विश्व आर्थिक मंच का मुख्यालय जिनेवा में है। यह एक गैर-लाभकारी संस्था है। इसका उद्देश्य विश्व में बिजनेस राजनीति, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में कार्य करने वाले प्रभावी लोगों को एक मंच पर लाकर वैश्विक, औद्योगिक दिशा तय करना है।
इसकी स्थापना 1971 में जिनेवा विश्वविद्यालय में कार्यरत प्रोफेसर एम श्वाब ने की थी। तब इसका नाम यूरोपियन प्रबंधन था। 1971 में ही यूरोपीय आयोग और यूरोपीय प्रौद्योगिकी संगठन के सहयोग से इस संगठन की पहली बैठक हुई।
1976 में इस मंच ने दुनिया की 1000 प्रमुख कंपनियों को सदस्यता देना शुरू किया। वर्ष 1987 में इसका नाम विश्व आर्थिक मंच कर दिया गया। तब से अब तक, हर साल जनवरी में इसकी बैठक आयोजित होती है। साल 2015 में इस मंच को आर्थिक संस्थान के रूप में मान्यता मिली।
सिर्फ एक बार दावोस से बाहर हुई बैठक
विश्व आर्थिक मंच की बैठक हमेशा दावोस में होती है। लेकिन एक बार ऐसा मौका आया जब यह न्यूयॉर्क में आयोजित की गई। अमेरिका पर 9/11 के आतंकी हमले के बाद 2002 में इसका आयोजन न्यूयॉर्क में हुआ। यह फैसला अमेरिका और उसे लोगों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करने को लिया गया।
दावोस - यूरोप में सबसे ऊंची जगह बसा एक शहर
दावोस लैंड वासर नदी के तट पर स्थित स्विट्जरलैंड का खूबसूरत शहर है। यह शहर दोनों ओर स्विस आल्प्स पर्वत की प्लेसूर और अल्बूला श्रृंखला से घिरा है। दावोस की आबादी महज 11,000 है। यह शहर यूरोप में सबसे ऊंची जगह पर बसा है।
दावोस की सड़कों पर हर तरफ बर्फ की चादर बिछी है। इसके बावजूद स्विट्जरलैंड के इस रिसॉर्ट शहर में हर ओर सिर्फ भारत का जोर है। कभी हेल्थ टूरिज्म के लिए विख्यात यह शहर स्कीइंग प्रेमियों का ठिकाना कहा जाता है।
फिलहाल, यहां की इमारतों पर लगे बड़े-बड़े बोर्ड, बसें पर लगे पोस्टर भारत और भारतीय कंपनियों का प्रचार करते दिख रहे हैं। रविवार को हुई पिछले कुछ वर्षों की सबसे भारी बर्फबारी ने सड़कों की चौड़ाई थोड़ा कम कर दी है।
लेकिन विश्व आर्थिक मंच की बैठक में हिस्सा लेने आए लोगों का उत्साह चरम पर है। निजी और सरकारी लाउंज के काउंटर भारतीय व्यंजनों से पटे पड़े हैं। भारी बर्फबारी के चलते चाय-पकोड़े की मांग सबसे ज्यादा है। लोग वड़ा पाव और डोसा का स्वाद लेते भी नजर आ रहे हैं।
भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर भारत लाउंज स्थापित किया है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र सरकार की ओर से भी लाउंज बनाए गए हैं। इसके अलावा, कभी भारतीय कंपनियों ने अपने सेटअप लगाए हैं।