एनआईए और अन्य केंद्रीय एजेंसियों और राज्य पुलिस विभागों द्वारा इसके कई पदाधिकारियों पर छापा मारने और गिरफ्तार किए जाने के बाद पिछले साल सितंबर में केंद्र सरकार द्वारा पीएफआई पर प्रतिबंध लगा दिया गया था और इसे गैर-कानूनी संगठन घोषित कर दिया गया था। यह कार्रवाई गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के प्रावधानों के तहत की गई है और अचल संपत्ति को एनआईए द्वारा आतंकवाद की इनकम कहा गया है।
कार्रवाई पिछले साल अप्रैल में पीएफआई के खिलाफ दायर एक प्राथमिकी से संबंधित है और इस साल मार्च में दिल्ली की एक अदालत के समक्ष आरोप पत्र दायर किया गया था और एनआईए ने पीएफआई सहित 20 संस्थाओं को नामजद किया था। एनआईए ने पिछले साल 22 सितंबर को स्कूल परिसर की दो मंजिलों की तलाशी ली थी।
वहां एजेंसी ने आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए थे, जिससे पता चला कि इसका इस्तेमाल अभियुक्तों द्वारा अपने पीएफआई कैडर को हथियारों का प्रशिक्षण शिविरों आयोजन के लिए किया गया था। एनआईए ने कहा कि शिविरों का इस्तेमाल उनकी भावनाओं को भड़काने और उन्हें हिंसक जिहाद अपनाने हेतु भड़काने के लिए भी किया गया था, जिसका उद्देश्य आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देना था।