PM Degree Row: गुजरात विश्वविद्यालय की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि पीएम की डिग्रियों की जानकारी पहले से ही सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है। विश्वविद्यालय ने अपनी वेबसाइट पर पहले ही इसका विवरण उपलब्ध कराया हुआ है। उन्होंने दावा किया कि 2005 के अधिनियम का उपयोग बचकाना हरकतों के लिए किया जा रहा है।
गुजरात विश्वविद्यालय ने गुरुवार को हाईकोर्ट से कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम का इस्तेमाल किसी की बचकानी जिज्ञासाओं को संतुष्ट करने के लिए नहीं किया जा सकता है। विश्वविद्यालय ने यह दलील उस याचिका के सुनवाई के दौरान दी, जिसमें दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री के बारे में जानकारी पारदर्शिता कानून के तहत देने से मना कर दी गई थी।
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विश्वविद्यालय की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, केवल इसलिए कि कोई व्यक्ति सार्वजनिक पद पर है, कोई उसकी निजी जानकारी नहीं मांग सकता है, खासतौर से वो जानकारी जो उसकी सार्वजनिक गतिविधि से जुड़ी हुई नहीं है। पीएम की डिग्रियों की जानकारी पहले से ही सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है। विश्वविद्यालय ने अपनी वेबसाइट पर पहले ही इसका विवरण उपलब्ध कराया हुआ है। उन्होंने दावा किया कि 2005 के अधिनियम का उपयोग बचकाना हरकतों के लिए किया जा रहा है।
उपराष्ट्रपति और कानून मंत्री पर कार्रवाई की मांग वाली अर्जी खारिज
बॉम्बे हाईकोर्ट ने केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के खिलाफ न्यायपालिका और जजों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम प्रणाली पर उनकी टिप्पणी के लिए दायर एक जनहित याचिका (पीआईएल) को खारिज कर दिया। याचिका बॉम्बे लायर्स एसो. ने दायर की थी। याचिका में दावा किया गया था कि रिजिजू व धनखड़ ने टिप्पणियों से संविधान में अविश्वास दिखाया है। याचिका में धनखड़ को उपराष्ट्रपति और रिजिजू को कैबिनेट मंत्री के रूप में कर्तव्य निर्वहन से रोकने के आदेश देने की मांग की गई थी।