प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को ग्लोबल फिनटेक फेस्ट का उद्घाटन किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम और फिनटेक सेक्टर की बढ़ती पहुंच का जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि 11 देशों तक इसका विस्तार हो चुका है।
पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें इस आयोजन में लगातार तीसरी बार शामिल होने की खुशी है। उन्होंने इसे एक और ‘हैट्रिक’ बताते हुए कहा कि 2024 में तीसरी बार सरकार बनने की हैट्रिक के बाद यह उनके लिए ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में लगातार तीसरी बार आने की हैट्रिक है। उनके मुताबिक, यह इस बात को दिखाता है कि विकसित भारत के निर्माण में फिनटेक और इससे जुड़े लोगों की भूमिका कितनी अहम है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हर बार फेस्ट में आने पर उन्हें पहले की तुलना में ज्यादा युवा, ज्यादा ऊर्जा और संभावनाओं का बड़ा दायरा नजर आता है। उन्होंने कहा कि युवाओं में जोखिम लेने की क्षमता बढ़ रही है और उनके सपने भी बड़े हो रहे हैं। इससे विकसित भारत के भविष्य को लेकर उनका भरोसा और मजबूत होता है।
पीएम मोदी ने कहा कि यूपीआई की सफलता के बाद अब अगला लक्ष्य दूसरे देशों के पेमेंट सिस्टम के साथ जुड़ने का होना चाहिए। उन्होंने भारत और सिंगापुर के बीच हुए पेमेंट सिस्टम इंटीग्रेशन का उदाहरण देते हुए कहा कि अब दोनों देशों के बीच भुगतान करना लगभग उसी तरह आसान हो गया है, जैसे एक शहर से दूसरे शहर में भुगतान किया जाता है। उन्होंने कहा कि जिन देशों में बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं, जहां भारत का बड़े स्तर पर कारोबार है और जो भारत के साथ जुड़ने के लिए तैयार हैं, उनके साथ पेमेंट सिस्टम को जोड़ने पर काम किया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने विदेशों में काम करने वाले भारतीयों के लिए भी इसे महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में काम करने वाले भारतीय अपने परिवारों को पैसा भेजते हैं, लेकिन रकम का एक हिस्सा ट्रांजैक्शन कॉस्ट में चला जाता है। यूपीआई के विस्तार से इस लागत को कम करने और पैसे को तेजी से परिवारों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
पीएम मोदी ने कहा कि इस समय दुनिया टकराव और अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। ऊर्जा और कमोडिटी की सप्लाई चेन पर दबाव बना हुआ है। पिछले कई महीनों से यह स्थिति बनी हुई है और अप्रैल से जून की तिमाही विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण रही। उन्होंने कहा कि ऐसे माहौल में जब भारत 7.8 प्रतिशत की दर से विकास कर रहा है, तो इससे दुनिया का भरोसा भारत पर और मजबूत होता है। उन्होंने कहा कि यही भरोसा ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में मौजूद लोगों के चेहरों पर भी साफ नजर आ रहा है।
प्रधानमंत्री ने भारत पर बढ़ते वैश्विक भरोसे का उदाहरण देश की सॉवरेन रेटिंग को बताया। उन्होंने कहा कि हाल ही में जापान की क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ने भारत की सॉवरेन रेटिंग को 'ए' कैटेगरी में अपग्रेड किया है। उन्होंने कहा कि बहुत कम लोग जानते हैं कि यह उपलब्धि करीब तीन दशक के लंबे अंतराल के बाद हासिल हुई है।
फिनटेक का अगला चरण क्या होगा?
पीएम मोदी ने कहा कि टेक्नोलॉजी की मदद से अलग-अलग तरह के कारोबार करने वाले लोगों की आर्थिक गतिविधियों को समझकर उनकी जरूरत के मुताबिक वित्तीय मॉडल तैयार किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि फिनटेक का अगला अध्याय केवल पेमेंट तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि भारत ने पेमेंट के क्षेत्र में बड़े पैमाने और तेज गति से विस्तार किया है। अब फिनटेक को नॉन-पेमेंट ट्रांजैक्शन का हिस्सा बढ़ाने की दिशा में काम करना चाहिए।
पीएम मोदी ने कहा कि 21वीं सदी का पहला क्वार्टर पूरा हो चुका है और अब 2026 में दूसरा क्वार्टर नई संभावनाओं के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने फिनटेक क्षेत्र से इन संभावनाओं का लाभ उठाने और नए अवसर तैयार करने की दिशा में काम करने का आह्वान किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि तकनीक समावेशन का एक बेहद प्रभावी माध्यम है और यूपीआई ने इसे साबित किया है। उनके मुताबिक, वित्तीय प्रौद्योगिकी की खासियत यही होनी चाहिए कि वह उन क्षेत्रों तक पहुंचे, जहां पारंपरिक मॉडल नहीं पहुंच पाते। उन्होंने कहा कि एजेंट एआई, टोकनाइजेशन और क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसी तकनीकें वित्तीय क्षेत्र में नई कंपनियों और नए अवसरों के द्वार खोल रही हैं।