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दवा कंपनियों पर सख्ती: केंद्र ने ड्रग्स नियमों में किए बदलाव, गलत जानकारी देने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

Thu, 06 Aug 2026 06:21 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी पीटीआई, नई दिल्ली।

सार

केंद्र सरकार ने ड्रग्स रूल्स, 1945 में संशोधन कर फर्जी या मनगढ़ंत डेटा जमा करने वाले आवेदकों पर सख्ती बढ़ाई है। अब ऐसे आवेदकों के आवेदन खारिज या लाइसेंस रद्द करने के साथ उन्हें तय अवधि तक नए आवेदन करने से भी रोका जा सकेगा। 
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दवाई (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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केंद्र सरकार ने 'ड्रग्स रूल्स, 1945' में संशोधन किया है। इसके तहत लाइसेंस देने वाले अधिकारियों को उन आवेदकों को प्रतिबंधित करने का अधिकार दिया गया है, जो रेगुलेटरी मंजूरी के लिए आवेदन करते समय नकली या मनगढ़ंत डेटा जमा करते हैं। इस कदम का मकसद भारत की दवा रेगुलेटरी व्यवस्था की विश्वसनीयता और पारदर्शिता को मजबूत करना है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि जीएस आर 756(ई) के माध्यम से अधिसूचित संशोधनों में औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 के तहत मौजूदा प्रावधानों के अतिरिक्त एक नया प्रवर्तन तंत्र पेश किया गया है।

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क्या है नया नियम? 
संशोधित नियमों के तहत, अगर किसी आवेदक ने गलत या बनावटी डेटा जमा किया है, तो उसे संबंधित लाइसेंसिंग अथॉरिटी (चाहे वह केंद्र हो या राज्य का रेगुलेटर, जो भी लागू हो) के पास एक तय समय के लिए नए आवेदन करने से रोका जा सकता है।

ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत पहले से मौजूद लागू करने वाले प्रावधानों के अलावा, हाल ही में नोटिफाई किए गए ये प्रावधान लाइसेंसिंग अथॉरिटी को यह अधिकार देते हैं कि वे उन संस्थाओं के आगे के आवेदनों पर रोक लगा सकें जो अपने आवेदनों के समर्थन में नकली या मनगढ़ंत डेटा जमा करती हैं।'
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मंत्रालय की ओर से क्या कहा गया है? 
मंत्रालय ने एक बयान में कहा, 'यह नियम औषधि नियम 1945 के विभिन्न प्रावधानों के तहत दायर सभी आवेदनों पर लागू होगा।' वर्तमान में, मनगढ़ंत डेटा प्रस्तुत करने वाले आवेदकों को आवेदन अस्वीकृत करने या मौजूदा लाइसेंस रद्द करने जैसी प्रवर्तनीय कार्रवाइयों का सामना करना पड़ता है।

आवेदन खारिज कर सकते हैं? 
अभी, जो आवेदक गलत या बनावटी जानकारी देते हैं, उनके आवेदन खारिज किए जा सकते हैं या उनके मौजूदा लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं। इस बदलाव के बाद, उन्हें एक तय समय के लिए संबंधित रेगुलेटरी अथॉरिटी (राज्य या केंद्र, जो भी लागू हो) के पास और आवेदन जमा करने से रोक दिया जाएगा।


इसमें कहा गया है कि नकली या मनगढ़ंत डेटा जमा करने से रेगुलेटरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर असर पड़ता है, दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठते हैं और इससे जन-स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा हो सकते हैं।

  • इस संशोधन का मकसद ऐसी गलत हरकतों को रोकना, आवेदकों की जवाबदेही बढ़ाना है। यह पक्का करना है कि दवाओं को मंजरी भरोसेमंद और वैज्ञानिक रूप से सही सबूतों के आधार पर मिले।
  •  यह नोटिफिकेशन, ग्लोबल बेस्ट प्रैक्टिस के हिसाब से भारत के रेगुलेटरी फ़्रेमवर्क को मजबूत करने की सरकार की कोशिशों के अनुरूप है।
  • उन दवा बनाने वालों और डिस्ट्रीब्यूटर्स को बढ़ावा देना है जो रेगुलेटरी नियमों का पालन करते हैं।
  • इसके साथ ही गलत कामों के सामने आए मामलों से निपटना भी है।


यह फार्मा सेक्टर में चल रहे रेगुलेटरी सुधारों को और मजबूत करता है, जिसमें निगरानी बढ़ाने, नैतिक तौर-तरीकों को बढ़ावा देने और गलत काम करने वालों को उचित सजा देने पर नए सिरे से जोर दिया गया है।

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