मुख्य न्यायाधीश उदय उमेश ललित और न्यायमूर्ति बेला एम. त्रिवेदी की पीठ ने उस याचिका को तीन न्यायाधीशों की पीठ के सामने सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया जिसमें चुनाव प्रचार के दौरान मुफ्त में चीजें दिए जाने के वादे पर रोक लगाने की मांग की गई थी।
राजनीतिक दल चुनाव से पहले मुफ्त में सुविधाओं को देने का वादा करते रहते हैं। इसको लेकर मंगलवार को सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि इस प्रथा के खिलाफ तीन न्यायाधीशों की पीठ पूरी तरह से सुनवाई करेगी।
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मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित और न्यायमूर्ति बेला एम. त्रिवेदी की पीठ ने उस याचिका को तीन न्यायाधीशों की पीठ के सामने सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया जिसमें चुनाव प्रचार के दौरान मुफ्त में चीजें दिए जाने के वादे पर रोक लगाने की मांग की गई थी।
शीर्ष अदालत ने कहा कि विवाद की प्रकृति और पहले की सुनवाई में पक्षों द्वारा दी गई दलीलों को देखते हुए मामले को जल्द से जल्द सूचीबद्ध किया जाए।
दरअसल वरिष्ठ अधिवक्ता और भाजपा के दिल्ली के पूर्व प्रवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने जनहित याचिका दायर की थी, जिसमें चुनाव आयोग को राजनीतिक दलों को चुनाव प्रचार के दौरान मुप्त में वादा करने की अनुमति नहीं देने का निर्देश देने की मांग की गई।
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उपाध्याय ने तर्क दिया कि राजनीतिक दल चुनावों के दौरान राज्य की अर्थव्यवस्था पर वित्तीय प्रभाव के आकलन के बिना केवल वोट बैंक को हासिल करने के लिए वादे करते हैं। इस प्रकार, टैक्स देने वालों के पैसे का इस्तेमाल राजनीतिक दलों द्वारा सत्ता में बने रहने के लिए किया जाता है। याचिकाकर्ता के मुताबिक यह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव पर विपरीत असर डालता है।