मध्यप्रदेश की उपभोक्ता आयोग बेंच ने इंदौर के एक निजी अस्पताल और उसके दो डॉक्टरों पर 15 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। आयोग ने यह जुर्माना डॉक्टरों और अस्पताल की लापरवाही के लिए लगाया है। बेंच ने आदेश दिया है कि जुर्माने की यह रकम उस सात वर्षीय बच्ची को दी जाए जिसकी मां की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट गलत दी गई थी।
आयोग ने कहा है कि डॉक्टरों और अस्पताल की लापरवाही के कारण ही बिना एक हाथ और एक किडनी की बच्ची का जन्म हुआ था। नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमिशन (एनसीडीआरसी) की मध्यप्रदेश पीठ की अध्यक्षता कर रहे जेएम मलिक ने कहा कि विशेष हॉस्पिटल और इसके दो डॉक्टर उस बच्ची को यह रकम देंगे।
हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, आयोग ने जिन डॉक्टरों को यह आदेश दिया है वह अस्पताल में अल्ट्रासोनोग्राफी विभाग में भ्रूण के विकास का अध्ययन करते हैं। बेंच ने कहा कि अगर दो डॉक्टर अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट तैयार करते हैं और दोनों अपनी रिपोर्ट में भ्रूण का सही विकास यानी पेट में पल रहे बच्चे के सभी अंग ठीक बताते हैं तो यह गंभीर मसला है।