आईसीआईसीआई बैंक की तरफ से शुक्रवार को उन मीडिया रिपोर्ट को गलत बताया गया, जिनमें बैंक की सीईओ व प्रबंध निदेशक चंदा कोचर को जबरन छुट्टी पर भेजने की खबरें सामने आई थी। बैंक की तरफ से बताया गया कि कोचर किसी जबरन दी गई छुट्टी पर नहीं हैं बल्कि पहले से तय वार्षिक अवकाश पर गई हुई हैं।
बैंक की तरफ से 30 मई को नियामक में दाखिल किए गए एक जवाब में ये बात भी खारिज की गई कि उनकी तरफ से कोचर के उत्तराधिकारी को तलाशने के लिए कोई सर्च कमेटी गठित की गई है। बता दें कि एक कर्ज सौदे के जरिए अपने पारिवारिक सदस्यों को लाभ पहुंचाने में कथित तौर पर शामिल होने के आरोप में कोचर इस समय स्वतंत्र जांच का सामना कर रही हैं।
कुछ मीडिया रिपोर्ट में आया था कि कोचर को वीडियोकॉन ग्रुप को बड़ा कर्ज देने में उनकी भूमिका की स्वतंत्र जांच को लंबित रखने के बदले में छुट्टी पर जाने के लिए कहा गया है। इससे पहले 29 मई को बैंक बोर्ड ने किसी स्वतंत्र व विश्वसनीय आदमी के नेतृत्व में एक जांच शुरू करने का निर्णय लिया था, जो अज्ञात व्हिसल ब्लोअर की तरफ से बैंक की एमडी व सीईओ पर लगाए गए आरोपों की जांच और उनके सच होने का निरीक्षण करेगी। याद रहे कि कोचर इस सप्ताह कार्यालय नहीं आएंगी और उनके 10 जून के बाद दोबारा कार्यालय से जुड़ने की संभावना है।
ये है पूरा मामला
चंदा कोचर के पति दीपक कोचर की फर्म न्यूपावर रिन्यूएबल्स में 64 करोड़ रुपये का निवेश वीडियोकॉन ग्रुप के प्रमुख वेणुगोपाल धूत के 99.99 फीसदी मालिकाना हक वाली सुप्रीम एनर्जी की तरफ से लगाए जाने का आरोप है। मार्केट नियामक सेबी ने चंदा कोचर को बैंक की वीडियोकॉन ग्रुप व न्यूपावर से संबंधों पर नोटिस भी जारी किया था। साथ ही न्यूपावर में करीब 325 करोड़ रुपये का निवेश दिसंबर 2010 में मारीशस की फर्स्टलैंड होल्डिंग्स ने किया, जिसके मालिक एस्सार ग्रुप के सहसंस्थापक रवि रुइया के पोते निशांत कनोडिया हैं।
इसी महीने 29 दिसंबर को आईसीआईसीआई बैंक के नेतृत्व वाले भारतीय बैंकों के समूह ने एस्सार स्टील माइन्नीसोटा एलएलसी को 530 मिलियन अमेरिकी डॉलर के कर्ज को आगे बढ़ाया था, जो बाद में एनपीए घोषित हो गया। भारतीय रिजर्व बैंक 2016 में अपनी जांच में इस निवेश पर सवालिया निशान उठा चुका है।