विपक्ष डाल-डाल तो सरकार पात-पात की तर्ज पर चल रही है। पहल फिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की है और भाजपा के सांसदों को नोटबंदी के मुद्दे पर जनता के बीच जाने के लिए कहा जा रहा है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री चाहते हैं कि सभी सांसद शनिवार, रविवार को अपने क्षेत्र में जनता के बीच रहें। इस दौरान सांसद न केवल जनता की परेशानियों का साझा करें, बल्कि उन्हें कालाधन और सरकार के प्रयास के बारे में जागरुक करें।
सरकार नोटबंदी के अपने निर्णय पर दृढ़़ है। प्रधानमंत्री खुद इस पूरे प्रकरण में लगातार हालात से अपडेट हो रहे हैं। वित्त मंत्री अरुण जेटली को विश्वास है कि नोटबंदी के निर्णय का बाद में अच्छा नतीजा आएगा। वित्तमंत्री का इस बारे में साफ कहना है कि जिसके पास कालाधन है, वहीं इस निर्णय को लेकर कुछ ज्यादा हैरान और विचलित हैं। रही बात सरकार की तो वह आम आदमी, किसान, मजदूर आदि को होने वाली समस्याओं के समाधान का निरंतर प्रयास कर रही है।
मंगलवार को होने वाली पार्टी संसदीय बोर्ड की बैठक में दें रिपोर्ट
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प्रधानमंत्री की मंशा इसके आगे भी है। वह चाहते हैं कि सांसद जनता को सरकार की मंशा और नीति से अवगत कराएं। उन्हें बताएं यह जनहित और राष्ट्रहित से किस तरह से जुड़ा निर्णय है। पार्टी के एक वरिष्ठ सांसद के मुताबिक उन्हें भी ऐसा करने के लिए कहा गया है और इसके बाबत मंगलवार को होने वाली पार्टी संसदीय बोर्ड की बैठक में इसके बाबत जानकारी देनी है।
ऐसा माना जा रहा है कि पार्टी ने 500 और 1000 रुपये की करेंसी नोटों को लेकर प्रोपैगैंडा बढऩे की संभावना को देखते हुए यह कदम उठाया है। सरकार कहीं न कहीं महसूस कर रही है कि नोटबंदी के चलते जनता को हो रही परेशानियों का विपक्ष लाभ उठा सकता है।
इसके अलावा कालाधन रखने वाले भी सरकार पर दबाव बनाने के लिए आम जनों को भडक़ाकर दंगे जैसे हालात पैदा कर सकते हैं।
खुफिया एजेंसियों का अलर्ट, भाजपा और संघ ने संभाला मोर्चा
खुफिया एजेंसियों ने भी सरकार को नोटबंदी के बाद उपज रहे हालात पर जानकारी दी है। अराजक तत्वों की हरकत तथा भावी संभावनाओं के बाबत भी ताकीद किया है। ऐसा माना जा रहा है कि सरकार एहतियात को तौर पर कई कदम उठाने की तैयारी में है। किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से लगातार बचने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसके बाबत राज्यों को सतर्क किया जा रहा है।
भाजपा और संघ के कार्यकर्ता तथा अनुषांगिक संगठन 500 और 1000 की करेंसी बंद किए जाने को लेकर लगातार आम लोगों के बीच में जा रहे हैं। लोगों को हो रही परेशानी को कम करने, सहानुभूति जताने तथा कालाधन को लेकर जागरुक करने का प्रयास चल रहा है।
इस मुद्दे पर जमीनी फीडबैक लेने के लिए पार्टी और संगठन भी सक्रिय हैं। एक संगठन से जुड़े सूत्र ने बताया कि 12 नवंबर से लगातार उनके संगठन से जुड़े कार्यकर्ता बैंक और एटीएम के बाहर लोगों को चाय और पानी पिला रहे हैं। उनके दर्द का साझा कर रहे हैं। इस क्रम में आम लोगों का भी लगातार उन्हें सहयोग मिल रहा है और आम जनता नोटबंदी के निर्णय में पूरा सहयोग कर रही है।