प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को पहली बार पॉडकास्ट में नजर आए। जीरोधा के सह-संस्थापक निखिल कामत ने पॉडकास्ट में उनसे बातचीत की। इस दौरान प्रधानमंत्री ने जम्मू-कश्मीर के लाल चौक पर तिरंगा झंडा फहराने की घटना जिक्र किया। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि इसके तुरंत बाद उन्होंने अपनी मां से फोन पर बात की।
कामत ने जब सवाल किया कि अगर कल आपकी जिंदगी में ऐसी घटना हो, जिससे आपको सबसे ज्यादा खुशी मिले तो पहला (फोन) कॉल आपका किसको जाएगा, इस प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'मैं जब श्रीनगर के लाल चौक पर गया। तिरंगा झंडा फहराने गया था। (उस समय) पंजाब में फगवाड़ा के पास हमारी (एकता) यात्रा पर हमला हो गया था, पांच-छह लोग मारे गए। काफी लोग घायल हुए। तो पूरे देश में एक तनाव था कि क्या हो गया। तब तो लाल चौक पर तिरंगा झंडा फहराना भी मुश्किल था। तिरंगे को जला दिया जाता था। तिरंगा झंडा फहराने के बाद हम जम्मू आए..तो जम्मू से मेरा पहला फोन (कॉल) मेरी मां को गया। मेरे लिए वह एक खुशी का पल था। दूसरा मन में था कि मां को चिंता हो रही होगी। मुझे याद है कि मैंने पहला फोन मां को किया। मुझे उस फोन (कॉल) का महत्व आज समझ में आता है। वैसा अनुभव कहीं और नहीं हुआ।'
जनवरी 1992 में एकता यात्रा पर हुआ था हमला
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने दिसंबर 1991 में कन्याकुमारी से एकता यात्रा शुरू की थी। इस यात्रा का 26 जनवरी 1992 को श्रीनगर के लाल चौक पर समापन होना था। इस यात्रा को देश के 14 राज्यों से गुजरना था। तब नरेंद्र मोदी इस यात्रा में सामिल थे। इसी दौरान 23 जनवरी 1992 को आतंकियों ने फगवाड़ा में एकता यात्रा की बसों पर हमला कर दिया था। इस हमले में छह लोगों की मौत हुई थी। जबकि पचास से ज्यादा घायल हुए थे।
श्रीनगर के लाल चौक पर फहराया था तिरंगा
आतंकवादी श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराने की चुनौती देते थे। यहां तक कि श्रीनगर की दीवारों पर लिख दिया गया था कि जिसने अपनी मां का दूध पिया है, वो यहां श्रीनगर आकर तिरंगा फहराए। अगर वह वापस लौट गया तो हम उसे इनाम देंगे। इसके बाद 25 जनवरी को एकता यात्रा के दौरान मोदी ने जोशीला भाषण दिया था- आतंकियों कान खोलकर सुन लो। 26 जनवरी में चंद घंटे बाकी हैं। लाल चौक में फैसला हो जाएगा कि किसने अपनी मां का दूध पिया है। इसके बाद 26 जनवरी 1992 को लाल चौक पर भाजपा के मुरली मनोहर जोशी, नरेंद्र मोदी सहित कई नेताओं तिरंगा झंडा फहराया और एकता यात्रा का समापन किया।
'मां की कमी महसूस होती है....'
पीएम मोदी ने अपने घर और मां के साथ संबंधों पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा, मैं बचपन में घर छोड़ चुका था। तो घर के लोगों ने भी मान लिया था कि ये हमारा नहीं है। मैंने भी मान लिया था कि मैं घर के लिए नहीं हूं.. तो मेरा जीवन वैसा रहा। इसलिए उस प्रकार का जुड़ाव किसी को भी महसूस होने का कारण नहीं था। लेकिन जब हमारी माता जी की उम्र 100 साल हुई तो मैं मां को पैर छूने के लिए गया था। मेरी मां पढ़ी-लिखी नहीं थी। उनको कुछ भी अक्षर ज्ञान नहीं था। मैंने जाते-जाते कहा कि मां मुझे निकलना पड़ेगा...मेरा काम है। तो मैं हैरान था कि मेरी मां ने दो वाक्य कहे। जिसने कभी स्कूल का दरवाजा नहीं देखा। वो मां कहती है- काम करो बुद्धि से, जीवन जीयो शुद्धि से। अब ये वाक्य उनके मुंह से निकलना मेरे लिए एक प्रकार से बहुत बड़ा खजाना था। मैं सोचता था कि परमात्मा ने इस मां को क्या कुछ नहीं दिया होगा, क्या विशेषता होगी। कभी लगता था कि मैं इसके (मां) पास ही रहता तो मैं ऐसी ही बहुत सी चीजें इससे निकाल सकता था, जान सकता था। तो (मां की) कमी महसूस होती है। वैसे मेरा संपर्क बहुत कम हुआ, क्योंकि मैं साल में एक दो बार जाता था ...मां कभी बीमार नहीं हुई। कभी जाता था तो मुझे कहती थी कि तुम्हें काम होगा जाओ जल्दी।
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