प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जलवायु परिवर्तन पर वैश्विक पहल के तहत रविवार को ‘लाइफस्टाइल फॉर द एनवायरमेंट (लाइफ)’ आंदोलन की शुरुआत की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये इस कार्यक्रम में शामिल हुए मोदी ने कहा, लाइफ के पीछे विचार यह है कि हम ऐसी जीवनशैली अपनाएं जो हमारी धरती के अनुकूल हो और इसे नुकसान न पहुंचाए। उन्होंने कहा, ‘लाइफ मिशन’ अतीत से सीखता है, वर्तमान में संचालित होता है और भविष्य पर ध्यान केंद्रित करता है।
प्राकृतिक खेती चुनौतियों का बड़ा समाधान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मिट्टी बचाओ आंदोलन’ पर एक कार्यक्रम में कहा कि प्राकृतिक खेती में भी आज की चुनौतियों के लिए बहुत बड़ा समाधान है। हमने तय किया है कि गंगा किनारे बसे गांवों में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए विशाल कॉरिडोर बनाएंगे। औद्योगिक और डिफेंस कॉरिडोर हमने सुना है। हमने नया कॉरिडोर शुरू किया है। इससे हमारे खेत तो रसायन मुक्त होंगे ही, नमामि गंगे अभियान को भी नया बल मिलेगा।
मिट्टी की सेहत सुधरने से किसानों की लागत में आठ से 10 प्रतिशत की बचत हुई है और उपज में बढ़ोतरी देखी गई है। उन्होंने कहा कि मिट्टी स्वस्थ हो रही है तो उत्पाद भी बढ़ रहा है। सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा देने की वजह से और अटल योजना की वजह से देश के अनेक राज्यों में मिट्टी की सेहत भी संवर रही है। पिछले आठ वर्षों में भारत के वन क्षेत्र में 20 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक की वृद्धि हुई है और वन्यजीवों की संख्या में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। बाघ, शेर, तेंदुआ, हाथी, सभी की संख्या देश में बढ़ रही है।
पीएम ने की सद्गुरु की तारीफ, कहा- भारत की मिट्टी की ताकत से दुनिया को कराया परिचित
पीएम मोदी ने ईशा फाउंडेशन के संस्थापक, सदगुरु जग्गी वासुदेव के मिट्टी बचाओ अभियान की तारीफ की। अभियान को मानवता के लिए एक महान सेवा बताते हुए पीएम ने सद्गुरु की मोटरसाइकिल यात्रा की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि इस यात्रा के कारण दुनिया ने मिट्टी के प्रति प्रेम विकसित कर लिया होगा। साथ ही चुटकी ली कि उन्होंने भारतीय मिट्टी की ताकत को भी देख लिया होगा। सद्गुरु ने पीएम को सेव सॉयल नीति हैंडबुक भी भेंट की।
27 देशों से होकर उनकी अकेले मोटरसाइकिल की 100 दिवसीय यात्रा का 75वां दिन था। अभियान ने अब तक 2.5 अरब लोगों से संपर्क किया है और 74 देश अपने देश की मिट्टी को बचाने के लिए कार्यवाही करने को सहमत हो गए हैं। भारत में 15 लाख से ज्यादा बच्चों ने देश की मिट्टी और उनके सामूहिक भविष्य को बचाने के लिए कार्यवाही करने हेतु प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अनुरोध किया है।
वहीं सद्गुरु ने कहा कि किसी समाधान को हासिल करने के लिए सारे नागरिकों को खड़ा होना चाहिए और इसे ठीक करने के लिए सरकार से अपेक्षित दीर्घकालिक पहल का समर्थन करना चाहिए। इस अभियान का मकसद देशों पर जोर डालना है कि तत्काल नीति सुधारों के जरिए कृषि भूमि में कम से कम 3-6 प्रतिशत जैविक तत्व का होना जरूरी बनाया जाए। इस न्यूनतम जैविक तत्व के बिना मृदा वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि मिट्टी की मृत्यु पक्की है, एक ऐसी घटना जिसे वे ‘मिट्टी-विलोपन’ बता रहे हैं।