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भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान का त्रिकोण: बदलेगा हिंद-प्रशांत, PM मोदी की यात्रा में अहम होगी खनिज कूटनीति

Thu, 09 Jul 2026 04:57 AM IST
Devesh Tripathi आशुतोष भाटिया, नई दिल्ली

सार

पीएम मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक भूमिका को मजबूत करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरे में भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान के बीच सहयोग को रक्षा, आर्थिक सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखलाओं जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ाने पर जोर रहने की संभावना है।
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भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान की तिकड़ी करेगी कमाल - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI
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विस्तार
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा हिंद-प्रशांत क्षेत्र के सामरिक समीकरणों में बदलाव के बीच हो रही है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के द्विपक्षीय संबंध मजबूत करने के अलावा इस दौरे का एक उद्देश्य भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान के बीच आपसी रणनीतिक तालमेल गहरा करना भी है।
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दरअसल भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी भूमिका को एक सक्रिय साझेदार के तौर पर आगे बढ़ा रहा है। भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साझा मंच कवॉड में भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच सहयोग को अगले स्तर पर ले जाना एक सोची समझी रणनीति का हिस्सा है।
  • त्रिपक्षीय साझेदारी: हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव, समुद्री सुरक्षा चुनौतियों और आपूर्ति श्रृंखलाओं की अनिश्चितता ने समान विचार वाले देशों के बीच सहयोग की जरूरत बढ़ाई है। यह देखा जा सकता है कि भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक लचीलेपन और तकनीकी सहयोग पर भी ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। यह सहयोग एक औपचारिक सैन्य गठबंधन की दिशा में जाने की बजाय क्षेत्रीय स्थिरता, समुद्र संबंधी कानून के सम्मान और आर्थिक सुरक्षा मजबूत करने का प्रयास है।
  • खनिज कूटनीति: पीएम मोदी और ऑस्ट्रेलियाई नेतृत्व के बीच बातचीत में रक्षा सहयोग के साथ-साथ दुर्लभ खनिजों, ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला पर भी समझौते की संभावना है। ऑस्ट्रेलिया लीथियम और अन्य अहम खनिजों का बड़ा उत्पादक है। इधर भारत अपनी विनिर्माण क्षमता और ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए विश्वसनीय साझेदारों से सहयोग बढ़ाने में जुटा है। सेमीकंडक्टर, बैटरी तकनीक और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में दुनिया भर में प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। ऐसे में महत्वपूर्ण खनिजों और स्वच्छ तकनीक तक पहुंच भारत समेत कई देशों की रणनीतिक प्राथमिकता बन गई है।
  • ऊर्जा सहयोग: आने वाले वर्षों में स्वच्छ ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन और नई ऊर्जा तकनीकों की मांग बढ़ने वाली है। ऐसे में प्रधानमंत्री की ऑस्ट्रेलिया यात्रा का अहम पक्ष ऊर्जा क्षेत्र हो सकता है। भारत बढ़ती ऊर्जा जरूरतों के बीच नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का विस्तार कर रहा है, जबकि ऑस्ट्रेलिया प्राकृतिक संसाधनों और ऊर्जा क्षेत्र में पहले से बेहतर है। दोनों के बीच सहयोग जलवायु संबंधी लक्ष्यों व ऊर्जा सुरक्षा के बीच संतुलन में मदद कर सकता है।
  • एक्ट ईस्ट नीति: मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा को भारत की एक्ट ईस्ट नीति के व्यापक संदर्भ में भी देखा जा सकता है। इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देशों के साथ संपर्क बढ़ाकर भारत पूर्वी समुद्री क्षेत्र में अपनी रणनीतिक और आर्थिक उपस्थिति मजबूत करना चाहता है। हाल ही में भारत-जापान संबंधों में भी तकनीक, रक्षा और आर्थिक सुरक्षा के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है।
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