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अंतिम व्यक्ति तक सेवा पहुंचाने में विश्वास रखते हैं प्रधानमंत्री मोदी

Fri, 14 Sep 2018 04:09 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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नरेंद्र मोदी
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2019 में लोकसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में सभी रजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी कमर कस ली है। विपक्ष जहां सत्ता का विरोध करने के लिए कोई मौका नहीं चूकना चाहता वहीं सत्तासीन भाजपा सरकार अपने कार्यों को जनता के सम्मुख रख रही है। 
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26 मई 2014 को देश के प्रधानमंत्री बने नरेंद्र मोदी ने कार्यभार संभालने के साथ कई योजनाओं की शुरुआत की। प्रधानमंत्री के मुताबिक वह अंत्योदय यानी अंतिम व्यक्ति तक सेवाएं पहुंचाने के सिद्धांत में विश्वास रखते हैं। भाजका यह कहती रही है कि नए विचारों और पहल के माध्यम से सरकार ने विकास की गति तेज करना और उसका लाभ हर नागरिक तक पहुंचाना सुनिश्चित किया है। 

मोदी सरकार द्वारा शुरू की गई जन-धन योजना को भाजपा सरकार अभूतपूर्व बदलाव का वाहक मानती है। सरकार के अनुसार यह निश्चय किया गया है कि देश के सभी नागरिक वित्तीय तंत्र में शामिल हों। वहीं कारोबार को आसान बनाने के लिए शुरू की गई ‘मेक इन इंडिया’ योजना ने निवेशकों और उद्यमियों में अभूतपूर्व उत्साह और उद्यमिता के भाव का संचार किया है। ‘श्रमेव जयते’ पहल ने श्रम सुधारों और श्रम की गरिमा से लघु और मध्यम उद्योगों में लगे अनेक श्रमिकों का सशक्तिकरण किया है। इससे देश के युवाओं को भी प्रेरणा मिली है। 
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भारत सरकार ने पहली बार देश के नागरिकों के लिए तीन सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की शुरुआत की। इसके अलावा बुजुर्गों को पेंशन व गरीबों को बीमा सुरक्षा देने पर भी ध्यान दिया है। जुलाई 2015 में प्रधानमंत्री ने डिजिटलाइजेशन लाने के लिए डिजिटल इंडिया मिशन की शुरुआत की। इसका उद्देश्य प्रौद्योगिकी के माध्यम से लोगों के जीवन में बेहतर बदलाव लाना है। 
2 अक्टूबर 2014 को महात्मा गांधी की जयंती पर शुरू किए गए ‘स्वच्छ भारत मिशन - देशभर में स्वच्छता के लिए एक जन-आंदोलन’ को भाजपा सरकार ऐतिहासिक मानती है। 

भाजपा मानती है कि मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत की वैश्विक मंच पर वास्तविक क्षमता एवं भूमिका की छाप स्पष्ट देखी जा सकती है। प्रधानमंत्री ने सभी सार्क देशों के राष्ट्राध्यक्षों की मौजूदगी में अपने कार्यकाल की शुरुआत की। संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए गए उनके भाषण की दुनिया भर में प्रशंसा हुई। नरेन्द्र मोदी भारत के ऐसे पहले प्रधानमंत्री बने जिन्होंने 17 साल बाद नेपाल, 28 साल बाद ऑस्ट्रेलिया, 31 साल बाद फिजी और 34 साल बाद सेशेल्स की द्विपक्षीय यात्रा की। पीएम ने संयुक्त राष्ट्र, ब्रिक्स, सार्क और जी-20 शिखर सम्मेलनों में भाग लिया, जहां कई वैश्विक, आर्थिक व राजनैतिक मुद्दों पर भारत के कार्यक्रमों और विचारों की प्रशंसा हुई। प्रधानमंत्री की जापान यात्रा ने भारत-जापान संबंधों को नया आयाम दिया। मंगोलिया की यात्रा करने वाले मोदी पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं। चीन व दक्षिण कोरिया की उनकी यात्राएं भारत में निवेश लाने में कामयाब हुई हैं। 

नरेन्द्र मोदी ने अरब देशों के साथ मजबूत संबंधों को काफी महत्व दिया है। अगस्त 2015 में संयुक्त अरब अमीरात की उनकी यात्रा 34 साल में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा थी। जुलाई 2015 में उन्होंने पांच मध्य एशियाई देशों का दौरा किया। अक्टूबर 2015 में नई दिल्ली में आयोजित भारत-अफ्रीका फोरम सम्मेलन में 54 अफ्रीकी देशों ने भाग लिया था।

नवंबर 2015 में प्रधानमंत्री ने सीओपी-21 शिखर सम्मेलन में विश्व के अन्य नेताओं के साथ जलवायु परिवर्तन पर चर्चा की। पीएम मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति ओलांद ने उर्जा संबंधित आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सौर एलायंस का उद्घाटन किया। अप्रैल 2016 में प्रधानमंत्री ने परमाणु सुरक्षा शिखर सम्मेलन में भाग लिया। पीएम के सऊदी अरब दौरे पर उन्हें वहां के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, किंग अब्दुलअजीज सैश से सम्मानित किया गया।

भाजपा मानती है कि प्रधानमंत्री मोदी की पहल से ही ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री टोनी अबॉट, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाल सिरिसेना, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन व जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल सहित विश्व के कई अन्य नेताओं ने भारत का दौरा किया और इससे भारत व इन देशों के बीच सहयोग सुधारने में सफलता मिली है। 2015 में गणतंत्र दिवस पर अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा प्रमुख अतिथि के रूप में भारत आए। यह भारत-अमेरिका संबंधों के इतिहास में पहली बार हुआ था। अगस्त 2015 में भारत ने एफआईपीआईसी शिखर सम्मेलन की मेजबानी की जिसमें प्रशांत द्वीप समूह के शीर्ष नेताओं ने भाग लिया था। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के किसी भी एक दिन को “अंतरराष्ट्रीय योग दिवस” के रूप में मनाए जाने के आह्वान को संयुक्त राष्ट्र में जबर्दस्त समर्थन मिला। पहली बार विश्व के 177 देशों ने 21 जून को “अंतरराष्ट्रीय योग दिवस” के रूप में मनाने का संकल्प संयुक्त राष्ट्र में पारित किया।
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साभार : www.narendramodi.in
 
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