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Kanpur Metro Rail Project : यूपी में 'रफ्तार की सियासत', शहरी वोटरों पर भाजपा की नजर

प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: प्रतिभा ज्योति Updated Tue, 28 Dec 2021 01:46 PM IST

सार

लोकसभा चुनाव से पहले यूपी के कुछ और भी अन्य शहरों में मेट्रो का संचालन शुरू होना है। कानपुर के बाद गोरखपुर, आगरा और वाराणसी में भी मेट्रो चलाने की तैयारी है। कानपुर मेट्रो रेल परियोजना के एक चरण के पूरा होने के बाद उत्तर प्रदेश सबसे ज्यादा शहरों में मेट्रो रेल का संचालन करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।
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कानपुर मेट्रो में सफर करते पीएम नरेंद्र मोदी और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ - फोटो : ANI
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कानपुर मेट्रो रेल परियोजना के प्रथम सेक्शन का उद्घाटन किया। यह परियोजना दो चरणों में पूरी होगी एवं दो कॉरिडोर होंगे। प्रथम चरण में नौ स्टेशन बनाए जाएंगे। मेट्रो रेल का संचलान शुरू होने के बाद कानपुर मेट्रो सिटी बन जाएगी। कुछ दिनों पहले प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के प्रचार की चकाचौंध के बाद, भारतीय जनता पार्टी  के चुनावी रणनीतिकारों ने चुनाव वाले राज्य यूपी में ‘रफ्तार की सियासत’ पर अपनी नजरें गड़ा दी हैं।

उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (UPMRC) ने 15 नवंबर, 2019 को इस प्राथमिकता वाले कॉरिडोर पर काम शुरू किया था। यूपीएमआरसी ने इसे दो साल से भी कम समय में पूरा कर लिया है। परियोजना के बारे में बात करते हुए, यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक कुमार केशव ने कुछ समय पहले  मीडिया को दिए अपने बयान में कहा था 'निर्धारित समय-सीमा के भीतर परियोजना को पूरा करना वास्तव में एक चुनौती रही है, खासकर तब जब कोरोना के कारण चार महीने हमने गंवा दिए। इस दौरान व्यावहारिक रूप से कोई काम नहीं किया गया था। लेकिन एक बार जब सरकार ने प्रतिबंधों में ढील दी, तो हमने कोरोना के सभी प्रोटोकॉल का पालन करते हुए तुरंत काम शुरू कर दिया और समय पर काम पूरा किया।'
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कानपुर मेट्रो में सफर करते पीएम नरेंद्र मोदी और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ - फोटो : ANI
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कानपुर मेट्रो रेल परियोजना के प्रथम सेक्शन का उद्घाटन किया। यह परियोजना दो चरणों में पूरी होगी एवं दो कॉरिडोर होंगे। प्रथम चरण में नौ स्टेशन बनाए जाएंगे। मेट्रो रेल का संचलान शुरू होने के बाद कानपुर मेट्रो सिटी बन जाएगी। कुछ दिनों पहले प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के प्रचार की चकाचौंध के बाद, भारतीय जनता पार्टी  के चुनावी रणनीतिकारों ने चुनाव वाले राज्य यूपी में ‘रफ्तार की सियासत’ पर अपनी नजरें गड़ा दी हैं।

उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (UPMRC) ने 15 नवंबर, 2019 को इस प्राथमिकता वाले कॉरिडोर पर काम शुरू किया था। यूपीएमआरसी ने इसे दो साल से भी कम समय में पूरा कर लिया है। परियोजना के बारे में बात करते हुए, यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक कुमार केशव ने कुछ समय पहले  मीडिया को दिए अपने बयान में कहा था 'निर्धारित समय-सीमा के भीतर परियोजना को पूरा करना वास्तव में एक चुनौती रही है, खासकर तब जब कोरोना के कारण चार महीने हमने गंवा दिए। इस दौरान व्यावहारिक रूप से कोई काम नहीं किया गया था। लेकिन एक बार जब सरकार ने प्रतिबंधों में ढील दी, तो हमने कोरोना के सभी प्रोटोकॉल का पालन करते हुए तुरंत काम शुरू कर दिया और समय पर काम पूरा किया।'

पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे - फोटो : अमर उजाला
कुमार केशव के इस बयान से साफ जाहिर है कि यूपी चुनाव से पहले उन पर इस परियोजना को पूरा करने का दबाव था। ताकि यूपी विधानसभा चुनाव से पहले इसका उद्घाटन होने से भाजपा सरकार को चुनाव में इसका फायदा मिल सके। कानपुर मेट्रो रेल परियोजना के एक चरण के पूरा होने के बाद उत्तर प्रदेश सबसे ज्यादा शहरों में मेट्रो रेल का संचालन करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ एवं कानपुर में मेट्रो रेल का संचालन हो रहा है। आगरा में मेट्रो परियोजना का कार्य प्रगति पर है। गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज व मेरठ में मेट्रो परियोजना का डीपीआर कार्य प्रगति पर है। 

हालांकि कानपुर मेट्रो को लेकर समाजवादी पार्टी का दावा है कि यह उनकी परियोजना थी जिसके लिए 2016 में आधारशिला रखी गई थी। पार्टी का कहना है कि कानपुर में मेट्रो का प्रस्ताव सपा सरकार ने 2016 में केंद्र को भेजा था, जिसे केंद्र सरकार ने स्वीकार किया था। 



यूपी में भाजपा का विकास का दांव
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के आगाज के साथ ही उत्तर प्रदेश सबसे ज्यादा एक्सप्रेसवे वाला राज्य भी बन गया है। भाजपा यूपी चुनाव में विकास का दांव चल रही है। कई एक्सप्रेस वे के बाद कानपुर मेट्रो विकास की उसी फेहरिस्त में शामिल है। इन्हीं उपलब्धियों को लेकर भाजपा चुनाव में उतरने जा रही है। मेट्रो के जरिए भाजपा की नजर शहरी वोटरों पर है। शहरी वोटरों को एक मजबूत शहरी परिवहन तंत्र की जरूरत होती है। एक सुखद और आरामदायक शहरी अनुभव वोट देने के एक बहुत ही महत्वपूर्ण कारकों में एक माने जाते हैं। देश में यह और भी जरूरी माना जाता है क्योंकि एक बेहतरीन यातायात सुविधा विभिन्न सरकारों के शासन के सबसे उपेक्षित पहलुओं में से एक रहा है।

दिल्ली मेट्रो - फोटो : पीटीआई
सियासत मे बढ़ने लगी मेट्रो की भूमिका
भारत में मेट्रो रेल तेजी से उभरता हुआ नेटर्वक है। मौजूदा समय में देश के 12 शहरों में लगभग 660 किमी लंबे ट्रैक पर मेट्रो दौड़ रही है। देश में पहली मेट्रो 1984 में कोलकाता में शुरू हुई। दिल्ली में 25 दिसंबर 2002 को सबसे पहले शाहदरा से तीस हजारी के बीच मेट्रो की शुरुआत हुई। धीरे-धीरे मेट्रो देश की सियासत में एक अहम भूमिका निभाने लगी। लोगों को सस्ती, आरामदायक, सुविधाजनक और सुरक्षित यातायात साधन देने का वादा चुनावी घोषणापत्रों में शामिल होने लगा। 

दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं शीला दीक्षित के कई सफल कार्यकाल में दिल्ली के विकास और मेट्रो रेल का भी विशेष योगदान माना जाता है। शीला दीक्षित ने अपने कार्यकाल में दिल्ली को वह तोहफा दिया जिससे दिल्ली ने विकास की रफ्तार पकड़ ली और नया कीर्तिमान रचा। दिल्ली में मेट्रो का जाल बिछाने का श्रेय शीला दीक्षित को दिया जाता है। शीला दीक्षित ने ईश्रीधरन के साथ कई बैठकें करने के बाद मेट्रो का मैप तैयार किया। हालांकि कहा जाता है कि दिल्लीवालों के लिए मेट्रो का सपना पूर्व मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना ने देखा था लेकिन जब दिल्ली में शीला दीक्षित की सरकार आई तो मेट्रो का पूरा श्रेय शीला दीक्षित ले गई थीं। 

