उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति एम वेकैंया नायडू का कार्यकाल बुधवार को समाप्त हो जाएगा। इससे पहले उनके लिए सोमवार को विदाई समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बोलते हुए पीएम मोदी ने उनके साथ बिताए अपने पुराने दिनों को याद किया। वहीं, उपराष्ट्रपति नायडू ने कहा कि उन्हें एक तरफ इन जिम्मेदारियों से मुक्त होने की खुशी हो रही है, वहीं दूसरी तरफ दुख भी है।
उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू को सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य शीर्ष नेताओं की मौजूदगी में राज्यसभा यानी उच्च सदन में विदाई दी गई। नायडू बुधवार को पद छोड़ देंगे और जगदीप धनखड़ 11 अगस्त को पद एवं गोपनीयता की शपथ लेंगे। उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू की विदाई को लेकर संसद भवन के जीएमसी बालयोगी सभागार में आयोजिक कार्यक्रम में बोलते हुए पीएम मोदी ने नायडू से मुलाकात के अपने शुरुआती दिनों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि ये एक भावुक पल है। पीएम मोदी ने कहा कि उनका अनुभव विपक्षी मित्रों के लिए चिंता का विषय बन जाता था।
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पहले ऐसे राज्यसभा के सभापित जो सदस्य भी रहे
एम वेंकैया नायडू के विदाई समारोह के दौरान अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि वेंकैया नायडू ऐसे पहले उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापित हैं जो राज्यसभा के सदस्य भी रहें। अब जो लंबे समय तक राज्यसभा में रहे हों उनको सदन में क्या-क्या चलता है।पर्दे के पीछे क्या चलता है, कौन सा दल क्या करेगा? इन सभी बातों का उनको भली भांती अंदाजा था। उनका यह अनुभव विपक्षी मित्रों के लिए चिंता का विषय बन जाता था।
पीएम ने पुराने दिनों को किया याद
पीएम मोदी ने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि जब मैंने अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के दौरान पार्टी के लिए काम किया उस समय एम वेंकैया नायडू और मेरे बीच खूब बातचीत हुआ करती थी। वे हमेशा कहा करते थे कि वे ग्रामीण विकास विभाग में काम करना चाहते हैं। उपराष्ट्रपति नायडू में इसके लिए जुनून था।
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पीएम मोदी ने कहा- याद रखनी चाहिए एम. वेंकैया नायडू की सलाह
पीएम ने कहा कि एम. वेंकैया नायडू पहले सभापति हो सकते थे जो जानते थे कि कैसे सदन को और अधिक सक्षम बनाना है और देश के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना है। संसदीय समिति को और अधिक उत्पादक और परिणाम-उन्मुख बनाना है।हमें उनकी सलाह को यादगार बनाना चाहिए।
पीएम मोदी ने आगे कहा कि उपराष्ट्रपति के रूप में अपने चुनाव के दौरान उनका एक दुख संवैधानिक आवश्यकताओं के कारण पार्टी से इस्तीफा देने का था, लेकिन मुझे लगता है कि वेंकैया जी अपनी 5 साल की अनुपस्थिति को जरूर छुपाएंगे। सभी दिग्गज सदस्यों को प्रेरित करने, प्रोत्साहित करने और पुरस्कृत करने का उनका काम जारी रहेगा।
विदाई समारोह में बोले उपराष्ट्रपति- खुशी के साथ दुख भी
वही, अपने विदाई समारोह में एम. वेंकैया नायडू ने कहा कि मैं एक तरफ बहुत खुश हूं और दूसरी तरफ मुझे लगता है, मैं आप सभी को याद कर रहा हूं क्योंकि मैं 10 अगस्त से सदन की अध्यक्षता करने की स्थिति में नहीं रहूंगा। उन्होंने भारतीय संस्कृति और परंपरा को लेकर कहा कि मैं हमेशा सदन का अभिवादन करते हुए 'नमस्ते' कहा करता था क्योंकि भारतीय परंपरा और संस्कृति में बहुत कुछ है।