तनाव के बीच दोनों देशों ने सैन्य और राजनयिक चैनलों के माध्यम से एक दूसरे के साथ संचार संबंध बनाए रखा। हमारा उद्देश्य एलएसी के साथ-साथ शांति और शांति बहाल करने के लिए असहमति और यथास्थिति बनाए रखना था।
बता दें कि राज्यसभा में एक वक्तव्य के जरिए दोनों देशों के बीच हुए समझौते का विवरण देते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि चीनी सेना झील के उत्तरी किनारे पर फिंगर-8 के पूर्व में अपनी सैन्य उपस्थिति बनाए रखेगी तो दूसरी ओर भारतीय सेना फिंगर-3 के पास मेजर धन सिंह थापा चौकी पर बनी रहेगी।
रक्षा मंत्री ने कहा कि दोनों पक्ष चरणबद्ध, समन्वित और सत्यापित तरीके से अपनी आगे की तैनाती को रोक देंगे। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों द्वारा झील के दक्षिणी किनारे पर भी इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि पूर्वी लद्दाख के विवादास्पद पेंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी इलाके में अप्रैल 2020 से पहले की स्थिति बहाल करने को लेकर चीन के साथ समझौता पक्का हो गया है। रक्षा मंत्री ने कहा कि यह पिछले साथ अप्रैल मई में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर बिगड़ी स्थिति के बाद भारत और चीन के बीच लगातार चल रही बातचीत का नतीजा है।
राजनाथ ने राज्यसभा में पूर्वी लद्दाख की ताजा स्थिति के जानकारी देते हुए देश को आश्वस्त किया कि इस पूरी प्रक्रिया में भारत ने कुछ भी नहीं खोया है। इस समझौते के तहत दोनों देश की सेनाओं ने आपसी सामंजस्य और श्रृंखलाबद्ध तरीकेसे पीछे हटना शुरु कर दिया है। दोनों पक्ष तय समय अंतराल पर एक दूसरे के उठाए गए कदमों की समीक्षा करेंगे।
गौरतलब है कि चीन ने फिंगर 8 से गुजरने वाले एलएसी के नकारते हुए फिंगर 4 पर आ कर दावेदारी ठोक दी थी। भारतीय सेना भी फिंगर 3 के अपने सामान्य तैनाती से हटकर फिंगर 4 के अहम ठिकानों पर कब्जा जमाकर आमने सामने की स्थिति में आ गई थी।
रक्षा मंत्री ने कहा कि इसी तरह की कार्रवाई पेंगोंग के दक्षिणी इलाके में भी दोनों सेनाओं द्वारा की जाएगी। समझौते के तहत अप्रैल 2020 को बाद पेंगोंग के उत्तरी और दक्षिणी भाग में दोनों सेनाओं ने जो भी ताजा निर्माण किए हैं उसे हटा दिए जाएंगे। यहां भी भारत उंचाई वाले स्थान पर कब्जा कर सामरिक और सैन्य लिहाज से काफी मजबूत स्थिति में है।
राजनाथ के मुताबिक यह भी तय हुआ है कि पेंगौंग के उत्तरी भाग में गश्त समेत सभी गतिविधियां स्थगित रखी जाएंगी। सैन्य और राजनयिक स्तर पर फैसले के बाद ही इसे शुरु किया जाएगा। राजनाथ ने कहा कि बुधवार को इस समझौते पर अमल शुरु हो गया है। उम्मीद है कि इससे गतिरोध से पहले की स्थिति बहाल हो जाएगी।
राजनाथ ने कहा कि एलएसी पर गश्त और तैनाती को लेकर कुछ अहम मुद्दों पर मतभेद बना हुआ है जो आगे की बातचीत में मुख्य एजेंडा रहेगा। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में भारत ने कुछ भी नहीं खोया है। पूरी बातचीत प्रधानमंत्री के एक इंच जमीन किसी को नहीं देने की प्रतिबद्धता की पृष्ठभूमि में र्हुइ है। इस दौरान चीन को एक बार फिर देश की संप्रभुता की रक्षा केप्रति भारत की प्रतिबद्धता से अवगत करा दिया गया है।
राजनाथ ने कहा कि पिछले अप्रैल के बाद से एलओसी पर जारी तनातनी के बीच देनों देश सैन्य और राजनयिक स्तर पर लगातार संपर्क में रहे। इस समझौते में ठोस सहमति बनी है कि दोनों देश मौजूदा एलएसी को मान कर उसका सम्मान करेंगे।
दोनों पक्ष में से कोई भी एकतरफा तरीकेसे एलएसी की समान्य स्थिति बदलने की कोशिश नहीं करेगा। साथ ही दोनों देशों के बीच अभी तक हुए समझौतों को दोनों पक्ष हर स्तर पर सम्मान करेंगे।
राजनाथ सिंह ने कहा कि पीछे हटने को लेकर हुआ यह समझौता जवानों के शहीदों के शौर्य और पराक्रम की नींव पर खड़ा हुआ है। इसे देश कभी नहीं भूलेगा। उन्होंने कहा कि यह सदन राजनीति से उपर उठकर इस ठंड और भयानक विषम परिस्थितियों में तैनात सेना की प्रशंसा करता है। यह सदन देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा के सवाल पर एक साथ खड़ा है।