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दावोसः पीएम मोदी दुनिया को बताएंगे, भारत मतलब बिजनेस

Mon, 22 Jan 2018 10:31 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
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स्विट्जरलैंड के खूबसूरत शहर दावोस में हर साल होने वाली विश्व आर्थिक मंच की बैठक में दुनिया भर के बड़े नेताओं, कारोबारियों, उद्योगपतियों और अर्थशास्त्रियों का जमावड़ा होता है। लेकिन इस बार का सम्मेलन खास है।

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भारत वैश्विक निवेश के लिए दुनिया से सीधी बात करने जा रहा है। पीएम मोदी मंगलवार को सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ भारत के भविष्य संबंधों पर अपना नजरिया दुनिया के सामने रखेंगे। उनकी कोशिश यह बताने की होगी कि अब भारत का मतलब बिजनेस है। दुनिया की सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था आर्थिक महाशक्ति बनने के लिए बेकरार है। 

पीएम खुद कह चुके हैं कि दुनिया भारत की नीतियों और विकास की क्षमताओं की कहानी उसके मुखिया से सुनना चाहती है। दावोस में 125 करोड़ भारतीयों की सफलता की कहानी सुनाने में उन्हें बहुत गर्व होगा।
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हाल ही में मोदी ने कहा था कि भारत ने दुनिया भर में अपनी छाप छोड़ी है इसलिए अब उसका लाभ उठाने की जरूरत है। भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। सभी वैश्विक रेटिंग एजेंसियों ने इसे मान्यता दी है। बड़े बाजार के तौर पर ताकत बढ़ाने के लिए दावोस एक बेहतरीन अवसर है।

पीएम मोदी 21 साल बाद दावोस जाने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री हैं। 1997 में तत्कालीन प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा दावोस बैठक में शामिल हुए थे। इसमें करीब 2500 लोग हिस्सा लेते हैं। इसे खास वर्ग के सम्मेलन के रूप में देखा जाता है।

दावोस में सरकारी और गैर-सरकारी लोग और संगठन एक साथ मिलकर वैश्विक विकास के लिए फैसले लेते हैं। पांच दिन तक चलने वाली इस 48वीं बैठक में व्यापार, राजनीति, कला, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों से कई नामी हस्तियां शिरकत करेंगी। भारत की ओर से पीएम मोदी समेत 130 लोग इसमें शामिल होंगे।

क्या है विश्व आर्थिक मंच

Narendra Modi, Davos
विश्व आर्थिक मंच का मुख्यालय जिनेवा में है। यह एक गैर-लाभकारी संस्था है। इसका उद्देश्य विश्व में बिजनेस राजनीति, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में कार्य करने वाले प्रभावी लोगों को एक मंच पर लाकर वैश्विक, औद्योगिक दिशा तय करना है।

इसकी स्थापना 1971 में जिनेवा विश्वविद्यालय में कार्यरत प्रोफेसर एम श्वाब ने की थी। तब इसका नाम यूरोपियन प्रबंधन था। 1971 में ही यूरोपीय आयोग और यूरोपीय प्रौद्योगिकी संगठन के सहयोग से इस संगठन की पहली बैठक हुई।

1976 में इस मंच ने दुनिया की 1000 प्रमुख कंपनियों को सदस्यता देना शुरू किया। वर्ष 1987 में इसका नाम विश्व आर्थिक मंच कर दिया गया। तब से अब तक, हर साल जनवरी में इसकी बैठक आयोजित होती है। साल 2015 में इस मंच को आर्थिक संस्थान के रूप में मान्यता मिली।

सिर्फ एक बार दावोस से बाहर हुई बैठक
विश्व आर्थिक मंच की बैठक हमेशा दावोस में होती है। लेकिन एक बार ऐसा मौका आया जब यह न्यूयॉर्क में आयोजित की गई। अमेरिका पर 9/11 के आतंकी हमले के बाद 2002 में इसका आयोजन न्यूयॉर्क में हुआ। यह फैसला अमेरिका और उसे लोगों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करने को लिया गया।

दावोस - यूरोप में सबसे ऊंची जगह बसा एक शहर
दावोस लैंड वासर नदी के तट पर स्थित स्विट्जरलैंड का खूबसूरत शहर है। यह शहर दोनों ओर स्विस आल्प्स पर्वत की प्लेसूर और अल्बूला श्रृंखला से घिरा है। दावोस की आबादी महज 11,000 है। यह शहर यूरोप में सबसे ऊंची जगह पर बसा है।
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भारी बर्फबारी के चलते चाय-पकोड़े की मांग बढ़ी

दावोस की सड़कों पर हर तरफ बर्फ की चादर बिछी है। इसके बावजूद स्विट्जरलैंड के इस रिसॉर्ट शहर में हर ओर सिर्फ भारत का जोर है। कभी हेल्थ टूरिज्म के लिए विख्यात यह शहर स्कीइंग प्रेमियों का ठिकाना कहा जाता है।

फिलहाल, यहां की इमारतों पर लगे बड़े-बड़े बोर्ड, बसें पर लगे पोस्टर भारत और भारतीय कंपनियों का प्रचार करते दिख रहे हैं। रविवार को हुई पिछले कुछ वर्षों की सबसे भारी बर्फबारी ने सड़कों की चौड़ाई थोड़ा कम कर दी है।

लेकिन विश्व आर्थिक मंच की बैठक में हिस्सा लेने आए लोगों का उत्साह चरम पर है। निजी और सरकारी लाउंज के काउंटर भारतीय व्यंजनों से पटे पड़े हैं। भारी बर्फबारी के चलते चाय-पकोड़े की मांग सबसे ज्यादा है। लोग वड़ा पाव और डोसा का स्वाद लेते भी नजर आ रहे हैं।

भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर भारत लाउंज स्थापित किया है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र सरकार की ओर से भी लाउंज बनाए गए हैं। इसके अलावा, कभी भारतीय कंपनियों ने अपने सेटअप लगाए हैं।
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