प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपदाओं से निपटने की वैश्विक प्रयास को एक करने की जरूरत बताते हुए कहा, दुनिया आपस में बेहद करीब से जुड़ी हुई है और किसी एक जगह की आपदा का दुनिया के किसी दूसरे हिस्से में व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। लिहाजा, आपदाओं से निपटने की कोशिश अलग-थलग नहीं, बल्कि एकीकृत होनी चाहिए।
मंगलवार को 40 देशों के 5वें अंतरराष्ट्रीय आपदारोधी अवसंरचना (आईसीडीआरआई) सम्मेलन को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, आपदाओं के दौरान स्वाभाविक रूप से पीड़ितों के प्रति भावनाएं उमड़ पड़ती हैं। हर कोई राहत और बचाव को प्राथमिकता देता है। लेकिन, इस तरह के कार्य को लचीला बनाए जाने की जरूरत है, ताकि जल्दी से जल्दी पीड़ित लोगों की सामान्य जीवन में वापसी हो सके। यह लचीलापन आपदा सामने आने पर नहीं बन सकता, बल्कि इसे किसी भी तरह की आपदा के आने से पहले तैयार करना होगा। इसके लिए यह जरूरी है कि पिछली आपदाओं का अध्ययन किया जाए और उनसे सबक लेकर तैयारी की जाए।
सीडीआरआई और सम्मेलन को आपदाओं के प्रति लचीलापन लाने में अहम बताते हुए उन्होंने कहा, कुछ ही वर्षों में 40 से ज्यादा देश सीडीआरआई का हिस्सा बन गए हैं। इसमें उन्नत और विकासशील अर्थव्यवस्थाएं, बड़े और छोटे देश, वैश्विक उत्तर-दक्षिण एक साथ इस मंच पर आए हैं। इसमें सिर्फ सरकारों के साथ ही वैश्विक संस्थान, विशेषज्ञ और निजी क्षेत्र भूमिका निभा रहे हैं। सम्मेलन की इस वर्ष की थीम लचीली और समावेशी अवसंरचना निर्माण पर प्रधानमंत्री ने कहा, कोई भी अवसंरचना सिर्फ लाभ के उद्देश्य से नहीं बननी चाहिए, संकट के समय में कोई भी पीछे नहीं छूटे इसे ध्यान में रखकर बुनियादी ढांचे का निर्माण होना जरूरी है। प्रधानमंत्री ने कहा, जब अवसंरचना की बात होती है, तो सिर्फ इसके लिए समग्र दृष्टिकोण अपनाए जाने की जरूरत है, क्योंकि सामाजिक और डिजिटल अवसंरचना भी उतनी ही अहम होती हैं, जितनी भौतिक अवसंरचनाएं।
दुनिया को साथ ला रहा भारत
पीएम मोदी ने कहा, इस साल भारत अपनी जी-20 अध्यक्षता के जरिये दुनिया को एक साथ ला रहा है। जी-20 के अध्यक्ष के रूप में हमने पहले ही सीडीआरआई को कई कार्यकारी समूहों में शामिल किया है। इससे सीडीआरआई के खोजे गए समाधान वैश्विक नीति-निर्माण के उच्चतम स्तरों पर ध्यान आकर्षित करेंगे। जलवायु जोखिमों और आपदाओं के खिलाफ बुनियादी ढांचे के लचीलेपन में योगदान के लिए सीडीआरआई के लिए यह एक बड़ा अवसर है। उन्होंने कहा, यहां जिन समाधानों को अंतिम रूप दिया जाएगा, उन पर वैश्विक नीति-निर्माण के उच्चतम स्तर पर ध्यान दिया जाएगा।
21वीं सदी की समस्याएं, 20वीं सदी की सोच से हल नहीं होंगी
पीएम मोदी के प्रधान सचिव पीके मिश्रा ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, आपदाओं से निपटने की प्रतिक्रिया को लचीला बनाना अब वैश्विक और राष्ट्रीय विकास विमर्श के केंद्र में आ चुका है। हमें संस्थानों को आधुनिक, बहुविषयक बनाने के साथ ही याद रखना होगा कि 21वीं सदी की समस्याओं को हल करने के लिए 20वीं सदी के संस्थागत दृष्टिकोण से काम नहीं चलेगा। बुनियादी ढांचा प्रणालियों में वैकल्पिकता पर जोर देना होगा। दुनिया के उत्तर और दक्षिण दोनों तरफ पर्याप्त क्षमता निर्माण करना होगा। इसके अलावा वैश्विक दक्षिण के अभावों को प्राथमिकता से खत्म करना होगा।
स्थानीय नजरिया और आधुनिक तकनीक से बनें समावेशी योजनाएं
प्रधानमंत्री ने अलग-अलग देश व क्षेत्र के लिए स्थानीय नजरिये से आपदा प्रतिक्रिया योजना बनाने की जरूरत बताते हुए कहा, प्रत्येक राष्ट्र और क्षेत्र अलग तरह की आपदाओं का सामना करता है। इन्हीं के आधार पर समाज बुनियादी ढांचे से संबंधित स्थानीय ज्ञान विकसित करते हैं। इस ज्ञान को तकनीक के साथ मिलाकर आपदाओं से निपटने की समावेशी योजनाएं बनाने की जरूरत है।
आईसीडीआरआई की प्रमुख पहल
सीडीआरआई ने कई पहलें की हैं, जो वैश्विक आपदा प्रतिक्रया को समावेशी बनाने की दिशा में काम कर रही हैं। द इंफ्रास्ट्रक्चर फॉर रेजिलिएंट आइलैंड स्टेट्स इनिशिएटिव (आईआरआईएस) कई द्वीप राष्ट्रों को लाभान्वित करता है। इसके अलावा पिछले साल इंफ्रास्ट्रक्चर रेजिलिएंस एक्सेलरेटर फंड (आईआरईएफ) की घोषणा की गई थी। इस पांच करोड़ डॉलर के इस कोष ने विकासशील देशों के बीच उत्सुकता पैदा की है। सीडीआरआई की पहलों को अहम बताते हुए पीएम मोदी ने कहा, पिछले दिनों भारत से लेकर यूरोप तक लू चलीं। इसके अलावा भूकंप, चक्रवात, ज्वालामुखियों का फटना लगा ही रहता है। तुर्की और सीरिया में आए भूकंप ने आपदाओं से उपजने वाली चुनौतियों के व्यापक पैमाने को व्यक्त किया है। व्यापक पैमाने पर आपदाओं से निपटने के लिए सीडीआरआई की पहलें बेहद अहम हैं।