पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के शुक्रवार को आयोजित केरल बंद में जमकर हिंसा हुई। बमबारी, आगजनी, वाहनों को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाओं में कई लोगों के घायल होने की सूचना है। इनमें पुलिसकर्मियों के अलावा बस और ट्रकों के ड्राइवरों व सामान्य यात्री शामिल हैं। केरल में संघ के दो कार्यालयों को जबकि तमिलनाडु में भाजपा के एक कार्यालय को निशाना बनाया गया। पुलिस ने इस दौरान 500 लोगों को गिरफ्तार करने जबकि 400 को हिरासत में लेने की जानकारी दी है। वहीं, केरल हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए हड़ताल को अवैध घोषित किया और पुलिस से हिंसा, तोड़फोड़ रोकने के लिए सख्त कदम उठाने के लिए कहा।
इस बीच देशभर में पॉपलुर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के सदस्यों व पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं की धरपकड़ के बाद दूसरे दिन राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने इस संगठन की गतिविधियों को लेकर बड़ा खुलासा किया है। एनआईए ने शुक्रवार को बताया कि पीएफआई आईएसआईएस (ISIS) जैसे प्रतिबंधित आतंकी संगठन के लिए मुस्लिम युवाओं की भर्ती में जुटा था।
एनआईए ने यह दावा गुरुवार को राष्ट्रव्यापी धरपकड़ के दौरान गिरफ्तार किए गए पीएफआई कार्यकर्ताओं को कोर्ट में पेश कर पूछताछ के लिए अपनी हिरासत में लेने के लिए दलीलें पेश करते हुए किया। देश की जांच एजेंसियों ने गुरुवार को कई राज्यों में पीएफआई की आतंकी गतिविधियों के खिलाफ पहली व बड़ी कार्रवाई करते हुए संगठन के 100 से ज्यादा पदाधिकारियों व नेताओं को गिरफ्तार किया है।
आतंकवाद निरोधक एजेंसी ने पीएफआई के नेताओं और कैडरों पर केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और दिल्ली समेत देश के विभिन्न हिस्सों में आतंकवादी कृत्य करने या करने के लिए देश-विदेश से धन जुटाने या धन एकत्रित करने की साजिश रचने का आरोप लगाया।
एनआईए ने एक विशेष अदालत को लिखित में पीएफआई के इन कृत्यों का हवाला देते हुए कहा कि आरोपी हथियारों का उपयोग करके आतंकवादी कृत्यों को अंजाम देने की तैयारी में भी शामिल हैं। इनकी आतंकी गतिविधियों का उद्देश्य आम जनता के मन में आतंक पैदा करना है। मामले में गृह मंत्रालय के निर्देश पर संगठन के खिलाफ इस साल 13 अप्रैल को एफआईआर दर्ज की गई थी।
एनआईए ने कई पीएफआई नेताओं के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120 और 153 ए, गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। एनआईए ने आरोपियों की रिमांड कॉपी में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि कैसे साजिश के तहत पीएफआई नेता, पदाधिकारी और अन्य मुस्लिम युवाओं को आईएसआईएस जैसे प्रतिबंधित संगठनों में शामिल करने, उन्हें कट्टरपंथी बनाने और भर्ती करने में शामिल थे।
बता दें, पीएफआई पर कार्रवाई की लंबे समय से मांग उठ रही थी। हिजाब विवाद से लेकर पिछले वर्षों में चलाए गए सीएए और एनआरसी विरोधी आंदोलनों में भी इस संगठन की भूमिका के आरोप लगे थे। कई भाजपा नेताओं ने इस पर पाबंदी लगाने की मांग की थी। गुरुवार को हुई कार्रवाई के खिलाफ संगठन ने आज केरल बंद का आह्वान किया। इस दौरान कुछ शहरों में उपद्रव व तोड़फोड़, भाजपा व संघ कार्यालयों पर हमलों जैसी घटनाएं सामने आई थीं।
15 राज्यों में हुई थी छापेमारी
NIA ने गुरुवार को PFI पर 15 राज्यों में 93 स्थानों पर छापा मारा। केरल-39, तमिलनाडु-16, कर्नाटक-12, आंध्र प्रदेश-7, तेलंगाना-1, उत्तर प्रदेश-2, राजस्थान-4, दिल्ली-2, असम-1, मध्य प्रदेश-1, महाराष्ट्र-4, गोवा-1, पश्चिम बंगाल-1, बिहार-1 और मणिपुर में 1 स्थान पर छापा मारा था। सूत्रों के मुताबिक, NIA के करीब 300 अधिकारी तलाशी अभियान में शामिल रहे। NIA डीजी ने ऑपरेशन की निगरानी की। 2010-11 से पहले PFI मामलों में कुल 46 आरोपियों को दोषी ठहराया गया था और PFI के खिलाफ मामलों में 355 आरोपियों पर पहले ही आरोपपत्र दायर किया जा चुका है। केरल में पीएफआई के सबसे अधिक 22 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था। इनमें संगठन के अध्यक्ष ओएमए सलाम भी हैं।