इंसान नहीं उसका विजन बड़ा होता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दक्षिण एशियाई सहयोग संगठन (दक्षेस, सार्क) के सदस्य देशों के साथ कोरोना वायरस पर पहल करके इसे साबित किया है। कूटनीतिक गलियारे का भी अनुमान है कि प्रधानमंत्री का यह विजन उन्हें एक स्टेट्समैन और ग्लोबल विजन वाले राष्ट्राध्यक्ष के रूप में स्थापित करेगा। पूर्व विदेश सचिव शशांक ने भी प्रधानमंत्री के कदम की तारीफ की है। नरेंद्र मोदी दुनिया के पहले ऐसे राष्ट्राध्यक्ष हैं, जिन्होंने पूरी दुनिया में कोरोना का खौफ फैलने के बाद इस तरह की पहल की है। मोदी ने चीन में कोरोना का खौफ फैलने के बाद उसे मदद का प्रस्ताव दे दिया था। अपेक्षित सहयोग भी किया था। मालदीव को भी सहायता का प्रस्ताव दिया और अब दक्षेस देशों के सहयोग के लिए आगे आए हैं।
प्रधानमंत्री ने बताया कैसे शुरू किए सावधानी के उपाय
प्रधानमंत्री ने बताया कि कैसे भारत ने समय पर सतर्कता बरतते हुए सावधानी के उपाय शुरू कर दिए थे। जनवरी महीने से ही भारत ने अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों, बंदरगाहों पर थर्मल स्क्रीनिंग आरंभ कर दिया था। भारत ने डेढ़ महीने पहले से करोना को लेकर हर स्तर पर तैयारी शुरू कर दी थी। चीन के वुहान से फंसे हुए नागरिकों को भारत लाने के क्रम में भारत ने इसके लिए भी एक प्रोटोकॉल निर्धारित किया। इस प्रोटोकॉल का पालन करते हुए विदेशों से 1400 लोगों को भारत लाया गया। मालदीव, नेपाल समेत कुछ पड़ोसी देशों के नागरिक भी लाए गए। प्रधानमंत्री ने अपने समकक्षों को बताया कि किसी भी ऐसी स्थिति से निबटने के लिए सतर्कता और सावधानी सबसे बड़ा प्रयास है। प्रधानमंत्री एक बार फिर अपने इस विजन के माध्यम से पड़ोसी पहले की नीति को प्रभावी बनाते नजर आए।
पाकिस्तान के डॉ. जफर मिर्जा ने की शिरकत, इमरान ने खोया अवसर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्ताव से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने परहेज किया। हालांकि इमरान खान ने अपने स्वास्थ्य सेवा मामले के सलाहकार डॉ. जफर मिर्जा को वीडियो कांफ्रेसिंग में शामिल कराया। पाकिस्तान के अलावा दक्षेस के सभी सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने इस प्रयास में हिस्सा लिया। सभी ने अपना पक्ष रखा। अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने ईरान से लगती सीमा और चिंता का भी जिक्र किया। मालदीव, बांग्लादेश, श्रीलंका, भूटान समेत अन्य देशों के प्रमुखों ने भी अपनी बात रखी। इस तरह से कोरोना वायरस पर आपसी चर्चा, अनुभव साझा करने के प्रयास और सहयोग के प्रस्ताव से भारत ने इस मंच को संजीवनी देने की कोशिश की है।
अभी नहीं पता कि कोरोना वायरस का प्रभाव कितना रहेगा
प्रधानमंत्री ने सभी दक्षेस राष्ट्राध्यक्षों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि अभी कुल 150 मामले ही सामने आए हैं। हम दूसरे स्तर पर हैं और हमें सावधानी बरतते हुए इसे तीसरे स्टेज के पहले रोकना होगा। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अभी यह नहीं कहा जा सकता कि कोरोना का प्रभाव कहां तक रहेगा। इस संक्रमण का कितना फैलाव हो पाएगा और कैसे इसे नियंत्रित किया जा सकेगा। लेकिन उन्होंने कहा कि एक बेहतर उपाय से हम सब मिलकर इसके भयानक असर से बच सकते हैं।