प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमिलनाडु के कलपक्कम स्थित भारत के पहले स्वदेशी प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) की क्रिटिकैलिटी (आत्मनिर्भर चेन रिएक्शन ) हासिल करने पर प्रशंसा व्यक्त करते हुए इसे भारत की असैन्य परमाणु यात्रा में एक निर्णायक पल बताया। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में, पीएम मोदी ने रिएक्टर की खूबियां बताते हुए इसे देश विशाल थोरियम भंडार का दोहन करने की दिशा में बड़ा कदम करार दिया। प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम में शामिल वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई दी।
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उन्होंने लिखा, आज भारत ने अपने नागरिक परमाणु यात्रा में एक निर्णायक कदम उठाया है, जिससे उसके परमाणु कार्यक्रम का दूसरा चरण आगे बढ़ा है। कलपक्कम स्थित स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने क्रिटिकैलिटी हासिल कर ली है। यह उन्नत रिएक्टर, जो खपत से अधिक ईंधन उत्पादन करने में सक्षम है, हमारी वैज्ञानिक क्षमता की गहराई और हमारे इंजीनियरिंग उद्यम की ताकत को दर्शाता है। यह कार्यक्रम के तीसरे चरण में हमारे विशाल थोरियम भंडार का दोहन करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। भारत के लिए यह गर्व का क्षण है। हमारे वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई।
पीएम मोदी ने कलपक्कम में पहले स्वदेशी फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (500 मेगावाट) में कोर लोडिंग की शुरुआत देखी। उन्होंने रिएक्टर वॉल्ट और कंट्रोल रूम का दौरा किया। उन्हें इस संयंत्र की प्रमुख विशेषताओं के बारे में जानकारी दी गई। एक बार चालू हो जाने पर, भारत रूस के बाद वाणिज्यिक रूप से संचालित फास्ट ब्रीडर रिएक्टर वाला दूसरा देश होगा।
इस बारे में सरकार की ओर से एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि भारत ने परमाणु ईंधन चक्र के संपूर्ण स्पेक्ट्रम को कवर करते हुए व्यापक क्षमताएं विकसित कर ली हैं। सरकार ने 2003 में भारत के सबसे उन्नत परमाणु रिएक्टर पीएफबीआर के निर्माण और संचालन के लिए भारतीय परमाणु विद्युत निगम लिमिटेड (भविनी) की स्थापना की थी। आत्मनिर्भर भारत की सच्ची भावना के अनुरूप, पीएफबीआर को भविनी द्वारा पूरी तरह से स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित किया गया है, जिसमें लघु एवं मध्यम उद्यमों सहित 200 से अधिक भारतीय उद्योगों का महत्वपूर्ण योगदान है।
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थोरियम भंडार का पूर्ण उपयोग होगा
फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (एफबीआर) शुरू में यूरेनियम-प्लूटोनियम मिक्स्ड ऑक्साइड (एमओएक्स) ईंधन का उपयोग करेगा। ईंधन कोर के चारों ओर मौजूद यूरेनियम-238 की परत परमाणु रूपांतरण से गुजरेगी, जिससे और अधिक ईंधन उत्पन्न होगा, इसलिए इसे 'ब्रीडर' नाम दिया गया है। इस चरण में थोरियम-232 का उपयोग भी एक परत के रूप में परिकल्पित किया गया है, जो स्वयं एक विखंडनीय पदार्थ नहीं है। रूपांतरण द्वारा, थोरियम विखंडनीय यूरेनियम-233 का निर्माण करेगा, जिसका उपयोग तीसरे चरण में ईंधन के रूप में किया जाएगा। एक एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भारत के प्रचुर थोरियम भंडार के पूर्ण उपयोग का मार्ग प्रशस्त करता है।
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