पीएम मोदी कानपुर मेट्रो का सफर करते हुए - फोटो : वीडियो ग्रैब
यूपी की राजनीति भी मेट्रो के इर्द-गिर्द
यूपी की राजनीति भी मेट्रो रेल परियोजनाओं के इर्द-गिर्द घूमने लगी है। लखनऊ मेट्रो लाने का ख्वाब यूपी की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने सबसे पहले देखा था। 2007 में जब मायावती यूपी की मुख्यमंत्री थीं तो उन्होंने चुनाव से ठीक एक साल पहले 2011 में दो बार लखनऊ मेट्रो की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट  केंद्र की तत्कालीन यूपीए सरकार को भेजा था। तब इस प्रोजेक्ट को मंजूरी नहीं मिली।

2012 में जब अखिलेश यादव की सरकार बनी तो उन्होंने इस परियोजना को जमीन पर उतारने का काम किया। परियोजना की शुरुआत 2013 में हुई। 2017 में विधानसभा चुनाव की घोषणा से पहले मेट्रो रेल परियोजना पूरी भी नहीं हुई थी, लेकिन चुनावी फायदा उठाने के मकसद से अखिलेश ने महज दो स्टेशनों के बीच चलने वाली मेट्रो का उद्घाटन कर दिया। हालांकि 2017 में सत्ता अखिलेश के हाथ से निकल गई। पांच सितंबर 2017 सीएम योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह और तत्कालीन राज्यपाल राम नाईक की मौजूदगी में औपचारिक तौर पर लखनऊ मेट्रो सेवा की शुरुआत की गई। 

पीएम मोदी का स्वागत करते ई श्रीधरन - फोटो : एएनआई
मेट्रो मैन को भाजपा ने चुनाव में उतार दिया
देश की राजधानी और अन्य शहरों में परिवहन व्यवस्था की सूरत बदलने वाले मेट्रो मैन ई श्रीधरन को लोग प्यार से 'मेट्रो मैन' कहते हैं। पूरे देश में उनके लाखों प्रशंसक हैं। उनकी इस लोकप्रियता, स्वच्छ छवि, तकनीकी योग्यता, ईमानदारी और कार्यकुशलता को देखकर भाजपा ने इसे चुनाव में भी भुनाने की कोशिश की। ई श्रीधरन को भाजपा ने इस साल हुए केरल में हुए विधानसभा चुनाव में पलक्कड़ सीट से उतारा। हालांकि वे चुनाव हार गए और हाल ही में उन्होंने सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लिया है।

पीएम मोदी और सीएम योगी - फोटो : अमर उजाला
एक्सप्रेस वे से सत्ता में वापसी की तैयारी
मेट्रो परियजोनाओं के अलावा भाजपा का जोर एक्सप्रेसव वे के उद्घाटनों पर भी है। 18 दिसंबर को पीएम ने गंगा एक्सप्रेस वे का उद्घाटन किया। इससे पहले पीएम  पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का उद्घाटन कर चुके हैं। चुनाव से ठीक पहले पीएम नरेंद्र मोदी जिस तरह एक के बाद एक एक्सप्रेस वे का उद्घाटन किया है उससे राजनीतिक जानकारों को यह लगता है कि 'सत्ता के लिए एक्सप्रेस वे राजनीति' उत्तर प्रदेश के चुनावों में एक प्रमुख मुद्दा बन रहा है।

कहा जा रहा है कि भाजपा इन परियोजनाओं को चुनावों में 'सफलता के एक्सप्रेस वे' रूप में देख रही है। भविष्य में तीन एक्सप्रेस बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे व बलिया लिंक एक्सप्रेसवे की सौगात भी यूपी को मिलेगी। सबसे बड़ा गंगा एक्सप्रेसवे जैसी परियोजना 2024 तक पूरी किए जाने की तैयारी है।
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