जुलाई 2018 में वायुसेना की मांग पर फिर गौर करते हुए रक्षा मंत्रालय ने 28 अगस्त 2008 की तरह 110 बहुउद्देश्यी लड़ाकू विमानों (एमएमआरसीए) को लेने के लिए अंतरराष्ट्रीय आमंत्रण प्रस्ताव जारी करने का निर्णय लिया। इस प्रस्ताव के लिए 2007 के समय की वही छह अंतरराष्ट्रीय विमान निर्माता कंपनियों (फ्रांस की राफेल फाइटर जेट बनाने वाली डेसाल्ट एवियेशन, अमेरिका की लॉकहीड मार्टिन (एफ-16 फाल्कन), अमेरिका की ही बोइंग (एफ-18सुपर हार्नेट), यूरोफाइटर टाइफून, स्वीडिश कंपनी सॉब का ग्रिपेन-ई और रूस के यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन ने मिग-35 ) ने ही रुचि दिखाई है। दिलचस्प है कि इन फाइटर जेट कंपनियों के इन्हीं फाइटर जेट का वायुसेना 2007 के बाद परीक्षण कर चुकी है। इन्हीं में से राफेल एल वन और यूरोफाइटर एलटू रहा था।
फिर होगी देरी
वायुसेना के सूत्र मानते हैं कि 110 फाइटर जेट आमंत्रण प्रस्ताव में रुचि दिखाने के बाद अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के फाइटर जेट के परीक्षण की प्रक्रिया फिर चलेगी और एक बार फिर एनवन के निर्धारण में समय लग सकता है। इस तरह से वायुसेना 110 फाइटर जेट मिलने की संभावना कोई पांच-छह साल बाद ही है। इस बीच में 2022 तक वायुसेना के बेड़े से बड़ी संख्या में मिग-21एस और मिग-27एस रिटायर हो जाएंगे। इसके सामानांतर भारतीय वायुसेना को फ्रांस से केवल दो स्क्वाड्रॉन राफेल विमानों की आपूर्ति होगी। वायुसेना मुख्यालय के अधिकारी अभी भी सुखोई-30 एमके आई की गुणवत्ता को लेकर तंग रहते हैं।
डेढ़ दशक में कितने फाइटर जेट मिले वायुसेना को?
अभी भारतीय वायुसेना के पास सबसे अत्याधुनिक, मारक और क्षमतावान फाइटर जेट सुखोई-30 एमकेआई है। 1997 से सुखोई लेने की प्रक्रिया शुरू हुई। 2002 में इस फाइटर जेट को रूस के साथ तकनीकी हस्तांतरण और संयुक्त उद्यम के जरिए हिन्दुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड में तैयार करने पर सहमति बनी थी। 2002 में पहला सुखोई वायुसेना को मिला था और एचएएल (भारत) में असेम्बल पहला सुखोई 2004 में वायुसेना में शामिल हुआ था।
वायुसेना सूत्रों के अनुसार मई 2018 भारतीय वायुसेना के बेड़े में करीब 249 सुखोई 30 एमकेआई विमान हैं। कुल 272 सुखोई आने हैं और हाल में भारत ने एक स्क्वाड्रान (18 विमान) लेने का निर्णय लिया है। इसके अलावा भारतीय वायुसेना को अभी तक कोई नया लड़ाकू विमान नहीं मिला है। इसके अलावा दिसंबर 2017 में एचएएल को 83 तेजस फाइटर जेट वायुसेना को आपूर्ति करने का आर्डर मिला है। यह तेजस भारत में असेंबल हुआ फाइटरजेट है। हालांकि वायुसेना इससे बहुत खुश नहीं है। वायुसेना को एलसीए-1ए या एलसीए-मार्क 2 चाहिए। इसके विकसित होने में समय लगेगा। इसके अलावा लड़ाकू विमानों के मामले वायुसेना के हाथ खाली हैं।
फाइटर हेलीकाप्टर की भूमिका निभाने में सक्षम 15 चिन्हुक और 22 अपाचे हेलीकाप्टर अभी वायुसेना को मिलना शुरू नहीं हुआ है। यूपीए सरकार के समय में इन्हें लेने पर विचार हो रहा था लेकिन यह सौदा जुलाई 2018 में मोदी सरकार के समय में अंतिम रूप ले पाया। एडवांस लाइटवेट हेलीकाप्टर ध्रुव भारत में ही असेम्बल होकर वायुसेना को मिल रहे हैं। इसके अलावा वायुसेना को ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट के रूप में अमेरिका (बोइंग) का सी-17 ग्लोबमास्टर और लॉकहीड मार्टिन का सी-130 जे हरक्युलिस मिला है। ग्लोब मास्टर और हरक्युलिस दोनों रक्षा सौदे यूपीए सरकार के समय में हुए थे।