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Milk: सेहत-पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प बना प्लांट मिल्क; पूरी तरह कोलेस्ट्रॉल रहित, घट रहा हृदय रोग का खतरा

Mon, 25 Aug 2025 04:02 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

जर्नल ऑफ फंक्शनल फूड्स में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार बाजार में सोया, बादाम, जई (ओट्स), काजू और चावल का दूध उपलब्ध है। ये सभी प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स से युक्त होते हैं। पर्यावरण के लिहाज से भी ये डेयरी दूध के मुकाबले बेहतर हैं।
 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : इंस्टाग्राम
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विस्तार
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दुनिया जब जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय संकट से जूझ रही है, तब हमारी रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतें भी पृथ्वी को बचाने में अहम हो सकती हैं। इन्हीं में एक है, हम कौन-सा दूध पीते हैं। पारंपरिक रूप से लोग गाय या भैंस का दूध इस्तेमाल करते हैं, पर अब विकल्प में वनस्पति आधारित दूध (प्लांट मिल्क) तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह न सिर्फ सेहतमंद है बल्कि पर्यावरण को भी कम नुकसान पहुंचाता है।

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जर्नल ऑफ फंक्शनल फूड्स में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार बाजार में सोया, बादाम, जई (ओट्स), काजू और चावल का दूध उपलब्ध है। ये सभी प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स से युक्त होते हैं। पर्यावरण के लिहाज से भी ये डेयरी दूध के मुकाबले बेहतर हैं। इन सभी प्लांट मिल्क में लैक्टोज नहीं होता, इसलिए जिन लोगों को डेयरी का दूध पचाने में दिक्कत होती है, उनके लिए ये बेहतर विकल्प हैं।

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सेहत के फायदे
विशेषज्ञों के मुताबिक वनस्पति दूध कोलेस्ट्रॉल रहित होता है, जिससे हृदय रोग का खतरा कम होता है। यह पचने में आसान व विटामिन, मिनरल और प्रोटीन से भरपूर होता है। हालांकि यह ध्यान रखना होगा कि यह बिना प्रिजर्वेटिव के हो तो ही बेहतर है।

पर्यावरणीय असर
डेयरी उत्पादन की तुलना में प्लांट मिल्क का पर्यावरणीय असर बेहद कम है। प्लांट मिल्क से कार्बन उत्सर्जन बहुत कम होता है। पशुपालन की तुलना में इसमें भूमि और पानी की खपत भी काफी घट जाती है।  

प्लांट मिल्क का बाजार प्रमुख ब्रांड और हिस्सेदारी
भारत में प्लांट मिल्क का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। फॉर्च्यून बिजनेस इनसाइट्स की रिपोर्ट के अनुसार 2024 तक यह लगभग 450 से 500 करोड़ रुपए का था और इसकी वार्षिक वृद्धि दर 20 से 25 फीसदी है। ब्रांड्स के स्तर पर सोयामिल्क सेगमेंट में सोयाफिट करीब 18 और स्टायटा करीब 10 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं। ओट्स मिल्क में ओटली 12, अर्बन प्लैटर 6 और रॉ प्रैसरी ओट मिल्क 8 प्रतिशत हिस्सेदारी पर काबिज हैं। बादाम व काजू मिल्क श्रेणी में एपिगामिया 14 , सोफिट 10, गुडमिल्क 6 और हर्शीज आल्मंड मिल्क लगभग 8 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी रखते हैं।
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बढ़ती मांग और बाजार
रिसर्च फर्म ग्लोबल मार्केट इनसाइट्स के अनुसार  लांट मिल्क का वैश्विक बाजार 2024 में लगभग 25 बिलियन डॉलर का है और सालाना 10 से 12 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। 2030 तक इसका आकार करीब 28 अरब डॉलर व 2035 तक करीब 52 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।

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