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Supreme Court: बिलकिस बानो की याचिका पर नहीं हो सकी सुनवाई, आशीष मिश्रा की जमानत पर 'सुप्रीम' फैसला कल

Tue, 24 Jan 2023 10:43 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आज यानी मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में बिलकिस बानो की याचिका पर सुनवाई नहीं हो सकी। वहीं, नीरव मोदी के बहनोई को हांगकांग जाने की अनुमति देने के बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुनवाई करने के लिए शीर्ष कोर्ट ने सहमति दे दी है। पढ़ें सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी अहम खबरें...
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट गुजरात के बिलकिस बानो मामले में 11 दोषियों को क्षमा देने के संबंध में उसके आदेश की समीक्षा की मांग करने वाली याचिका को सूचीबद्ध करने पर जल्द विचार करेगा। बता दें, पीड़िता बिलकिस बानो ने गुजरात सरकार को दोषियों को क्षमा देने को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की समीक्षा के लिए याचिका दायर की है। 

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गुजरात के बिलकिस बानो मामले में 11 दोषियों की सजा में गुजरात सरकार द्वारा छूट दिये जाने को चुनौती देने वाली पीड़िता की याचिका पर मंगलवार को शीर्ष कोर्ट में सुनवाई नहीं हो पायी। दरअसल, इस मामले में संबंधित न्यायाधीश एक अन्य मामले की सुनवाई कर रहे थे। 

जानकारी के मुताबिक, बिलकिस बानो की याचिका पर मंगलवार को न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी और न्यायमूर्ति सी टी रविकुमार की पीठ सुनवाई करने वाली थी। हालांकि, ये दोनों न्यायाधीश न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की अध्यक्षता वाली एक संविधान पीठ में इच्छा मृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) से जुड़े एक विषय की सुनवाई करने में व्यस्त थे। बता दें कि दोनों न्यायधीश संविधान पीठ का भी हिस्सा हैं। अब बिलकिस बानो की याचिका पर सुनवाई के लिए नयी तारीख शीर्ष कोर्ट की रजिस्ट्री तय करेगी।
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बता दें, बिलकिस बानो ने समीक्षा याचिका के अलावा, 2002 के गुजरात दंगों के दौरान सामूहिक दुष्कर्म और परिवार के सात सदस्यों की हत्या करने के मामले में राज्य सरकार के 11 दोषियों की सजा में छूट देने के फैसले के खिलाफ भी एक याचिका दायर की है। जिसमें उन्होंने कहा कि दुष्कर्म के दोषियों की समय से पहले रिहाई ने समाज की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को 13 दिसंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी और न्यायामूर्ति बेला एम त्रिवेद की पीठ इस पर सुनवाई करेगी।

15 अगस्त को रिहा किए गए थे 11 दोषी
बिलकिस बानो ने सुप्रीम कोर्ट के 13 मई, 2022 के आदेश की समीक्षा की मांग की है। जिसमें शीर्ष अदालत ने गुजरात सरकार से नौ जुलाई, 1992 की नीति के तहत दोषियों की समय पूर्व रिहाई की याचिका पर दो महीने के भीतर विचार करने को कहा था। इसके बाद राज्य सरकार ने 11 दोषियों को छूट देते हुए 15 अगस्त 2022 को रिहा कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : ANI
नीरव मोदी के बहनोई को हांगकांग जाने की अनुमति देने के हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुनवाई करेगा शीर्ष कोर्ट
नीरव मोदी के बहनोई मैनक मेहता को हांगकांग जाने की अनुमति देने के बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर 31 जनवरी को शीर्ष कोर्ट सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मामला अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और जेबी पारदीवाला की पीठ को मेहता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अमित देसाई ने सूचित किया कि मेहता के खिलाफ साक्ष्य प्राप्त करने के लिए सिंगापुर की एक अदालत को पत्र (एलआर) जारी किए गए हैं। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद पीठ ने सीबीआई की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू को एलआर जारी करने के लिए उठाए गए कदमों के पूर्व विवरण के साथ अगले मंगलवार को सुनवाई पर आने का निर्देश दिया है।  

सरसों। - फोटो : बसीत जरगर
जीएम सरसों को लेकर हुई सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने जीएम सरसों की पर्यावरणीय रिलीज से पहले जोखिम कारकों के बारे में चिंता जाहिर की है। मंगलवार को शीर्ष कोर्ट ने कहा कि जब जीएम सरसों को पर्यावरणीय रूप से जारी करने के लिए केंद्र द्वारा दी गई सशर्त मंजूरी की बात आती है तो वह किसी भी अन्य चीज की तुलना में जोखिम कारकों के बारे में अधिक चिंतित है।

जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस बी वी नागरथना की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही थी। एक्टिविस्ट अरुणा रोड्रिग्स और एनजीओ 'जीन कैंपेन' ने जीएम सरसों को लेकर अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की हैं। इसमें किसी भी आनुवंशिक रूप से संशोधित जीवों (जीएमओ) को सार्वजनिक डोमेन में व्यापक, पारदर्शी और कठोर जैव-सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत पर्यावरण में छोड़ने पर रोक लगाने की मांग की गई है।  

सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : सोशल मीडिया
सुप्रीम कोर्ट ने BCI को लगाई फटकार 
सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) को फटकार लगाई है। शीर्ष अदालत ने यह फटकार राज्यों में वकीलों को हड़ताल पर जाने से रोकने के लिए ठोस योजना तैयार करने में देरी को लेकर लगाई। न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने मंगलवार को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) से पेशेवर शिष्टाचार कानून के नियमों को मजबूत करने को कहा है। 

एनजीओ 'कॉमन कॉज' ने वकीलों द्वारा हड़ताल के खिलाफ शीर्ष अदालत के आदेश के कथित उल्लंघन को लेकर एक अवमानना याचिका दायर की है। इसी पर मंगरवार को सुनवाई हुई। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट काफी समय से बीसीआई से वकीलों के आंदोलन को समाप्त करने के बारे में एक ठोस प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए कह रहा है।
बीते साल ओडिशा के संबलपुर में वकीलों के आंदोलन से नाराज शीर्ष अदालत ने चेतावनी दी थी कि अगर स्थानीय पुलिस चीजों को नियंत्रण में लाने में विफल रही तो स्थिति से निपटने के लिए केंद्रीय बलों को भेजा जाएगा।

आशीष मिश्रा और अजय मिश्रा टेनी - फोटो : Amar Ujala
 लखीमपुर खीरी हिंसा: आशीष की जमानत पर 'सुप्रीम' फैसला कल
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में 2021 में हुई हिंसा के आरोपी केंद्रीय मंत्री अजय कुमार मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट बुधवार को फैसला सुनाएगा। शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर यह जानकारी दी गई है। जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जेके महेश्वरी की पीठ ने 19 जनवरी को इस पर आदेश सुरक्षित रख लिया था। गौरतलब है, 3 अक्तूबर, 2021 को लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया में आठ लोग मारे गए थे।

सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : ANI
सुप्रीम कोर्ट ने यस बैंक-डिश टीवी विवाद में इलाहाबाद HC के आदेश को रद्द किया 
सुप्रीम कोर्ट ने यस बैंक-डिश टीवी विवाद में इलाहाबाद HC के आदेश को रद्द कर दिया है। दरअसल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शेयर गिरवी रखने पर यस बैंक-डिश टीवी विवाद में एस्सेल समूह द्वारा दर्ज प्राथमिकी की पुलिस जांच को चुनौती देने वाली यस बैंक की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया था। सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जेबी पारदीवाला की पीठ ने हाईकोर्ट का आदेश रद्द करते हुए यह निर्देश भी दिया है कि 30 नवंबर, 2021 के उसके पहले के आदेश में प्राथमिकी में पुलिस जांच पर रोक तब तक लागू रहेगी, जब तक कि उच्च न्यायालय प्राथमिकी के खिलाफ यस बैंक की याचिका का निस्तारण नहीं करेगा।

सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media
अंडमान में ऑयल पॉम प्लांटेशन को लेकर सीईसी ने सौंपी रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) ने कहा है कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में पूर्व में रेड किया गया ऑयल पॉम प्लांटेशन व्यावसायिक रूप से फेल साबित हुए हैं। 12 जनवरी को शीर्ष अदालत को सौंपे गए एक नोट में समिति ने यह दावा किया है। सीईसी ने यह भी कहा कि रेड ऑयल पॉम प्लांटेशन से द्वीपसमूह में वन भूमि का अतिक्रमण हो सकता है। 
केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने जनवरी 2019 में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में वन भूमि पर वाणिज्यिक और मोनोकल्चर वृक्षारोपण पर 2002 के प्रतिबंध को रद्द करने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।
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बॉम्बे हाईकोर्ट - फोटो : ANI
अधिवक्ता नीला केदार बनीं बॉम्बे हाईकोर्ट की जज
एक अधिवक्ता और दो न्यायिक अधिकारियों को मंगलवार को दो हाईकोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया। विधि मंत्रालय में न्याय विभाग की ओर से जारी अधिसूचनाओं के अनुसार, अधिवक्ता नीला केदार गोखले को बॉम्बे हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया है। उन्होंने 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले के आरोपी लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित का प्रतिनिधित्व किया था।

इसके साथ ही दो न्यायिक अधिकारियों वेंकट ज्योतिर्मई प्रताप और वेणुथुरमल्ली गोपाल कृष्ण राव को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया है। इन सभी नामों की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 10 जनवरी को की थी।
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