राजद्रोह कानून का बड़े पैमाने पर दुरूपयोग का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिका में कहा गया कि 54 वर्ष पूर्व शीर्ष अदालत की संविधान पीठ ने इस कानून के दायरे को कम करने केबावजूद सरकारें इसका दुरूपयोग कर रही है।
गैर सरकारी संगठन कॉमन काउज और एसपी उदयकुमार की ओर से दाखिल याचिका में गुहार की गई है कि सरकारों को 1962 में केदरनाथ बनाम बिहार मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश को सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि ऐसा कोई कृत्य जिससे हिंसा भड़कने की आशंका हे या हिंसा हो, तभी भारतीय दंड संहिता की धारा-124 ए (राजद्रोह का मुकदमा) लगाई जा सकती है।
याचिका में कहा कि हर सरकार अपने विरोधियों की आवाज दबाने के लिए धारा-124ए का दुरूपयोग कर रही है। राजनीतिक फायदे के लिए बड़े पैमाने पर विभिन्न सरकारें इसका इस्तेमाल कर रही हैं। गिरफ्तारी और राजद्रोह का मुकदमा दर्ज करने में पुलिस और सरकारें शायद ही सुप्रीम कोर्ट की पाबंदियों का सम्मान करती है।
याचिका में नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि वर्ष 2014 में राजद्रोह के47 मुकदमे दर्ज किए गए थे। इन मामलों में 58 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन केवल एक ही मामले में सरकार आरोपी पर दोष साबित करने में सफल रही।