प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के इस्तीफा देने के बाद खाली हुई फूलपुर सीट पर उपचुनाव हो रहा है। घोषणा के साथ ही भाजपा के विजयरथ के आगे बढ़ने की चर्चा शुरू हो गई। पूर्वोत्तर में धमाकेदार जीत के बाद कमल का शोर बढ़ा लेकिन बसपा के सियासी पैंतरे ने अचानक चुनावी समीकरण को उलझा दिया।
दरअसल 19 लाख 37 हजार वोटरों में पटेल, मुसलमान और दलित मतदाताओं की संख्या तकरीबन तीन-तीन लाख है। वहीं यादव मतदाता तकरीबन ढाई लाख तथा अन्य पिछड़ों की संख्या डेढ़ लाख के करीब हैं। इन्हीं वोटों का गणित सपा अपने पक्ष में करने का जोर लगाए हुए है। यही वजह है कि जैसे ही सपा को समर्थन देने की घोषणा बसपा ने की सपाइयों ने गठबंधन को प्रचार का मुख्य एजेंडा बना लिया।
प्रचार वाले हाथियों पर सपा और बसपा के झंडे दिखाई देने लगे, तो दोनों दलों के मेल वाले नारे कार्यकर्ता बुलंद करने लगे। चौराहों पर चर्चा शुरू हो गई। वोटरों में गठबंधन को लेकर बढ़ती सुगबुगाहट को भांपकर भाजपा की चिंता बढ़ी तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 8 मार्च को ताबड़तोड़ तीन सभाएं कीं और गठबंधन को टारगेट कर ही वार किए।
उन्होंने जहां सपा और बसपा की नाकामियों की याद दिलाकर वोट मांगा तो वहीं शुक्रवार को सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने बमरौली से फाफामऊ तक 25 किलोमीटर का रोड शो कर माहौल बनाया। उनके काफिले की हर गाड़ी पर सपा और बसपा का झंडा था तो सुभाष चौक, चर्च, हनुमान मंदिर चौराहे समेत पूरे रास्ते जिंदाबाद के नारे लगते रहे।
अखिलेश की मौजूदगी में प्रचार युद्ध का समापन तो हो गया, लेकिन अब 11 को वोटों की जंग होनी है जिसमें मोदी के ग्लैमर से गठबंधन का हथियार टकराएगा। भाजपा की चिंता गठबंधन है तो सपा की चिंता अतीक के उतरने से मुस्लिम वोटों का बिखराव है जिसे सहेजने के लिए अहमद हसन, अब्दुल्ला आजम जैसे मुस्लिम चेहरों को उतारा गया था तो भाजपा इस गठबंधन की काट के लिए निचले स्तर पर सभी जातियों में अपने दिग्गज नेताओं को भेजकर माहौल बनाने की रणनीति अपना रही है।
ये हैं मुख्य प्रत्याशी
नाम प्रत्याशी
कौशलेंद्र पटेल--------भाजपा
नागेंद्र पटेल-----------सपा
कांग्रेस---------------मनीष मिश्र
अतीक अहमद-------- निर्दल
जातीय गणित
पटेल---------तीन लाख
दलित---------तीन लाख
मुसलमान------तीन लाख
यादव---------ढाई लाख
अन्य पिछड़े-----डेढ़ लाख
ब्राह्मण---------तीन लाख
कायस्थ---------दो लाख
अन्य जातियां-----डेढ़ लाख