केंद्र सरकार ने 'ड्रग्स रूल्स, 1945' में संशोधन किया है। इसके तहत लाइसेंस देने वाले अधिकारियों को उन आवेदकों को प्रतिबंधित करने का अधिकार दिया गया है, जो रेगुलेटरी मंजूरी के लिए आवेदन करते समय नकली या मनगढ़ंत डेटा जमा करते हैं। इस कदम का मकसद भारत की दवा रेगुलेटरी व्यवस्था की विश्वसनीयता और पारदर्शिता को मजबूत करना है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि जीएस आर 756(ई) के माध्यम से अधिसूचित संशोधनों में औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 के तहत मौजूदा प्रावधानों के अतिरिक्त एक नया प्रवर्तन तंत्र पेश किया गया है।
आवेदन खारिज कर सकते हैं?
अभी, जो आवेदक गलत या बनावटी जानकारी देते हैं, उनके आवेदन खारिज किए जा सकते हैं या उनके मौजूदा लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं। इस बदलाव के बाद, उन्हें एक तय समय के लिए संबंधित रेगुलेटरी अथॉरिटी (राज्य या केंद्र, जो भी लागू हो) के पास और आवेदन जमा करने से रोक दिया जाएगा।
इसमें कहा गया है कि नकली या मनगढ़ंत डेटा जमा करने से रेगुलेटरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर असर पड़ता है, दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठते हैं और इससे जन-स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा हो सकते हैं।
यह फार्मा सेक्टर में चल रहे रेगुलेटरी सुधारों को और मजबूत करता है, जिसमें निगरानी बढ़ाने, नैतिक तौर-तरीकों को बढ़ावा देने और गलत काम करने वालों को उचित सजा देने पर नए सिरे से जोर दिया गया है।