नीरव मोदी के बहनोई को हांगकांग जाने की अनुमति देने के हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुनवाई करेगा शीर्ष कोर्ट
नीरव मोदी के बहनोई मैनक मेहता को हांगकांग जाने की अनुमति देने के बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर 31 जनवरी को शीर्ष कोर्ट सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मामला अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और जेबी पारदीवाला की पीठ को मेहता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अमित देसाई ने सूचित किया कि मेहता के खिलाफ साक्ष्य प्राप्त करने के लिए सिंगापुर की एक अदालत को पत्र (एलआर) जारी किए गए हैं। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद पीठ ने सीबीआई की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू को एलआर जारी करने के लिए उठाए गए कदमों के पूर्व विवरण के साथ अगले मंगलवार को सुनवाई पर आने का निर्देश दिया है।
जीएम सरसों को लेकर हुई सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने जीएम सरसों की पर्यावरणीय रिलीज से पहले जोखिम कारकों के बारे में चिंता जाहिर की है। मंगलवार को शीर्ष कोर्ट ने कहा कि जब जीएम सरसों को पर्यावरणीय रूप से जारी करने के लिए केंद्र द्वारा दी गई सशर्त मंजूरी की बात आती है तो वह किसी भी अन्य चीज की तुलना में जोखिम कारकों के बारे में अधिक चिंतित है।
जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस बी वी नागरथना की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही थी। एक्टिविस्ट अरुणा रोड्रिग्स और एनजीओ 'जीन कैंपेन' ने जीएम सरसों को लेकर अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की हैं। इसमें किसी भी आनुवंशिक रूप से संशोधित जीवों (जीएमओ) को सार्वजनिक डोमेन में व्यापक, पारदर्शी और कठोर जैव-सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत पर्यावरण में छोड़ने पर रोक लगाने की मांग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने BCI को लगाई फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) को फटकार लगाई है। शीर्ष अदालत ने यह फटकार राज्यों में वकीलों को हड़ताल पर जाने से रोकने के लिए ठोस योजना तैयार करने में देरी को लेकर लगाई। न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने मंगलवार को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) से पेशेवर शिष्टाचार कानून के नियमों को मजबूत करने को कहा है।
एनजीओ 'कॉमन कॉज' ने वकीलों द्वारा हड़ताल के खिलाफ शीर्ष अदालत के आदेश के कथित उल्लंघन को लेकर एक अवमानना याचिका दायर की है। इसी पर मंगरवार को सुनवाई हुई। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट काफी समय से बीसीआई से वकीलों के आंदोलन को समाप्त करने के बारे में एक ठोस प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए कह रहा है।
बीते साल ओडिशा के संबलपुर में वकीलों के आंदोलन से नाराज शीर्ष अदालत ने चेतावनी दी थी कि अगर स्थानीय पुलिस चीजों को नियंत्रण में लाने में विफल रही तो स्थिति से निपटने के लिए केंद्रीय बलों को भेजा जाएगा।
आशीष मिश्रा और अजय मिश्रा टेनी
- फोटो : Amar Ujala
लखीमपुर खीरी हिंसा: आशीष की जमानत पर 'सुप्रीम' फैसला कल
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में 2021 में हुई हिंसा के आरोपी केंद्रीय मंत्री अजय कुमार मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट बुधवार को फैसला सुनाएगा। शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर यह जानकारी दी गई है। जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जेके महेश्वरी की पीठ ने 19 जनवरी को इस पर आदेश सुरक्षित रख लिया था। गौरतलब है, 3 अक्तूबर, 2021 को लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया में आठ लोग मारे गए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने यस बैंक-डिश टीवी विवाद में इलाहाबाद HC के आदेश को रद्द किया
सुप्रीम कोर्ट ने यस बैंक-डिश टीवी विवाद में इलाहाबाद HC के आदेश को रद्द कर दिया है। दरअसल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शेयर गिरवी रखने पर यस बैंक-डिश टीवी विवाद में एस्सेल समूह द्वारा दर्ज प्राथमिकी की पुलिस जांच को चुनौती देने वाली यस बैंक की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया था। सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जेबी पारदीवाला की पीठ ने हाईकोर्ट का आदेश रद्द करते हुए यह निर्देश भी दिया है कि 30 नवंबर, 2021 के उसके पहले के आदेश में प्राथमिकी में पुलिस जांच पर रोक तब तक लागू रहेगी, जब तक कि उच्च न्यायालय प्राथमिकी के खिलाफ यस बैंक की याचिका का निस्तारण नहीं करेगा।
अंडमान में ऑयल पॉम प्लांटेशन को लेकर सीईसी ने सौंपी रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) ने कहा है कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में पूर्व में रेड किया गया ऑयल पॉम प्लांटेशन व्यावसायिक रूप से फेल साबित हुए हैं। 12 जनवरी को शीर्ष अदालत को सौंपे गए एक नोट में समिति ने यह दावा किया है। सीईसी ने यह भी कहा कि रेड ऑयल पॉम प्लांटेशन से द्वीपसमूह में वन भूमि का अतिक्रमण हो सकता है।
केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने जनवरी 2019 में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में वन भूमि पर वाणिज्यिक और मोनोकल्चर वृक्षारोपण पर 2002 के प्रतिबंध को रद्द करने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।
अधिवक्ता नीला केदार बनीं बॉम्बे हाईकोर्ट की जज
एक अधिवक्ता और दो न्यायिक अधिकारियों को मंगलवार को दो हाईकोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया। विधि मंत्रालय में न्याय विभाग की ओर से जारी अधिसूचनाओं के अनुसार, अधिवक्ता नीला केदार गोखले को बॉम्बे हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया है। उन्होंने 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले के आरोपी लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित का प्रतिनिधित्व किया था।
इसके साथ ही दो न्यायिक अधिकारियों वेंकट ज्योतिर्मई प्रताप और वेणुथुरमल्ली गोपाल कृष्ण राव को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया है। इन सभी नामों की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 10 जनवरी को की थी।