प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की मुलाकात के बाद शिवसेना के सुर बदल गए हैं। शिवसेना ने कहा, हम सत्ता में साथ नहीं पर रिश्ता नहीं टूटा। राजनीतिक मतभेद का मतलब यह कतई नहीं है कि व्यक्तिगत रिश्ते कमजोर हो गए हैं।
शिवसेना के मुखपत्र सामना में सीएम का दिल्ली दौरा शीर्षक से छपे संपादकीय में लिखा गया, महाराष्ट्र की समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री दिल्ली गए और प्रधानमंत्री से मिले। यह इसलिए महत्वपूर्ण है कि अन्य जगहों पर राज्य और केंद्र सरकार के बीच जो संघर्ष चल रहा है। उसका संक्रमण महाराष्ट्र में नहीं फैला है।
मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने हमेशा प्रधानमंत्री का मान रखा है। मंगलवार को उन्होंने विनम्रतापूर्वक राज्य की समस्याएं प्रधानमंत्री के सामने रखीं, जिसे प्रधानमंत्री ने शांतिपूर्वक सुना। यह समस्याएं धीरे-धीरे हल होंगी। शिवसेना ने कहा, मोदी और उद्धव की मुलाकात जिस तरह से राज शिष्टाचार का हिस्सा थी, उसी तरह से व्यक्तिगत रिश्ते की भी थी। इसलिए दिल्ली की इस भेंट पर इसके आगे लंबे समय तक चर्चा की धूल उड़ती रहेगी।
25 साल का साथ रहा
भाजपा-शिवसेना का पुराना रिश्ता रहा है। करीब 25 साल तक दोनो पार्टियों का गठबंधन रहा है और दो बार महाराष्ट्र की सत्ता में भी शामिल रहे हैं। लेकिन साल 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद अचानक शिवसेना ने भाजपा से खुद को अलग कर लिया और विपरीत विचारधारा वाली पार्टी कांग्रेस-एनसीपी के मिलकर महाराष्ट्र में महा विकास आघाड़ी (एमवीए) सरकार बनाई। इसके बाद से भाजपा और शिवसेना के बीच सियासी तीर चलते रहते हैं।
डरने की कोई बात नहीं, पांच साल चलेगी सरकार: एनसीपी
मोदी उद्धव की मुलाकात पर एनसीपी ने स्पष्ट किया, डरने की कोई बात नहीं है। एमवीए सरकार पांच साल का अपना कार्यकाल पूरा करेगी। लेकिन, दूसरे दिन ही शिवसेना के मुखपत्र में मोदी और ठाकरे के बीच रिश्ते को लेकर संपादकीय छपी जिसमें शिवसेना के तेवर में बदलाव नजर आया है।