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आईआईटी में बीटेक सीटें बढ़ाने की तैयारी

Sun, 14 Aug 2016 01:50 PM IST
सीमा शर्मा/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रद्यौगिकी संस्थान
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आईआईटी में दाखिला जेईई मेन और एडवांस की बजाय नेशनल ऐप्टीटयूट टेस्ट से करवाने की तैयारी चल रही है। आईआईटी काउंसिल की 23 अगस्त को आयोजित होने वाली बैठक में नेशनल ऐप्टीटयूट टेस्ट का प्रस्ताव भी लाया जा रहा है। 
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पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने प्रदेश  स्कूल शिक्षा बोर्ड की मांग पर आईआईटी में दाखिले के लिए जेईई मेन और  एडवांस की बजाय नेशनल ऐप्टीट्यूट टेस्ट से करवाने की मांग को ठुकरा दिया था। क्योंकि नेशनल ऐप्टीटयूट टेस्ट होने से छात्रों को बोर्ड के नंबरों का वैटेज नहीं मिलता। हालांकि पिछले दिनों बोर्ड वैटेज का सिस्टम खत्म होने से अब नेशनल ऐप्टीटयूट टेस्ट का रास्ता साफ हो गया है।

आईआईटी में दाखिले की तैयारी करवाने वाले व पूर्व आईआईटी छात्र डॉ. आशीष यादव के मुताबिक, नेशनल ऐप्टीटयूट टेस्ट के छात्रों को नुकसान और फायदा दोनों होगा। क्योंकि अभी तक जेईई मेन और एडवांस की परीक्षा देनी पड़ती है, लेकिन एक टेस्ट होने से बार-बार परीक्षा देने के तनाव से छात्र बच जाएंगे। 
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी एक परीक्षा की सिफारिश 

- फोटो : getty
हालांकि इस टेस्ट के लागू होने से कोचिंग सेंटर में पढ़ने वाले छात्रों को अधिक लाभ होगा, क्योंकि वे परीक्षा की तैयारी उसी ढंग से करेंगे। इससे ग्रामीण इलाकों के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र पिछड़ सकते हैं।  हालांकि छात्रों को  सबसे बड़ी राहत आउट कैंपस रहने का प्रस्ताव पास होने पर होगी। क्योंकि इसके  बाद वे कैंपस के अलावा बाहर भी रह सकेंगे।

फिलहाल आईआईटी के छात्रों को  बाहर रहने की इजाजत नहीं है। वहीं, नए छात्रों को अब अंग्रेजी भाषा के तनाव से दूर करने के लिए बीटेक प्रोग्राम में दाखिले लेने वालों को खास कोचिंग देने का भी प्रस्ताव है। 

राष्ट्रीय शिक्षा नीति में सुब्रह्मण्यम समिति ने भी 12वीं परीक्षा के बाद अलग-अलग प्रतियोगिता परीक्षा की बजाय राष्ट्रीय स्तर पर एक परीक्षा आयोजित करने की सिफारिश की थी। समिति का कहना था कि अलग-अलग परीक्षा से छात्रों को अधिक पैसे, समय खर्च होने के साथ सरकारी सिस्टम का भी नुकसान होता है। एक परीक्षा होने से उच्च शिक्षा में गुणवता में भी सुधार होगा। 
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