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अपील पर अमल: खर्चों में कमी से बचेंगे 5.6 लाख करोड़ रुपये, बदलेगी देश की तस्वीर

Tue, 12 May 2026 05:56 AM IST
राकेश कुमार अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

भारत ने विदेशी मुद्रा संकट से निपटने के लिए खपत घटाने का मास्टर प्लान तैयार किया है। तेल, सोना और विदेश यात्रा पर लगाम लगाकर देश 5.6 लाख करोड़ रुपये बचा सकता है, जो अर्थव्यवस्था को स्थिरता देने के लिए संजीवनी साबित होगा। क्या है सरकार की योजना? जानिए...
 
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विदेशी मुद्रा भंडार ( प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Agency
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विस्तार
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ईरान संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल के बीच पीएम नरेंद्र मोदी की पेट्रोल-डीजल के संयमित इस्तेमाल, सोने की खरीद एक साल रोकने और विदेश यात्रा नहीं करने की अपील पर अमल से भारत एक साल में 59.2 अरब डॉलर (करीब 5.6 लाख करोड़ रुपये) की विदेशी मुद्रा बचा सकता है। अनुमान वित्त वर्ष 2025-26 के कच्चा तेल, सोना, खाद्य तेल और उर्वरक आयात के साथ विदेश यात्रा पर खर्च के आंकड़ों के विश्लेषण पर आधारित है।
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भारत ने 2025-26 में 135 अरब डॉलर का कच्चा तेल आयात किया था। उधर, सरकार ईंधन खपत में 20% तक की कटौती करना चाहती है, जिससे सालाना 27 अरब डॉलर की बचत होगी। इसी प्रकार, बीते वित्त वर्ष भारत ने 72 अरब डॉलर का सोना आयात किया था। अगर इसमें 10% की भी कमी आती है, तो हर साल 7.2 अरब डॉलर की बचत होगी।

हर श्रेणी में ऐसे होगी बचत
श्रेणी आयात/खर्च मूल्य (अरब डॉलर) कटौती बचत (अरब डॉलर)
कच्चा तेल 135 20% 27.0
सोना 72 10% 7.2
खाद्य तेल 19.5 10% 1.95
उर्वरक 14.5 50% 7.3
विदेशी यात्रा 15.8 100% 15.8
कुल संभावित बचत 59.2
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ईंधन की खपत में 20 फीसदी कमी का लक्ष्य
अंतरराष्ट्रीय बाजार में जब कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो रुपया के कमजोर पड़ने के साथ सभी चीजें महंगी हो जाती हैं। इस समस्या से निपटने के लिए सरकार का लक्ष्य लोगों के व्यवहार और खपत में बदलाव लाकर ईंधन की मांग में 20% तक की कमी लाना है। खपत कम होने से मांग का दबाव अपने आप कम हो जाएगा। इससे कीमतों को नीचे लाने में मदद मिलेगी और आपूर्ति शृंखला पर पड़ने वाला दबाव भी घटेगा। अन्य देश भी ऊर्जा बचत और मांग नियंत्रित करने के ऐसे ही उपायों पर जोर दे रहे हैं।

यह भी पढ़ें: विदेशी मुद्रा भंडार बचाने की चुनौती: क्यों जरूरी है सोना, तेल और खाद के मोह पर लगाम? जानिए

सोने की मांग घटने के आसार नहीं
भारत में सोने का मोह अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा सिरदर्द बन गया है। कीमत बढ़ने के बावजूद सोने की मांग में कमी के आसार नहीं हैं। शादी-ब्याह और निवेश के सुरक्षित विकल्प के रूप में सोने की लोकप्रियता और सांस्कृतिक महत्व के कारण ऊंची कीमतों के बावजूद खरीदारी जारी रहने के आसार है। आभूषण कारोबारियों का मानना है कि भारत जैसे बाजार में सोने की मांग पूरी तरह थमना मुश्किल है। सोने पर छह फीसदी आयात शुल्क लगता है। इसमें पांच फीसदी कस्टम डयूटी व एक फीसदी कृषि सेस शामिल है। सोने के आयात को हतोत्साहित करने के लिए अगर कस्टम डूयटी बढ़ाई जाती है, तो स्वर्ण आभूषण मंहगे हो जाएंगे। हालांकि, सूत्रों का दावा है कि सरकार आयात शुल्क में बढ़ोतरी जैसा कोई कदम नहीं उठाने जा रही है।
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दोगुने आयात और चालू खाता घाटे ने बढ़ाई चिंता
भारत का सोना आयात बिल 2025-26 में 24% बढ़कर 72 अरब डॉलर (6 लाख करोड़ रुपये) पहुंच गया। 2024-25 में सोने का आयात 58 अरब डॉलर, 2023-24 में 45.54 अरब डॉलर और 2022-23 में 35 अरब डॉलर रहा था। इससे 2025-26 में व्यापार घाटा बढ़कर 333.2 अरब डॉलर पहुंच गया। अगर सोने का आयात इसी रफ्तार से बढ़ा, तो चालू खाता घाटा भी 1.3% के पार निकल जाएगा।

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