जम्मू में हिरासत में लिए गए रोहिंग्या शरणार्थियों की तुरंत रिहाई और उन्हें प्रत्यर्पित किए जाने के आदेश को लागू करने से रोकने की मांग के साथ गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में एक अर्जी दायर की गई है। इस अर्जी में अदालत ने अनुरोध किया गया है कि वह केंद्र सरकार को इस संबंध में निर्देश दे।
शीर्ष अदालत में लंबित एक मामले में हस्तक्षेप करने की अर्जी दायर कर गृह मंत्रालय को निर्देश देने का आग्रह किया गया है कि वह अनौपचारिक शिविरों में रह रहे रोहिंग्याओं के लिए विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ) के मार्फत तीव्र गति से शरणार्थी पहचान पत्र जारी करे।
रोहिंग्या शरणार्थी मोहम्मद सलीमुल्ला ने वकील प्रशांत भूषण के मार्फत दायर अर्जी में कहा कि यह जनहित में दायर की गई है ताकि भारत में रह रहे शरणार्थियों को प्रत्यर्पित किए जाने से बचाया जा सके।
संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 21 के साथ ही अनुच्छेद 51 (सी) के तहत प्राप्त अधिकारों की रक्षा के लिए यह अर्जी दायर की गई है। रोहिंग्या के मूल देश म्यांमार में उनके खिलाफ हिंसा और भेदभाव के कारण भारत में आने के बाद उन्हें यहां से प्रत्यर्पित करने के खिलाफ यह अर्जी है।