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केरलः 72 साल के विजयन के हाथों पिछड़े 92 साल के अच्युतानंदन

Fri, 20 May 2016 04:41 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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केरल से माकपा पोलित ब्यूरो के अकेले सदस्य और लंबे समय तक राज्य में सीपीआई के सचिव रहे पिनरायी विजयन केरल के अगले मुख्यमंत्री होंगे। उन्होंने इस रेस में पूर्व मुख्यमंत्री और राज्य में एलडीएफ की दोबारा वापसी कराने वाले अच्युतानंद को मात दी। 
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शुक्रवार सुबह विरुवनंतपुरम में माकपा महासचिव सीताराम येचुरी की अध्यक्षता में आयोजित स्टेट पार्टी कमेटी की बैठक में 72 साल के विजयन के नाम पर मुख्यमंत्री के लिए मुहर लगी। वहीं इसकी सूचना मुख्यमंत्री की रेस में चल रहे अच्युतानंदन को भी दी गई जो कैंटोनमेंट स्थित अपने आवास से बैठक में पहुंचे। 

सीपीआई के महासचिव सीताराम येचुरी ने घोषणा करते बताया कि केरल में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट के नेता पिनयारी विजयन ही होंगे। इसके साथ ही यह बात भी साफ हो गई है कि केरल में मुख्यमंत्री पद पर पिनरायी विजयन ही बैठेंगे।
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  We have decided that Pinarayi Vijayan is proposed as the leader of the legislative party of LDF: Sitaram Yechury pic.twitter.com/1fMZ74H9nk — ANI (@ANI_news) May 20, 2016
वहीं मुख्यमंत्री के लिए विजयन के नाम की घोषणा होते ही एकेजी भवन पर आयोजित पार्टी कार्यकर्ताओं में जश्न का दौर शुरू हो गया। एक दूसरे को मिठाई खिलाकर उन्होंने जीत की बधाई दी। 

वहीं बैठक में पहुंचे अच्युतानंदन इस फैसले से संतुष्ट नहीं दिखाई दिए। एक दिन पहले ही उन्होंने पत्रकारों से कहा था कि अगर पार्टी चाहे तो वह मुख्यमंत्री का पद संभालने के लिए तैयार हैं। चुनावों के दौरान पार्टी का नेतृत्व करने वाले 92 साल के अच्युतानंदन को केरल में काफी लोकप्रिय माना जाता है। 

उन्हीं के नेतृत्व में गठबंधन ने राज्य की 140 सीटों में से 91 पर कब्जा जमाया। लेकिन पार्टी नेतृत्व ने इस बार राज्य की कमान उनके हाथों में न सौंपने का फैसला किया। वहीं इस रिपोर्ट के बाद अच्युतानंदन पार्टी की बैठक बीच में छोड़कर ही निकल आए। 
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पी विजयन ने गरीबी में काटा है बचपन

राज्य के भावी मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन 21 मार्च 1944 को कन्नूर जिले के पिनरायी में हुआ था। गरीब मां बाप के घर में जन्मे विजयन ने काफी संघर्षों के बाद यह मुकाम तय किया। स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने जीवन यापन के लिए एक हैंडलूम वर्कर के तौर पर भी काम किया। 

इसके बाद उन्होंने आगे की पढ़ाई पूरी करने के लिए गवर्नमेंट ब्रेनन कालेज में एडमिशन लिया। यहां से छात्र राजनीति के जरिए उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरूआत की। यहां उन्होंने सीपीआई की छात्र इकाई एसएफआई को ज्वाइन कर लिया। 

यहां से केरल स्टूडेंट फेडरेशन के सचिव और अध्यक्ष पद से होते हुए वह केरल स्टेट यूथ फेडरेशन के अध्यक्ष तक पहुंचे। 1970 में वह कूथुपरंबा से पहली बार विधानसभा पहुंचे। 1977 और 1991 में भी वह यहां से विधानसभा के लिए चुने गए। इसके बाद 1996 के चुनाव में वह पयन्नूर से जीतकर विधानसभा पहुंचे।

1996 से 1998 तक वह राज्य के मंत्रीमंडल में भी रहे। 1998 में उन्हें सीपीआईएम का राज्य सचिव बनाया गया। साल 2002 में उन्हें माकमा की सर्वोच्‍च इकाई पोलित ब्यूरो में शामिल कर लिया गया। इसी बीच एक दौर ऐसा भी आया जब सीपीआई ने विजयन और पूर्व मुख्यमंत्री अच्युतानंद को पोलित ब्यूरो से बाहर कर दिया, लेकिन जल्द ही उनकी वापसी हो गई। वैसे विजयन का विवादों से भी लंबा नाता रहा है। 

1998 में राज्य के ऊर्जा मंत्री रहते हुए उन पर एसएनसी लवलीन घोटाले में शामिल होने का आरोप लगा था। कनाडा की फर्म से तीन जनरेटरों की खरीद फरोख्त में 375 करोड़ के घोटाले के आरोप उन पर भ्‍ाी लगे, जिसमें सीबीआई ने नौंवे आरोपी के तौर पर उनका नाम शामिल किया। हालांकि विजयन ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया थ्‍ाा।

वहीं 2009 में भी उनका नाम उस समय विवादों में आ गया जब चेन्नई एयरपोर्ट पर तलाशी के दौरान उनके बैग से पिस्टल की पांच गोलियां मिली थीं। उन्हें राज्य में अच्युतानंद का विरोधी माना जाता है। पिछली एलडीएफ सरकार में भी मुख्यमंत्री के पद के लिए उनमें और अच्युतानंद में लंबी खींचतान चली थी, जिसमें अंत में वयोवृद्ध नेता विजयी रहे थे।
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