सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उन याचिकाकर्ताओं से सवाल किया, जिन्होंने दावा किया था कि कोविड वैक्सीन के दुष्प्रभावों से हुई मौतों की संख्या भारत में 'बेहद कम' दिखाई गई है। शीर्ष कोर्ट ने पूछा कि आप ब्रिटेन की ओर से जारी आंकड़ों पर भरोसा करते हैं, लेकिन अपनी ही सरकार के आंकड़ों पर नहीं?
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही थी। याचिका में कहा गया था कि 2021 में कोविशील्ड की पहली खुराक लेने के बाद दो महिलाओं की मौत हो गई थी। कहा गया कि टीका लगने के बाद दोनों को गंभीर दुष्प्रभाव हुए। शीर्ष कोर्ट ने इस पर अपना आदेश सुरक्षित रखा।
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मौत का आंकड़ा छिपा रही भारत सरकार: याचिकाकर्ता
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंसाल्वेस ने कहा कि भारत ने ब्रिटेन की तुलना में 30 गुना अधिक खुराकें दीं, लेकिन ब्रिटेन के आंकड़े पारदर्शी हैं और भारत मौतों के आंकड़े छिपा रहा है। इस पर जस्टिस नाथ ने पूछा, क्या आप मानते हैं कि ब्रिटेन ने सही आंकड़े वेबसाइट पर डाले हैं और भारत ने नहीं? गोंसाल्वेस ने जवाब दिया कि उन्हें ब्रिटेन के आंकड़े सही लगते हैं, हालांकि वे गलत भी हो सकते हैं।
बेंच ने पूछा- अपनी सरकार के आंकड़ों पर भरोसा नहीं?
बेंच ने कहा, आप ब्रिटेन सरकार के आंकड़ों पर भरोसा करते हैं लेकिन अपनी सरकार के आंकड़ों पर नहीं? गोंसाल्वेस ने कहा कि उन्होंने मांग की है कि एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति इस मामले की जांच करे। उन्होंने कहा, मुझे अब सरकार पर कुछ कहने की जरूरत नहीं, लेकिन यह मामला इतना गंभीर है कि इसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
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केंद्र सरकार ने किया याचिका का विरोध
केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्य भाटी ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा पहले भी उठ चुका है और शीर्ष कोर्ट इस पर फैसला दे चुका है। भाटी ने दिसंबर 2024 तक के आंकड़े पेश करते हुए कहा कि भारत में अब तक कुल 220 करोड़ कोविड टीके लगाए गए हैं।
टीके ने बचाई लाखों जानेंं: केंद्र सरकार
इनमें कुल 92,697 मामलों में टीका लगने के बाद दुष्प्रभाव दर्ज किए गए, जो कुल खुराकों का केवल 0.0042 फीसदी है। इनमें से 1,171 लोगों की मौत हुई, जो कुल आंकड़े का मात्र 0.00005 फीसदी है। उन्होंने कहा कि हल्के मामलों की संख्या 89,854 थी, जबकि गंभीर या गंभीर मामलों की संख्या 2,843 रही। भाटी ने कहा कि चिकित्सा अनुसंधान से साबित है कि वैक्सीन ने महामारी के दौरान लाखों जानें बचाईं।
उन्होंने कहा, भारत में बहुत मजबूत निगरानी प्रणाली है। कोई भी दवा पूरी तरह सुरक्षित नहीं होती। हर दवा का कुछ न कुछ दुष्प्रभाव होता है। यह अलग-अलग लोगों के शरीर पर अलग असर करता है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति का डीएनए अलग होता है, इसलिए किसी दवा का असर यूरोपीय, अफ्रीकी और भारतीय आबादी पर अलग-अलग हो सकता है।