प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्वतंत्रता दिवस पर दिए अपने भाषण में रोजगार सृजन और अर्थव्यवस्था में सुधार के उपायों के बारे में भी बात करनी चाहिए थी। शिवसेना ने सोमवार यह बात अपने मुखपत्र सामना में लिखी।
पार्टी ने लिखा कि पीएम मोदी ने अपने करीब 90 मिनट के भाषण में देश में कोरोना वैक्सीन के परीक्षण, देश की रक्षा क्षमताओं, नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन के साथ अन्य कई मुद्दों पर बात की लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जिस आत्मनिर्भर भारत योजना की इतनी लंबी चौड़ी चर्चा हो रही है क्या वह कोरोना महामारी से उत्पन्न आर्थिक संकट को दूर करने में सक्षम होगी? देश में अब तक करीब 14 करोड़ अपनी नौकरी गंवा चुके हैं। आगे यह संख्या बढ़ेगी। रोजगार, कारोबार और नौकरियां खत्म हो चुकी हैं। बेहतर होता प्रधानमंत्री इन सब पर भी बोलते।
शिवसेना ने लिखा कि सेना और वायुसेना हमारे देश की सीमाओं की रक्षा कर रही हैं और दुश्मनों से बचाए रखे हैं लेकिन हम बेरोजगारी और भूख के दानव से कैसे लड़ेंगे जोकि देश में बेकाबू होता जा रहा है?