एक सवाल अब भी मौजूद है? जो मुठभेड़ के दौरान आतंकियों की जो बुलेट सेना के जवानों के गले के हिस्से के आस-पास या अगल-बगल अथवा पीछे के हिस्से में आएगी, उसका क्या होगा? ऐसे सवाल पर सेना मुख्यालय के सूत्र भी अभी कोई जवाब नहीं दे पा रहा हैं। इस बारे में उनका कहना है कि यह मानक मौजूदा निविदा की शर्तों में था ही नहीं।
सेना मुख्यालय सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान से लगती हुई सीमा पर लगातार आतंकी घुसपैठ के प्रयास में हैं। उन्हें घुसपैठ में मदद देने के लिए पाकिस्तान के सुरक्षा बल लगातार संघर्ष विराम का उल्लंघन कर रहे हैं। इसे देखते हुए नए गुणवत्ता की बुलेट प्रूफ जैकेट की अपरिहार्य आवश्यकता है।
मेक इन इंडिया होगी जैकेट
सेना मुख्यालय सूत्रों के अनुसार 1.86 लाख बुलेट प्रूफ जैकेट पूरी तरह से मेक इन इंडिया होगी। इस बुलेट प्रूफ जैकेट में चीन से आयातित सामानों का इस्तेमाल नहीं होगा। एस1 बिड जीतने वाली कंपनी के प्रमोटर आशीष कंसल का कहना है कि उनकी कंपनी देश की पहली ऐसी कंपनी है जो अपने सिरामिक समेत अन्य कच्चा माल खुद बनाती है। वह दुनिया के देशों में इसकी आपूर्ति भी करती है। आशीष ने कहा कि वह सेना की जरूरतों को विशेष वरीयता पर रखकर चल रहे हैं और सेना से आर्डर मिलने के बाद निर्धारित समय में उनकी कंपनी गुणवत्ता की बुलेट प्रूफ जैकेट की आपूर्ति कर देगी।
क्या होगा आगे
बुलेट प्रूफ जैकेट की प्राइसिंग बिड खुलने के बाद अब अर्नेस्ट मनी जमा होने तथा परफामेंस बांड आदि की औपचारिकता भर रह जाएगी। इसमें अगले एक महीने का समय लगने की संभावना है। माना यह जा रहा है कि रक्षा राज्य मंत्री द्वारा संसद में दी जानकारी के मुताबिक जून 2018 के महीने से सेना को स्टील बुलेट रोकने वाली जैकेटों की आपूर्ति आरंभ हो जाएगी।