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महागठबंधन की काट के लिए बनाई योजना, भाजपा यूपी में शुरू करेगी मिशन 50 पर्सेंट      

Sat, 02 Jun 2018 02:02 AM IST
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
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amit shah
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यूपी में सपा-बसपा-कांग्रेस-रालोद के महागठबंधन से पार पाने के लिए भाजपा जल्द ही पूरे सूबे में -मिशन 50 पर्सेंट- अभियान शुरू करेगी। इस अभियान के तहत पार्टी लोकसभा में मिले करीब 43 फीसदी मतों को 50 फीसदी तक पहुंचाने का तानाबाना बुनेगी। चुनाव से ठीक पहले दिल्ली के आर्कबिशप का विवादास्पद पत्र और देवबंद की ओर से जारी फतवा के खिलाफ संत समाज भाजपा के समर्थन में उतरेगा। इसके अलावा पार्टी कैराना और नूरपुर में मिली हार को वोट की दृष्टि से बड़ा झटका नहीं मान रही है।
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पार्टी सूत्रों के मुताबिक पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने फूलपुर-गोरखपुर उपचुनाव में मिली हार के बाद ही सूबे में मत प्रतिशत को 50 फीसदी तक ले जाने का तानाबाना बुनना शुरू कर दिया था। अब कैराना-नूरपुर की हार के बाद इस योजना को जल्द से जल्द अमली जामा पहनाने की पहल होगी। पार्टी की रणनीति इसके लिए नया वोट बैंक तैयार करने की है। इसके तहत जाटव- यादव के अलावा मुसलमानों की पिछड़ी जाति समेत कुछ अन्य अत्यंत पिछड़ी जाति में आधार मजबूत करने की है। 
 
पार्टी का मानना है कि कैराना-नूरपुर की हार को मीडिया तथ्यों से परे जा कर बड़ी हार के रूप में प्रचारित कर रहा है। गोरखपुर-फूलपुर की तरह ही इन सीटों पर भी भाजपा अपने समर्थकों को विरोधी दलों के समर्थकों की तुलना में बूथ तक नहीं ला पाई। चार विपक्षी दलों के एकजुट होने के बावजूद मुसलिम बहुल कैराना में जहां पार्टी को 46.5 फीसदी मत मिले, वहीं नूरपुर में बीते विधानसभा की तुलना में 4 फीसदी अधिक वोट मिले। अगर कैराना में अंतिम समय में एक मुस्लिम उम्मीदवार नहीं हटता तो तस्वीर कुछ और होती। पार्टी कैराना में थोक में जाटों-दलितों का वोट हासिल होने का भी दावा कर रही है। 
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मैदान में उतरेगा संत समाज 

मुसलिम बहुल कैराना, नूरपुर और जोकीहाट में मुस्लिम उम्मीदवार जीते हैं। भाजपा को लगता है कि इस परिणाम के सहारे वह लोकसभा और विधानसभा चुनाव की तर्ज पर समानांतर धुव्रीकरण कराने में सफल रहेगी। इस बीच दिल्ली के आर्कबिशप के विवादास्पद पत्र और देवबंद की ओर से जारी फतवा के खिलाफ संत समाज ने मोर्चा खोलने की घोषणा की है। अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि चर्च और देवबंद ने चुनाव से पहले सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति को हवा दी। इसके जवाब में संत समाज भी हिंदुओं के बीच एकता के लिए मैदान में उतरेगा। 
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