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'प्लाज्मा बैंक': मां से प्रेरणा लेकर पुणे के शख्स ने नौ माह में 14 बार किया दान, देश में बनाया रिकॉर्ड

Sat, 08 May 2021 07:10 PM IST
सुरेंद्र जोशी राहुल संपाल, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

महामारी के इस दौर में प्लाज्मा की जरूरत ज्यादा पड़ रही है। कोरोना के खिलाफ में यह बड़ा हथियार बनकर उभरा है। 
 
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अजय मुनोत बने प्लाज्मा बैंक - फोटो : self
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विस्तार
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देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर से हाहाकार मचा हुआ है। महामारी में लाखों लोगों की जिंदगी दांव पर लगी है। कुछ लोग अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं तो कुछ दूसरों की जान बचाने के लिए अपनी जान भी दांव पर लगाने से पीछे नहीं हट रहे हैं। ऐसे ही एक शख्स पुणे के हैं, जिन्होंने प्लाज्मा दान कर कई लोगों को नई जिंदगी दी है। उन्होंने 14 बार प्लाज्मा डोनेट करने का रिकॉर्ड बनाया है। इसकी प्रेरणा उन्हें अपनी मां से मिली थी। आइए जानते है इस शख्स के बारे में

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मूलरूप से महाराष्ट्र के पुणे शहर के रहने वाले 50 वर्षीय अजय मुनोत अब तक 14 बार अपना प्लाज्मा दान कर चुके हैं। शरीर में लगातार बन रही एंटीबॉडी को दान कर लोगों की जान बचाने का उनमें ऐसा जज्बा है कि अजय ने अब तक वैक्सीन भी नहीं लगवाई, ताकि वो प्लाज्मा डोनेट करते रह सकें। बताया जा रहा है कि इंडिया बुक आफ रिकॉर्ड ने भी एक ही व्यक्ति के 14 बार प्लाज्मा दान करने का यह पहला मामला बताया है।  

जुलाई 2020 में हुए थे संक्रमित
अजय मुनोत ने अमर उजाला से चर्चा में कहा, 'मैं जुलाई 2020 में कोरोना संक्रमित हुआ था। इसके बाद से मैं लगातार लोगों की मदद के लिए प्लाज्मा डोनेट कर रहा हूं। इन नौ माह में करीब 14 बार ब्लड बैंक को अपना प्लाज्मा डोनेट कर चुका हूं। जब तक शरीर में एंटीबॉडी बनती रहेगी, तब तक प्लाज्मा दान करता रहूंगा। आमतौर एक स्वस्थ आदमी 14 दिनों के अंतराल में अपना प्लाज्मा दान कर सकता है।
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ओ निगेटिव थी मां, अक्सर करती थीं रक्तदान
उन्होंने आगे बताया कि, मेरी मां ओ निगेटिव ब्लड डोनर थी। ऐसे ब्लड ग्रुप वालों को यूनिवर्सल डोनर कहा जाता है। उन्हें अधिकतर पुणे के आर्मी आफिस से ब्लड डोनेट करने के लिए फोन आते रहते थे। जब भी वे अपना रक्तदान करने जाती थीं तो उनके साथ जाता था। तब से मैंने प्रण लिया था कि मैं भी भविष्य में ऐसा ही कुछ करुंगा, जिससे लोगों की जान बचाई सके। आज मां से ही प्रेरणा लेकर अपना प्लाज्मा डोनेट कर रहा हूं। मेरे करीबी मित्र और रिश्तेदार अब मुझे प्लाज्मा बैंक के नाम से पुकारने लगे हैं।

इसलिए नहीं लगवाई वैक्सीन
अजय ने आगे कहा, जब मैं कोरोना संक्रमित हुआ तो घबरा गया लेकिन परिवार के सदस्यों की हिम्मत से ठीक हो गया। मैंने अभी तक वैक्सीन इसलिए भी नहीं लगवाई, ताकि लोगों को प्लाज्मा डोनेट कर सकूं। मैं संयुक्त परिवार से आता हूं। मेरे परिवार में 11 सदस्य है। सभी लोग मुझे इस काम में सहयोग कर रहे हैं। मेरी पत्नी मेरे खाने पीने का विशेष ध्यान रखती है। आज परिवार के सहयोग के बगैर मैं इतना कुछ नहीं कर सकता था। आज कोरोना महामारी के इस  दौर में लोगों को एक दूसरे के साथ ही जरुरत है। इसलिए मैं अपने वीडियों और अनुभव के आधार पर लोगों को प्लाज्मा और रक्तदान करने के लिए के लिए भी प्रेरित कर रहा हूं।
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गौरतलब है कि कोरोना के गंभीर मरीजों के इलाज में प्लाज्मा की बड़ी अहमियत है इसलिए यह रक्तदान के समान ही एक परोपकार माना जा रहा है। 

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