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PM Awas Yojana: 50 फीसदी भी मकान बनकर नहीं हुए तैयार, यही रफ्तार रही तो पांच साल और करना होगा इंतजार

Sat, 04 Jun 2022 08:43 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पीएमएवाई पोर्टल के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि एक साल में बनकर तैयार होने वाले मकानों की संख्या पिछले सात सालों में एक बार भी 20 लाख के आंकड़े को पार नहीं कर पाई है। वर्ष 2018-19 में ही सरकार सबसे अधिक 18 लाख मकानों का निर्माण करने में सक्षम हो पाई थी...
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pm awas yojana, पीएम आवास योजना - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)
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विस्तार
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पीएम नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से प्रधानमंत्री आवास योजना फिलहाल अपने लक्ष्य से कई कदम दूर नजर आ रही है। इसी वर्ष वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की थी कि सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के तहत किफायती आवास के लिए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 48,000 करोड़ रुपये आवंटित करेगी। लेकिन केंद्र सरकार ने बजट के कुछ दिन बाद ही ग्रामीण योजना के तहत मकानों के निर्माण की समय-सीमा दो साल और बढ़ा दी क्योंकि यह योजना अपने लक्ष्य से काफी पीछे थी। उपलब्ध आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि सरकार को पीएमएवाई (शहरी क्षेत्र) के लिए भी ऐसा करना पड़ सकता है। क्योंकि 17 मई तक केवल 48.7 फीसदी ही मकान बनकर तैयार हो पाए हैं। सरकार का लक्ष्य 31 मार्च, 2022 तक 1.21 करोड़ मकान बनाने का था। हालांकि, जून 2015 में योजना की घोषणा के बाद से केवल 59 लाख मकानों का निर्माण ही संभव हो सका।

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पीएमएवाई पोर्टल के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि एक साल में बनकर तैयार होने वाले मकानों की संख्या पिछले सात सालों में एक बार भी 20 लाख के आंकड़े को पार नहीं कर पाई है। वर्ष 2018-19 में ही सरकार सबसे अधिक 18 लाख मकानों का निर्माण करने में सक्षम हो पाई थी। वर्ष 2019-20 में करीब  840,645 मकानों का निर्माण कार्य पूरा हुआ था और बाद के दो वर्षों में 14.6 लाख और 12.1 लाख मकानों का निर्माण किया गया था। इन आंकड़ों की गणना से पता चलता है कि इस रफ्तार से सरकार को अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए पांच साल का वक्त और लगेगा। इसमें सरकार ने जिन अतिरिक्त आवासों को मंजूरी दी है उनका हिसाब नहीं है। सरकार ने शुरू में 1.1 करोड़ मकानों के निर्माण को मंजूरी दी थी। बाद में यह संख्या बढ़ाकर 1.2 करोड़ से कुछ अधिक कर दी गई।

आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि अधिकांश पूर्वोत्तर राज्यों के अलावा जहां मकानों के पूरी तरह बनकर तैयार होने की दर 30 फीसदी से कम थी। इस लिहाज से आंध्र प्रदेश, हरियाणा, बिहार और कर्नाटक भी राष्ट्रीय औसत से नीचे रहे हैं। 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से, 18 राज्यों में मकान बनकर तैयार होने की दर राष्ट्रीय औसत से कम थी। आंध्र प्रदेश में अब तक स्वीकृत मकानों में से केवल 24 फीसदी ही तैयार किए जा सके हैं। वहीं हरियाणा में 31.4 फीसदी और बिहार में 34.2 फीसदी मकान ही बनकर तैयार हुए हैं।  
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इस बीच, दिल्ली और चंडीगढ़ ने स्वीकृत संख्या से अधिक मकान बनाकर तैयार कर दिए हैं। गोवा में मकान बनाकर तैयार करने की दर 92 फीसदी थी, जबकि उत्तर प्रदेश सहित 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने 60 फीसदी से अधिक मकान बनाकर लाभार्थियों को दिए हैं। सरकार के डैशबोर्ड के अनुसार, इस योजना के लिए अब तक दो लाख करोड़ रुपये की प्रस्तावित राशि में से 1.18 लाख करोड़ रुपये जारी कर दिए गए हैं। जैसे-जैसे परियोजनाओं में देरी होगी निर्माण लागत में भी वृद्धि होने की संभावना है।

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