प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को छत्तीसगढ़ के बस्तर में सुरक्षा बलों के जवानों के साथ दिवाली मनाई। इस दौरान उन्होंने शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी और जवानों के साथ आदिवासी गीतों पर नाचते भी नजर आए। कभी नक्सलवाद का गढ़ माने जाने वाले इस इलाके में दिवाली का उत्सव खास रहा। जवानों ने 'भारत माता की जय' के नारे लगाकर प्रधानमंत्री के साथ त्योहार मनाया।
प्रधानमंत्री ने करनपुर स्थित कोबरा (CoBRA) ऑपरेशंस बेस का दौरा किया। यह कैंप अबूझमाड़ और बस्तर में अभियानों के लिए अहम केंद्र रहा है। यहां बने स्मारक पर उन्होंने नक्सल विरोधी अभियानों में बलिदान देने वाले सीआरपीएफ जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
आदिवासी गीतों पर जवानों के साथ थिरके प्रधानमंत्री
बस्तर में दिवाली के दौरान उत्साह का माहौल देखने को मिला। सुरक्षा बलों के जवानों ने पारंपरिक आदिवासी गीतों पर नृत्य किया। प्रधानमंत्री मोदी भी इस जश्न में शामिल हुए। जवानों ने उनके साथ मिलकर भारत माता की जय के नारे लगाए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वह जवानों के बीच दिवाली मनाने आए हैं। उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं पर और देश के भीतर नागरिकों की सुरक्षा करने वाले जवान उनके परिवार का हिस्सा हैं।
बोले- नक्सलवाद के खिलाफ जीत के बाद पहली दिवाली
सुरक्षा बलों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि 2026 की दिवाली बेहद खास है। यह नक्सलवाद और माओवादी आतंक के खिलाफ दशकों तक चली लड़ाई में देश की जीत के बाद पहली दिवाली है। उन्होंने कहा कि यह पहली दिवाली है, जब देश का हर जिला नक्सलवाद से मुक्त है और करोड़ों लोगों ने नक्सलवाद के डर से मुक्ति पाई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि बस्तर की धरती पर कभी नक्सलवाद का खतरा था, लेकिन जवानों के बलिदान और समर्पण से अब यहां विकास की नई लहर शुरू हुई है।
नक्सलवाद खत्म होने से विकास को मिलेगी रफ्तार
पीएम मोदी ने कहा कि बस्तर में नक्सलवाद लंबे समय तक विकास की राह में बड़ी बाधा रहा। अब शांति और सुरक्षा मजबूत होने से क्षेत्र में विकास कार्यों को नई गति मिलेगी। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, संचार, पर्यटन और रोजगार के क्षेत्रों में आगे बढ़ने की संभावनाओं का जिक्र किया। बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में CRPF की अहम भूमिका रही है। सुरक्षा बलों की कार्रवाई के चलते क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों को कमजोर करने में मदद मिली है।
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अमित शाह ने भी नक्सलवाद के खिलाफ अभियान पर दिया जोर
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी नक्सलवाद को खत्म करने के अभियान में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। सरकार की नीति के मुताबिक, हिंसा छोड़कर आत्मसमर्पण करने वालों को मुख्यधारा में लौटने का मौका दिया जाता है।
वहीं, कानून तोड़ने और निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वालों के खिलाफ सुरक्षा बल कार्रवाई करते हैं। अभियान के दौरान कई लोगों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का रास्ता चुना है।