कांग्रेस पार्टी से आने वाले प्रधानमंत्रियों की बात करें तो विदेशी संसदों को मनमोहन सिंह ने सबसे अधिक सात बार संबोधित किया था। उसके बाद इंदिरा गांधी का नंबर है, जिन्होंने चार बार विदेशी संसदों को संबोधित किया। वहीं, जवाहर लाल नेहरू ने तीन बार, राजीव गांधी ने दो बार और पीवी नरसिंह राव ने एक बार विदेशी संसद को संबोधित किया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अब तक विदेशी संसदों को 17 बार संबोधित किया है। यह संख्या उनके सभी कांग्रेसी पूर्ववर्तियों के कुल संबोधनों के बराबर है। पीएम मोदी ने यह उपलब्धि इस महीने के प्रथम सप्ताह में पांच देशों की यात्रा के दौरान घाना, त्रिनिदाद एवं टोबैगो और नामीबिया की संसदों में दिए गए अपने नवीनतम भाषणों के साथ हासिल की।
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कांग्रेस पार्टी से आने वाले प्रधानमंत्रियों की बात करें तो विदेशी संसदों को मनमोहन सिंह ने सबसे अधिक सात बार संबोधित किया था। उसके बाद इंदिरा गांधी का नंबर है, जिन्होंने चार बार विदेशी संसदों को संबोधित किया। वहीं, जवाहर लाल नेहरू ने तीन बार, राजीव गांधी ने दो बार और पीवी नरसिंह राव ने एक बार विदेशी संसद को संबोधित किया था। इस तरह कांग्रेस से आने वाले पूर्व प्रधानमंत्रियों ने विदेशी संसदों को कुल 17 बार संबोधित किया।
रिकॉर्ड तोड़ वैश्विक कूटनीति की झलक
पीएम मोदी की इस उपलब्धि में उनकी रिकॉर्ड तोड़ वैश्विक कूटनीति की झलक भी मिलती है। उन्होंने जिन देशों की संसदों को संबोधित किया है, उनमें विकसित व विकासशील दोनों ही देश शामिल हैं। यह भारत के व्यापक वैश्विक सम्मान को दर्शाता है। भारत ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान वैश्विक दक्षिण के कई देशों के साथ खड़े होकर काम किया। उन्होंने तब भी हमारी बात सुनी थी और आज भी वे हमारी बात सुनना चाहते हैं।
अमेरिकी संसद को दो बार किया संबोधित
विगत वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी ने दुनिया के जिन देशों के संसदों को संबोधित किया उनमें अमेरिका से लेकर युगांडा तक शामिल हैं। 2014 में पीएम ने ऑस्ट्रेलिया, फिजी, भूटान और नेपाल की संसदों को संबोधित किया। 2015 में ब्रिटेन, श्रीलंका, मंगोलिया, अफगानिस्तान और मॉरीशस की संसद को संबोधित किया। अमेरिकी संसद कांग्रेस को पीएम मोदी ने दो बार संबोधित किया है। पहली बार 2016 में और दूसरी बार 2023 में। पीएम ने 2018 में युगांडा, 2019 में मालदीव और 2024 में गुयाना की संसद को संबोधित किया था।
प्रधानमंत्री मोदी ने नामीबिया की आजादी के आंदोलन में भारत की मदद का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने अपनी आजादी से भी पहले संयुक्त राष्ट्र में दक्षिण पश्चिम अफ्रीका का मुद्दा उठाया था। भारतीय लेफ्टिनेंट जनरल दीवान प्रेम चंद ने नामीबिया में संयुक्त राष्ट्र की शांति सेना का नेतृत्व किया था। पीएम मोदी ने कहा कि भारत को आपके साथ खड़े होने का गर्व है यह हम सिर्फ हम कह नहीं रहे, बल्कि कर भी रहे हैं।