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पीएम मोदी ने शी को दोबारा राष्ट्रपति चुने जाने की दी बधाई, तरक्की के दिखाए सपने

Tue, 20 Mar 2018 06:37 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पीएम मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को बधाई दी है। ये बधाई इसलिए कि राष्ट्रपति शी का कार्यकाल बढ़ गया है और शी जिनपिंग के दूसरे कार्यकाल को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई है। चीनी राष्ट्रपति अनिश्चितकाल के लिए राष्ट्रपति रहने की मंशा रखते हैं। चीन की तानाशाह सरकार हो सकता है कि इस फैसले को मनवा ले। दबी आवाज में जो विरोध चीन की जनता में है उसे खास तवज्जो ना मिले।
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PM मोदी की बधाई से राष्ट्रपति शी होंगे खुश लेकिन भारतीय नहीं!

चीन के विधायी निकाय नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (एनपीसी) ने शनिवार को शी जिनपिंग के दूसरे कार्यकाल को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी। समाचार एजेंसी एफे के मुताबिक, शी जिनपिंग 2023 तक देश के राष्ट्रपति पद पर रहेंगे। अपने भाषणों से शी वैसे ही आजकल आग उगल रहे हैं। ऐसे में पीएम मोदी का शी को अभिवादन भारतीय कितना पचा पाते हैं ये देखने वाली बात है। एक तरफ चीन एक इंच जमीन भी ना देने की बात पर जंग की धमकी दे रहा है और भारतीय पीएम विश्व शक्ति होने में चीन को साथ लेकर चलने की बात कर रहे हैं। 
 
 

दोकलम दोहराएगा चीन?

दोकलम के बावजूद क्या भारत की तरक्की में साथ देगा चीन?

जबकि भारत और चीन के रिश्ते कैसे हैं ये हर कोई जानता है। अपनी एक इंच जमीन पर आंख दिखाने वाला चीन, भारत के खिलाफ जमीन को लेकर ही तना रहता है, यहां तक की भारतीय जमीन पर भी अपना कब्जा जमाने की कोशिश करता है। जिस तरह दोकलम विविद दोनों देशों के बीच एक मुश्किल का सबब है, ये कहना की चीन भारत के साथ मिलकर शांति से चलेगा मुश्किल लगता है। 

बावजूद इसके भारत भी अपने राजनीतिक बयानों में चीन को सबक सिखाने की बात करता है। ऐसे में साथ होकर चलना दोनों देशों के लिए कितना मुमकिन है आप इस बात का अंताजा लगा सकते हैं। चूंकि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और चीन में शी की तानाशाही चलती है। क्या दोनों देशों के लिए मिलकर विश्वशक्ति बनने का साझा प्रयास हो सकते हैं?
 
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कैसे बढ़ा जिनपिंग का कार्यकाल?

क्यों हैं जिनपिंग बधाई के लायक? 

शी जिनपिंग ने 2013 में राष्ट्रपति पद संभाला था। 64 साल के शी के पक्ष में सभी 2,970 वोट पड़े। उनके खिलाफ एक भी वोट नहीं गया और न ही कोई इस दौरान संसद से नदारद रहा। शी केंद्रीय सैन्य आयोग के अध्यक्ष के रूप में भी दोबारा निर्वाचित हुए हैं, जिसका मतलब है कि वह देश में तीन सर्वाधिक सशक्त स्थानों पर काबिज रहेंगे। 

लेकिन बात चीन के अपने लोगों की करें तो वो खुद शी के अनिश्चितकाल राष्ट्रपति के फैसले का विरोध कर रहे हैं, जिस तरह से शी अनिश्चितकाल राष्ट्रपति होने का दावा कर रहे हैं। चीन के बदलते परिवेश को देखते हुए प्रसिद्ध चीनी लेखक तो मा ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में भी ऐसी ही चिंता जाहिर की थी। 

वहीं देश के भीतर भी लोगों को सरकार का यह कदम डरा रहा है। महिला दिवस के मौके पर तो चीनी स्कूलों में इस पर भारी विरोध भी दिखा। बता दें कि चीन में लोकतंत्र नहीं है लेकिन जिस तरह से चीन में राष्ट्रपति ने अपने अजीवन कार्यकाल की बात सामने रखी है उसने फिर एक बार माओ के चीन की याद तो दिला ही दी है। 
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