा से यहां पहुंचा जा सकता है। सामरिक दृष्टिकोण से मालदीव का काफी महत्व है। यहां से हिन्द महासागर क्षेत्र में भारतीय समुद्र तटों तक सीधी निगरानी रखी जा सकती है।
इसलिए भारत और मालदीव का रिश्ता रणनीतिक दृष्टि से हमेशा से महत्व का रहा है। भारत हमेशा मालदीव को सहायता भी देता आया। युद्धपोत, हेलीकाप्टर, रेडार आदि। मालदीव की शांति और स्थिरता भारत के लिए मायने रखती है। पिछले कुछ साल से मालदीव में शुरू हुए अनिश्चितता के वातावरण ने नई दिल्ली की चिंता बढ़ा दी थी।
प्रधानमंत्री दे सकते हैं सौगात
राष्ट्रपति सालेह के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के बाद प्रधानमंत्री मालदीव को सौगात दे सकते हैं। वह भारत द्वारा मालदीव की शांति, स्थिरता तथा उसके विकास में भारत के योगदान की पहल कर सकते हैं। सूत्र बताते हैं कि विदेश मंत्रालय के अधिकारी मालदीव को लेकर काफी संवेदनशील हैं। भारत का हमेशा से मानना है कि शांतिपूर्ण और स्थिर मालदीव क्षेत्र के लिए आवश्यक है। इसे देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी मालदीव को कुछ आर्थिक सहायता देने का भी प्रस्ताव कर सकते हैं।