प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को यहां कहा कि भारत और बांग्लादेश सहयोग एवं आपसी समझ से जुड़े देश हैं। भारत और बांग्लादेश की संस्कृति काफी हद तक समान है। दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग ही विकास की कुंजी है।
मोदी ने यहां विश्वभारती विश्वविद्यालय के 49वें दीक्षांत समारोह के दौरान बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी के अलावा विश्वविद्यालय की कुलपति सबुज कली सेन के साथ मंच साझा किया। समारोह में चांसलर के तौर पर संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देश के युवाओं को भारत और बांग्लादेश के महान लोगों के सांस्कृतिक योगदान के बारे में जानकारी देने के लिए सरकार की ओर से पहल की जाएगी।
उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया को समाहित करने की भावना ही भारतीयता है। वेदों की यह भावना हजारों साल पहले से लेकर 21वीं सदी की चुनौतियों के मौजूदा दौर में भी प्रासंगिक है। मोदी ने कहा कि विदेशों में लोग गुरुदेव रबींद्रनाथ को बेहद सम्मान से देखते हैं। वह चाहे अफगानिस्तान के लोग हों या फिर तजकिस्तान के। रबींद्रनाथ पहले वैश्विक नागरिक थे और आज भी हैं। उनका गुजरात से भी नाता रहा है।
लिखा जा रहा भारत-बांग्लादेश के संबंधों का सुनहरा अध्याय : मोदी
मोदी ने कहा कि भारत और बांग्लादेश ने हाल के वर्षों में कुछ ऐसे मसलों को सुलझा कर आपसी संबंधों के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय की रचना की है जिन्हें सुलझाना असंभव माना जाता था। इन वर्षों के दौरान भूमि और तटीय सीमाओं से जुड़े कई जटिल मसलों को सुलझाने में सफलता मिली है। प्रधानमंत्री ने कहा कि चाहे सड़क, रेल या अंतर्देशीय जलमार्ग, या तटीय नौवहन हो, हम संपर्क के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
बांग्लादेश भवन का उद्घाटन किया
दीक्षांत समारोह के बाद नरेंद्र मोदी और शेख हसीना ने परिसर में बांग्लादेश भवन का उद्घाटन किया। यह भवन बांग्लादेश की वित्तीय मदद से बना है। मोदी ने यहां शेख हसीना की अगवानी की। इसके बाद दोनों नेताओं ने आगंतुक रजिस्टर में हस्ताक्षर किए। मोदी ने कहा कि भारत और बांग्लादेश भले ही दो अलग अलग देश हों लेकिन यह आपसी समन्वय एवं सहयोग के जरिए एक-दूसरे से जुड़े हैं। बांग्लादेश भवन इसकी मिसाल है।
जल्द रोहिंग्या शरणार्थियों को वापस ले म्यांमार सरकार : हसीना
बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने शुक्रवार को यहां कहा कि बांग्लादेश ने मानवीय आधार पर करीब 11 लाख रोहिंग्या शरणार्थियों को शरण दी है लेकिन हम चाहते हैं कि म्यांमार की सरकार यथाशीघ्र उनको वापस बुला ले। हसीना ने यहां बांग्लादेश भवन के उद्घाटन के मौके पर कहा कि हमारी 16 करोड़ की जनसंख्या है। यदि जरूरी हुआ तो हम रोहिंग्या शरणार्थियों के साथ अपना खाना भी साझा करेंगे।
भारत के प्रति बांग्लादेश ने जताई कृतज्ञता
इधर बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री मोहम्मद शहरयार आलम ने द्विपक्षीय वार्ता का जिक्र करते हुए कहा कि भारत के प्रति बांग्लादेश कृतज्ञ है। खासकर भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के म्यांमार दौरे के बाद उनके भरोसे से साफ है कि भारत रोहिंग्या शरणार्थियों के मसले पर बांग्लादेश के रुख का समर्थन करता है। स्वराज ने कहा था कि भारत रोहिंग्या शरणार्थियों की सुरक्षित एवं सम्मानजनक वापसी के पक्ष में है।
विश्वभारती ने 50 गांवों में विकास की प्रक्रिया शुरू की
मोदी ने बताया कि विश्वभारती ने आसपास के 50 गांवों में विकास की प्रक्रिया शुरू की है। वर्ष 2021 में इस संस्थान के सौ साल पूरे होने के मौके पर यदि कम से कम सौ गांवों को हर तरह विकसित एवं आत्मनिर्भर बनाया जा सके तो यह रबींद्रनाथ के सपनों को पूरा करने की दिशा में एक ठोस कदम होगा।