गोरक्षा के नाम पर देश के कई हिस्सों में हो रही हिंसा पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर तल्ख टिप्पणी की है। मानसून सत्र से एक दिन पहले सर्वदलीय बैठक में पीएम ने कहा, कुछ असामाजिक तत्वों ने गोरक्षा को अराजकता फैलाने का माध्यम बना लिया है।
देश में सौहार्द बिगाड़ने वाले इसका लाभ उठा रहे हैं। इससे देश की छवि प्रभावित हो रही है। इस तरह की गुंडागर्दी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी दलों को इसकी भर्त्सना करनी चाहिए। उन्होंने राज्य सरकारों को ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई करने की सलाह दी।
पीएम मोदी ने कथित गोरक्षकों पर तीसरी बार सख्त टिप्पणी की है। उन्होंने 29 जून को साबरमती आश्रम से भी गोरक्षा के नाम पर गुंडागर्दी करने वालों को कड़ी चेतावनी दी थी। पीएम ने कहा, गाय को हमारे यहां मां माना जाता है। लोगों की भावनाएं गाय से जुड़ी हुई हैं। लेकिन हमें यह याद रखना होगा कि गाय की रक्षा के लिए कानून है और किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने का हक नहीं है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कानून व्यवस्था राज्य की जिम्मेदारी है। राज्यों को ऐसे तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। यह भी देखना चाहिए कि क्या इस बहाने कुछ लोग व्यक्तिगत दुश्मनी तो नहीं निकाल रहे।
भ्रष्टाचार पर कार्रवाई राजनीति का स्वच्छता अभियान
पीएम ने यह भी साफ कर दिया कि राजनीतिक भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू की गई मुहिम जारी रहेगी। उन्होंने इसे राजनीतिज्ञों की साख बचाने के लिए जरूरी ‘स्वच्छता अभियान’ बताया। पीएम ने नाम लिए बगैर राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद और तृणमूल कांग्रेस पर हमला बोला।
वहीं एक ट्वीट में पीएम ने कहा, ‘सभी राजनीतिक दलों को ऐसे लोगों के खिलाफ एकजुट होना चाहिए, जिन्होंने देश को लूटा है और जब उन पर कानूनी कार्रवाई होती है तो वे इसे राजनीतिक षड्यंत्र बताकर बचने का रास्ता खोजते हैं।’
कश्मीर में अटल की नीति पर चल रही सरकार
प्रधानमंत्री ने कहा, सरकार कश्मीर में हर हाल में शांति की बहाली और देश विरोधी ताकतों को जड़ से उखाड़ फेंकने को प्रतिबद्ध है। जल्द ही दोनों लक्ष्यों को हासिल कर लिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार कश्मीर के लिए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा तय किए गए मार्ग पर आगे बढ़ रही है। विपक्ष के संवादहीनता के आरोपों के जवाब में पीएम ने यह बात कही।
राष्ट्रपति चुनाव में आम सहमति बनती तो अच्छा होता
- फोटो : ANI
सर्वदलीय बैठक के बाद संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार ने बताया कि पीएम ने सोमवार को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव और जीएसटी पर भी अपनी बात रखी। पीएम ने कहा, राष्ट्रपति चुनाव के लिए आम सहमति बनती तो अच्छा होता, लेकिन जो प्रचार अभियान का स्तर रहा, वो बहुत ही गरिमामय था और किसी तरह की कड़वी भाषा या कटुता का भाव नहीं देखा गया। प्रधानमंत्री ने जीएसटी लागू कराने के लिए सभी दलों को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, यह सहकारी संघवाद का चमकता हुआ उदाहरण है।
गोरक्षा, कश्मीर, भ्रष्टाचार पर सफाई के मायने
दरअसल, सोमवार से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में विपक्ष ने गोरक्षा के नाम पर हो रही हिंसा, राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के परिवार के खिलाफ भ्रष्टाचार मामले में कार्रवाई और कश्मीर में जारी हिंसा को मुख्य मुद्दा बनाने का संकेत दिया है। यही कारण है कि सत्र के एक दिन पहले प्रधानमंत्री ने इन तीनों ही मुद्दों पर अपनी ओर से विपक्ष को जवाब दे दिया।
मसलन, अब अगर विपक्ष गोरक्षा के नाम पर हिंसा की याद दिलाएगा तो सरकार पीएम की ओर से बार-बार इन घटनाओं की निंदा करने का तर्क देगा। जबकि भ्रष्टाचार और कश्मीर के मामले में तीखा रुख अपना कर पीएम ने संदेश दिया है कि इन दोनों ही मुद्दों पर सरकार विपक्ष के साथ दो-दो हाथ करने को तैयार है।